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Chhattisgarh: हर बार चुनावी साल में ही छत्तीसगढ़ में होते हैं बड़े नक्सली हमले, क्या बघेल की बढ़ेंगी मुश्किलें

Thu, 27 Apr 2023 04:00 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 27 Apr 2023 04:00 PM IST
सार

Chhattisgarh: दंतेवाड़ा के अरनपुर में नक्सली वारदात होने के बाद भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा यह कहकर कांग्रेस सरकार को घेर रही है कि राज्य सरकार नक्सलियों के सामने लाचार हो चुकी है। 11 जवानों के बलिदान पर शोक व्यक्त करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद अरुण साव ने इस वारदात के लिए भूपेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है...

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Chhattisgarh: Every time there are big Naxal attack in Chhattisgarh in election year
CM Bhupesh Baghel carrying coffin of Martyred Soldiers - फोटो : Agency

विस्तार

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले के बाद प्रदेश में सियासत तेज हो चली है। सूबे के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कर्नाटक दौरा रद्द कर अफसरों की बैठक ले रहे हैं। घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन समीक्षा में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ भाजपा चुनावी साल में इस मुद्दे को भुनाने में जुट गई है। वहीं, नक्सलियों के पिछले हमलों पर नजर डालें तो पता चलता है कि चुनावी साल में ही ये लोग एक्टिव होते हैं और अपनी धमक दिखाने की कोशिश करते हैं। जानकार बताते हैं कि मार्च से लेकर मई-जून का महीना नक्सलियों के लिए मुफीद माना जाता है। गर्मी के दिनों में जंगल में दृश्यता बढ़ जाती है। इसी का फायदा लेते हुए नक्सली टीसीओसी चलाकर बड़े हमले को अंजाम देते हैं।

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यह भी पढ़ें: Chhattisgarh Naxalite: नारायणपुर-ओरछा मार्ग पर सड़कें खोदी; नक्सलियों ने की मानवाधिकार संगठनों से ये अपील

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दंतेवाड़ा के अरनपुर में नक्सली वारदात होने के बाद भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा यह कहकर कांग्रेस सरकार को घेर रही है कि राज्य सरकार नक्सलियों के सामने लाचार हो चुकी है। 11 जवानों के बलिदान पर शोक व्यक्त करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद अरुण साव ने इस वारदात के लिए भूपेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, सारे देश में नक्सलवाद सिमट चुका है लेकिन छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद फलफूल रहा है, जिसके कारण जवान बलिदान हो रहे हैं और भाजपा कार्यकर्ताओं की टारगेट किलिंग हो रही है। नक्सलवाद का खात्मा करने को लेकर सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया। ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस व नक्सलियों में गुप्त गठजोड़ है। इस सरकार ने अब तक के कार्यकाल में नक्सलियों के खिलाफ कोई ऑपरेशन नहीं चलाया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल हमले की तुरंत बाद मुख्यमंत्री से बात की, इस बात से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ कितनी गंभीर है।

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भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने जवाबी हमला किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नक्सली वारदात पर स्तरहीन बयानबाजी कर बलिदानियों का अपमान कर रही है। कांग्रेस हमले की कड़ी निंदा करती है। वीर जवानों की शहादत को नमन है। नक्सलियों के मंसूबे पूरे नहीं होंगे, शांति के लिए जारी अभियान नहीं रुकेगा। चोरी छुपे बम लगाकर, पीछे से घात करके नक्सली सुरक्षा बलों का नुकसान करने में भले ही सफल हो गए, लेकिन पिछले साढ़े चार साल में हमारे जवानों ने नक्सलवादियों की कमर तोड़ कर रख दी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बयान देकर गये थे कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। राज्य के भाजपाई उनसे अलग बयान दे रहे हैं।

अमर उजाला से चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं कि नक्सल समस्या इकलौते राज्य छत्तीसगढ़ की नहीं है। यह एक राष्ट्रीय समस्या है। इसके समाधान में राज्य से ज्यादा केंद्र सरकार का रोल होता है। राज्यों में नक्सलियों से निपटने के लिए प्रदेश सरकार के सुरक्षा तंत्र के अलावा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को बेहद अहम रोल होता है। अगर किसी राज्य में नक्सली घटना होती है, तो इसका प्रभाव केंद्र और राज्य दोनों पर पड़ता हैं। इस मामले में सीधे तौर पर राज्य सरकार को कटघरे में नहीं खड़ा किया जा सकता है। हालांकि दंतेवाड़ा के मामले में कुछ नाकामी प्रदेश सरकार की है। लेकिन यह घटना राजनीतिक रूप से भूपेश बघेल सरकार को ज्यादा क्षति नहीं पहुंचा पाएगी। इसका प्रभाव चुनाव पर नहीं पड़ेगा। क्योंकि चुनाव में अभी वक्त है। भाजपा जरुर इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस को घेरेगी। क्योंकि उसके पास प्रदेश में मुद्दों की कमी है। अगर भाजपा इस चुनाव में मुद्दा बनाने की कोशिश भी करती है तो इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिलेगा।

