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Cheetah Speed : तीन सेकंड में 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ता है चीता, स्पोर्ट्स कार से दोगुनी स्पीड

Sat, 17 Sep 2022 06:54 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 17 Sep 2022 06:54 AM IST
सार

भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर 1952 में चीता को देश में विलुप्त घोषित किया था। माना जाता है कि इसके पहले देश में करीब 1000 चीते थे। सरगूजा (अब छत्तीसगढ़ में) के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने 1947 में देश के अंतिम तीन चीतों को मार डाला था।

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Cheetah runs speed of 100 kmph in three seconds twice the speed of sports car
cheetah

विस्तार

चीता बिग कैट फैमिली का सबसे सुडौल, तेज रफ्तार जानवर है। तीन सेकंड में 100 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल कर लेता है। यह दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट से दोगुना तेज है। यही नहीं अच्छी से अच्छी स्पोर्ट्स कार को यह रफ्तार हासिल करने में छह सेकंड लगते हैं। छोटा सिर, पतली कमर व गठीले शरीर के कारण इनकी फुर्ती देखते ही बनती है। देश में सत्तर साल बाद इनका पुनर्जन्म होगा, जब नमीबिया से आए आठ चीतों को मध्य प्रदेश में छोड़ा जाएगा।

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23 फुट (करीब 7 मीटर) तक लंबी छलांग मार सकता है। चीता दौड़ते वक्त, हर एक सेकंड में ऐसी चार छलांगें लगाता है। चीता एक मिनट से अधिक नहीं दौड़ सकता। दौड़ते समय वह आधे समय हवा में रहता है। इतना लचीला कि दौड़ते वक्त पिछले पैर अगले पैरों से भी आगे आ जाते हैं और इसी से इसकी रफ्तार बढ़ती है लेकिन पेड़ पर चढ़ना नहीं आता। दुनिया में 7000 के करीब चीते बचे हैं, जिनमें से अधिकांश अफ्रीकी सवाना में पाए जाते हैं।
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चीते की आंखें एकदम सीधी दिशा में होती हैं। जिससे वह कई मील दूर तक देख सकता है। इसकी आंखों में इमेज स्टेबिलाइजेशन सिस्टम होता है। इसकी वजह से वह तेज रफ्तार में दौड़ते वक्त भी अपने शिकार पर फोकस बनाए रखता है। दहाड़ नहीं सकता चीता बिग कैट फैमिली का अकेला ऐसा सदस्य है जो दहाड़ नहीं सकता। वह सिर्फ गुर्राता है। 96 प्रतिशत शावक बड़े होने से पहले ही मर जाते हैं। चीते का दिल शेर की तुलना में साढ़े तीन गुना बड़ा होता है...इस कारण दौड़ते वक्त इसे भरपूर ऑक्सीजन मिल पाती है। यह तेजी से पूरे शरीर में ब्लड को पंप करता है और इसकी मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है।
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पहले 1000 थे लेकिन 1952 से भारत में विलुप्त 
भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर 1952 में चीता को देश में विलुप्त घोषित किया था। माना जाता है कि इसके पहले देश में करीब 1000 चीते थे। सरगूजा (अब छत्तीसगढ़ में) के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने 1947 में देश के अंतिम तीन चीतों को मार डाला था।

बिग कैट फैमिली के ये हैं अन्य सदस्य

  • शेर (पैंथेरा लियो): जंगल का राजा। बिग कैट फैमिली का अकेला जानवर है, जो मिलकर शिकार करता है। 7 फुट लंबाई और गर्दन व चेहरे पर बाल। 
  • बाघ (पैंथेरा टाइग्रिस) : शरीर पर काली धारियां। शेर से भारी, बलिष्ठ और फुर्तीला। दक्षिण पूर्व एशिया समेत भारत व चीन में पाया जाता है। 
  • तेंदुआ (पेंथेरा परदुस) : यह दिखने में चीते जैसा लगता है। इसके शरीर पर रोसेट शैली के निशान होते हैं जबकि चीते के शरीर पर गोल धब्बे।

123 प्रजातियों के पेड़ों के बीच 900 वर्ग किमी में दौड़ लगाएंगे
नामीबिया से आए आठ नन्हे चीते श्योपुर-मुरैना के 900 वर्ग किमी में फैले कूनो वन्यजीव अभयारण्य में 123 प्रजातियों के पेड़ों के बीच दौड़ लगाएंगे। 2018 में सरकार ने इसे नेशनल पार्क का दर्जा दिया था। इस पार्क में झाड़ियों की 71 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा बांस और घास की 34 प्रजातियां और बेलों और विदेशी वनस्पति की 32 प्रजातियां भी यहां मौजूद हैं।

चीतों को वापसी से दूर कर रहे पारिस्थितिकी तंत्र की विषमता : भूपेंद्र 
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि भारत में चीता की वापसी पारिस्थितिकी तंत्र की विषमताओं को दूर करने की दिशा में मील का पत्थर है। 28वें ओजोन दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने कहा, अंधाधुंध शिकार ने देश से चीता को विलुप्त कर दिया था। चीता के न रहने से ग्रासलैंड की इकोलॉजी खराब हुई है। इसके साथ ही चीता फूड चेन की भी अहम कड़ी है।

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