फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Chhattisgarh Liquor Scam SC questions ED hurry in filing plea for non-bailable warrant

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट को लेकर जल्दबाजी पर ED से किया सवाल; जानें पूरा मामला

Thu, 19 Oct 2023 08:07 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 19 Oct 2023 08:07 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करने में जल्दबाजी पर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने याचिका दायर करने में "जल्दबाजी" पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से सवाल किया है।

विज्ञापन
Chhattisgarh Liquor Scam SC questions ED hurry in filing plea for non-bailable warrant
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की पहल की है। मामला कथित तौर पर 2,000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले का है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करने की मांग पर बड़ी टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत में आवेदन दाखिल करने में "जल्दबाजी" को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से सवाल पूछा। 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की तीन जजों की पीठ ने गैरजमानती वारंट जारी करने पर रोक लगाई। पीठ ने कहा, शीर्ष अदालत ने 18 जुलाई को इस मामले में पारित आदेश में कहा था कि ईडी को "सभी तरीकों से अपने हाथ बंद रखने चाहिए।"
विज्ञापन


अदालत अनवर ढेबर की तरफ से दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने एनबीडब्ल्यू जारी करने के ट्रायल कोर्ट के 13 अक्टूबर के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। ढेबर ने अदालत से यह निर्देश भी मांगा कि ईडी इस मामले में उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाए। ढेबर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जुलाई में उन्हें अंतरिम जमानत देने के बाद छह अक्टूबर को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ईडी ने रायपुर की निचली अदालत में नौ अक्टूबर को एक आवेदन देकर ढेबर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की। इस पर पीठ ने ईडी के वकील से सवाल किया, "एक बार जब हम कहते हैं कि आपको कोई भी कठोर कदम नहीं उठाना है, तो क्या गैर-जमानती वारंट अदालत के आदेश का उल्लंघन नहीं है? यही मुद्दा है। हमें सही या गलत का पूरा एहसास है।"

पीठ ने आवेदन पर ईडी से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की। शीर्ष अदालत ने कहा, "इस बीच, याचिकाकर्ता अंतरिम जमानत पर जारी रहेगा और गैर-जमानती वारंट जारी करने के आदेश पर रोक लगा दी गयी है।" न्यायमूर्ति कौल ने ईडी के वकील से कहा, "मुझे समझ नहीं आता कि इतनी जल्दी क्यों है?"

याचिकाकर्ता ढेबर ने दावा किया है कि प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) के संबंध में पूरी जांच और कार्यवाही "अवैध और अधिकार क्षेत्र के बाहर" है। सुप्रीम कोर्ट से पारित आदेश के बावजूद, आवेदक को आदेश के आलोक में हिरासत में लिया जाएगा। उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जा रहा है।

16 मई को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने ईडी से कहा था कि वह "डर का माहौल" पैदा न करें। छत्तीसगढ़ सरकार ने दावा किया था कि जांच एजेंसी "बेलगाम चल रही है।" कांग्रेस सरकार की तरफ से पेश वकील का दावा था कि शराब घोटाले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फंसाने की कोशिश हो रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने सु्प्रीम कोर्ट को बताया था कि राज्य के कई उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों ने ईडी अधिकारियों के बारे में शिकायत की है। सरकार का आरोप है कि ईडी के अधिकारी, सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तारी की धमकी दे रहे हैं।

ईडी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और राजनीतिक अधिकारियों वाला एक सिंडिकेट काम कर रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में शराब व्यापार में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। 2019-22 में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक काले धन की कमाई हुई।


गौरतलब है कि मनी लॉन्ड्रिंग मामला 2022 में दिल्ली की एक अदालत में दायर आयकर विभाग की चार्जशीट से उपजा है। छत्तीसगढ़ सरकार पर आरोप है कि सीएसएमसीएल (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय) से शराब खरीदने के दौरान रिश्वतखोरी हुई। प्रति शराब मामले के आधार पर राज्य में डिस्टिलर्स से रिश्वत ली गई और देशी शराब को ऑफ-द-बुक बेचा गया। ईडी के मुताबिक, डिस्टिलर्स से कार्टेल बनाने और बाजार में एक निश्चित हिस्सेदारी की अनुमति देने के लिए रिश्वत ली गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed