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त्योहारी सीजन में दुकानदारों को बड़ी राहत: दिवाली तक नहीं लगेगा यूपीआई पर चार्ज; सरकार ने क्यों लिया फैसला?

Tue, 13 Oct 2026 01:44 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 13 Oct 2026 01:44 PM IST
सार

यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करने की समयसीमा को सरकार ने बढ़ा दी है। 15 अक्तूबर की जगह अब यह चार्ज दिवाली के बाद लागू होगा। हालांकि यह किस तारीख से लागू होगा अभी इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। पढ़ें रिपोर्ट...
 

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Charges to apply on UPI payments after Diwali Why did NPCI take this step It explains  reason itself
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपीआई से भुगतान करने वालों और दुकानदारों के लिए अहम खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया है। एनपीसीआई ने मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया कि यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। अब यह शुल्क दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा, हालांकि इसकी सटीक तारीख अलग से घोषित होगी। यह शुल्क सभी यूपीआई भुगतानों पर नहीं लगेगा, बल्कि तय शर्तों के तहत आने वाले कुछ कारोबारी लेनदेन पर ही लागू होगा।

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क्या है एमडीआर और किसे देना होता है यह शुल्क?
एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले दुकानदार या कारोबारी को बैंक और पेमेंट प्रोसेसर को देना पड़ता है। इस शुल्क का इस्तेमाल भुगतान व्यवस्था से जुड़े अलग-अलग भागीदारों की लागत को पूरा करने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने में किया जाता है। सरकार और NPCI ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या NPCI की ओर से वसूला जाने वाला शुल्क।
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2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा भुगतान पर 0.4% एमडीआर
पहले घोषित व्यवस्था के मुताबिक, तय श्रेणियों में आने वाले 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि, 75,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। वहीं, 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नियम सभी दुकानों और सभी यूपीआई भुगतानों पर लागू नहीं होंगे। शुल्क केवल उन्हीं कारोबारी लेनदेन पर लगेगा, जो तय व्यवस्था के दायरे में आते हैं।

रेलवे से लेकर बीमा तक, जरूरी सेवाओं के लिए अलग शुल्क
कुछ जरूरी सेवाओं से जुड़े चुनिंदा कारोबारी लेनदेन के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र ट्रांजैक्शन पर एक तय शुल्क लिया जाएगा, जो 5 रुपये प्रति लेनदेन होगा। इसमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन, बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाएं और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन श्रेणियों में आने वाले भुगतान पर प्रतिशत के हिसाब से शुल्क लेने के बजाय तय रकम वाली व्यवस्था लागू होगी।

छोटे दुकानदारों को मिलेगी राहत 
छोटे दुकानदारों के लिए राहत की बात यह है कि मौजूदा क्यूआर कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक का भुगतान स्वीकार करने वाले पात्र मर्चेंट शून्य-एमडीआर व्यवस्था के तहत बने रहेंगे। इसका मतलब है कि तय शर्तें पूरी करने वाले इन छोटे कारोबारियों से एमडीआर नहीं लिया जाएगा। सरकार का कहना है कि छोटे कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट अपनाने में परेशानी न हो, इसलिए उनके लिए यह राहत जारी रखी गई है।

एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजना रहेगा पूरी तरह मुफ्त
अगर आप यूपीआई के जरिए किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजते हैं, तो इस व्यवस्था से आपको घबराने की जरूरत नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी ट्रांजैक्शन पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा, चाहे भेजी गई रकम कितनी भी हो। इसी तरह, 2,000 रुपये तक के पात्र मर्चेंट भुगतान और शून्य-एमडीआर व्यवस्था में शामिल छोटे कारोबारियों के लेनदेन पर भी शुल्क नहीं लगेगा। यानी हर यूपीआई ट्रांजैक्शन पर पैसे कटने जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।


सरकार का दावा- करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा असर
वित्त मंत्रालय ने पहले जारी बयान में स्पष्ट किया था कि नई व्यवस्था से करीब 96 प्रतिशत P2M यानी व्यक्ति से दुकानदार को किए जाने वाले यूपीआई लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। मंत्रालय के मुताबिक, शुल्क केवल तय शर्तों के तहत आने वाले चुनिंदा कारोबारी भुगतान पर लागू होगा। इसका उद्देश्य पूरे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और पेमेंट ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को भुगतान व्यवस्था के संचालन और विस्तार में मदद देना है।

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दिवाली तक पुरानी व्यवस्था जारी, नई तारीख का इंतजार
एनपीसीआई के ताजा फैसले के बाद चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू करने की प्रक्रिया अब दिवाली के बाद आगे बढ़ेगी। इसकी अंतिम तारीख अलग से बताई जाएगी। तब तक मौजूदा शून्य-MDR नियमों के तहत आने वाले ग्राहकों और पात्र छोटे दुकानदारों को राहत मिलती रहेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी शुल्क सिर्फ उन्हीं कारोबारी लेनदेन पर लगेगा, जो निर्धारित नियमों के दायरे में होंगे। इसलिए आम UPI यूजर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि एमडीआर का मतलब हर डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगना नहीं है।

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