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Bday Spcl: चरण सिंह को बिना संसद गए ही छोड़ना पड़ा था पीएम पद

Fri, 23 Dec 2016 04:02 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Dec 2016 04:02 PM IST
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Chaudhary Charan Singh’s birthday today, Read ten facts
आज देश के पांचवें प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह का जन्मदिवस है। चौ.चरण सिंह को भारत में किसानों की आवाज बुलन्द करने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है। इसी के चलते उनके जन्मदिवस को 'किसान दिवस' के रूप में मनाया जाता है। चरण सिंह ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने संसद का एक बार भी सामना किए बिना ही त्यागपत्र दे दिया। आइए जानते हैं उन्हें जुड़े ऐसे ही 10 रोचक तथ्य...
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1- चौधरी चरण सिंह राजनेता होने के साथ-साथ एक लेखक भी थे और अंग्रेजी भाषा पर अच्छा अधिकार रखते थे। उन्होंने 'अबॉलिशन ऑफ़ ज़मींदारी', ‘लिजेण्ड प्रोपराइटरशिप’ और ‘इंडियास पॉवर्टी एण्ड इट्स सोल्यूशंस’ पुस्तकें लिखीं।
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2- चरण सिंह केवल 5 महीने और कुछ दिन ही देश के प्रधानमंत्री रह पाए और बहुमत साबित करने से पहले ही उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा।  

3- चौधरी चरण सिंह ने जवाहर लाल नेहरू के सोवियत-पद्धति पर आधारित आर्थिक सुधारों का विरोध किया था क्योंकि उनका मानना था कि सहकारी-पद्धति की खेती भारत में सफल नहीं हो सकती। 
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4- चौधरी चरण सिंह का जन्म पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नूरपुर गांव में हुआ था। उनके परिवार का संबंध बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह से था जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत ने दिल्ली के चांदनी चौक में फांसी दे दी थी। 

5- आगरा विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई करने के बाद चौधरी चरण सिंह ने गाज़ियाबाद में वकालत की। कहा जाता है कि वह उन्हीं मुकदमों को स्वीकार करते थे जिनमें मुवक्किल का पक्ष न्यायपूर्ण लगता था।

गांधी जी के आंदोलन में निभाई थी अहम भूमिका

Chaudhary Charan Singh’s birthday today, Read ten facts
चौधरी चरण सिंह
6- कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (1929) के बाद उन्होंने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया और सन 1930 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान 'नमक कानून’ तोड़ने चरण सिंह को 6 महीने की सजा सुनाई गई। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने स्वयं को देश के स्वतन्त्रता संग्राम में पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया।

7- 1937 में 34 साल की उम्र में चौधरी चरण सिंह बागपत के छपरौली से विधान सभा के लिए चुने गए। विधनासभा में उन्होंने किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बिल पेश किया, जिससे बाकी राज्यों ने भी सीख ली।

8- आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जब इंदिरा गांधी हारीं और केंद्र में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में 'जनता पार्टी' की सरकार बनी तो चरण सिंह को इस सरकार में गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री बनाया गया।

9- जनता पार्टी की आपसी कलह के कारण मोरारजी देसाई की सरकार गिर गयी जिसके बाद कांग्रेस और सीपीआई के समर्थन से चरण सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें बहुमत साबित करने का वक़्त दिया पर इंदिरा गांधी ने पहले ही अपने समर्थन वापस ले लिया इस प्रकार संसद का एक बार भी सामना किए बिना चौधरी चरण सिंह ने प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया।

10- चौधरी चरण सिंह के बेटे 'राष्ट्रीय लोक दल' पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह हैं। जिनकी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूत पकड़ मानी जाती है।
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