कांग्रेस का दावा, भाजपा सरकार में हुए सबसे ज्यादा हमले

इधर, कांग्रेस ने दावा किया कि चार वर्षों के भीतर प्रदेश में 80 फीसदी नक्सली वारदातें कम हुई हैं। रमन राज में छह अप्रैल 2010 में दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में 76 सीआरपीएफ जवान, 24 अप्रैल 2017 में सुकमा के दुर्गापाल में 25 सीआरपीएफ जवान, 25 मई 2013 दरभा के झीरम, कांग्रेस नेता समेत 30 बलिदान हुए।

यह भी पढ़ें: Naxalite attack in Dantewada: जवानों की शहादत पर नक्सलियों का फरमान, गांव में नहीं करने देंगे अंतिम संस्कार

29 जून 2010 को नारायणपुर के धोडाई में 27 पुलिस जवान, 17 मई 2010 दंतेवाड़ा यात्री बस में 36 लोग (12 विशेष पुलिस अधिकारी सहित), 12 जुलाई 2009 मदनवाडा एसपी चौबे सहित 29 पुलिसकर्मी, नौ जुलाई 2007 उपलमेटा एर्राबोर 23 पुलिस कर्मी, 15 मार्च 2007 रानीबोदली बीजापुर 55 जवान बलिदान हुए थे। वर्ष 2008 से लेकर 2018 तक के आंकड़ों को यदि देखा जाए, तो इस दौरान राज्य में नक्सली हर साल 500 से लेकर 600 हिंसक घटनाओं को अंजाम देते थे, जो कि बीते साढ़े चार वर्षों में घटकर औसतन रूप से 250 तक रह गई है।

चुनावी वर्ष में नक्सली कर चुके हैं पहले भी कई हमले

  • दंतेवाड़ा नक्सली हमले से ठीक एक दिन पहले मंगलवार को बीजापुर के गंगालूर में विधायक विक्रम मंडावी के काफिले को नक्सलियों ने निशाना बनाया था। इसमें किसी प्रकार की हानि नहीं हुई। बीजापुर विधायक के काफिले में पीछे आ रही नेलसनार जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप की गाड़ी के पहिए पर गोली लगी।
  • इसी वर्ष फरवरी माह में नक्सलियों ने सिलसिलेवार तरीके से तीन भाजपा नेताओं की हत्या की थी। पांच फरवरी को बीजापुर भाजपा मंडल अध्यक्ष नीलकंठ कक्केम, 10 फरवरी को नारायणपुर बीजेपी उपाध्यक्ष सागर साहू और 11 फरवरी को इंद्रावती नदी के पार दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिले की सरहद पर बीजेपी नेता रामधर अलामी की हत्या की गई।
  • 2019 में लोकसभा के चुनाव थे। 10 अप्रैल 2019 को दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी के काफिले को निशाना बनाया गया। यहां नक्सलियों ने एंबुश लगाकर आईईडी ब्लास्ट किया था। इसमें विधायक भीमा मंडावी समेत 5 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
  • 25 मई 2013 में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर झीरम घाटी से गुजर रही थी, तभी नक्सलियों ने जोरदार हमले किए। इस हमले में कांग्रेस के विद्याचरण शुक्ल, नंदकुमार पटेल, उदय मुदलियार, महेंद्र कर्मा जैसे कद्दावर नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी।
  • 20 अप्रैल 2012 को बीजापुर के भाजपा विधायक महेश गागड़ा काफिले के साथ ग्राम सुराज अभियान से लौट रहे थे। तभी नक्सलियों ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि उनकी जान बच गई थी। इसमें करीब 6 लोगों की मौत हुई थी।
  • 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन वन मंत्री विक्रम उसेंडी पर हमला किया था। इस हमले में उसेंडी तो बच गए थे, पर सुरक्षा में लगे दो जवानों को जान गंवानी पड़ी थी।
  • 2008 के विधानसभा चुनाव में दंतेवाड़ा में प्रचार करने गए भाजपा नेता रमेश राठौर और सूर्यप्रताप सिंह को नक्सलियों ने निशाना बनाया था। दंतेवाड़ा में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष त्रिनाथ सिंह ठाकुर की गदापाल गांव के समीप हत्या कर दी थी।
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