अगस्ता वेस्टलैंड डील: दो शब्दों के हेरफेर में करोड़ों का खेल
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अगस्ता वेस्टलैंड डील की शर्तों में जरा सी हेरफेर से करोड़ों का खेल हो गया। अगस्ता वेस्टलैंड की उड़ान क्षमता के विषय में ‘अनिवार्य’ और ‘वांछनीय’ शब्दों को जोड़ा गया और फिनमेकेनिका हेलीकॉप्टर सौदे की हकदार बन गई।
सीबीआई का आरोप है कि पूर्व वायु सेना अध्यक्ष ने फिनमेकेनिका का रास्ता साफ करने के लिये मानकों को हलका कर दिया। त्यागी ने उड़ान की क्षमता को 4500 मीटर की ऊंचाई को अनिवार्य और 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने की क्षमता को वांछनीय कर दिया था, जबकि पहले 6000 मीटर तक उड़ान भरने की क्षमता अनिवार्य थी।
फिनमेकेनिका कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए यह भी कहा गया कि यह हेलीकॉप्टर कम से कम दो इंजन वाला होना चाहिए। यानी उसमें ज्यादा इंजन भी हो सकते हैं। कंपनी के अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर में तीन इंजन थे तो वह इस शर्त को पूरा करती थी।
हश्के के बयान से पता चलता है कि डील के लिए दी गई घूस
सीबीआई ने कोर्ट के समक्ष कहा कि वीवीआईपी की यात्रा के लिए 1999 तक एमआई आठ हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जाता था। यह हेलीकॉप्टर वीवीआईपी को लद्दाख या उससे ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में नहीं ले जा सकता था। इसलिए सरकार इसे बदलना चाहती थी।
सरकार ऐसा हेलीकॉप्टर खरीदना चाहती थी जो 6000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सके। इसके लिये सरकार ने वैश्विक टेंडर जारी किया था। इसके लिये 11 कंपनियों ने टेंडर भरा था। इनमें इटली की फिनमेकेनिका भी एक थी। टेंडर प्रक्रिया के बाद पहले चार व उसके बाद दो कंपनियां डील की दौड़ में थीं।
फिनमेकेनिका उनमें शामिल नहीं थी। सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि 31 अक्टूबर 2004 को एसपी त्यागी के वायुसेना अध्यक्ष बनने की घोषणा हुई। वह इसके बाद वायुसेना अध्यक्ष के साथ रहे। वह डील से संबंधित बैठकों में भी शामिल हुये थे। जब वह एक जनवरी 2005 को एयर चीफ मार्शल बने तो फिनमेकेनिका का रास्ता आसान हो गया।
फिनमेकेनिका इस डील को किसी भी तरह हासिल करना चाहती थी। कंपनी के दलाल लगातार सरकार से संपर्क कर रहे थे। इटली के प्रधानमंत्री 2005 में भारत आये तो उनके साथ फिनमेकेनिका का अधिकारी हश्के भी भारत आया था। मामले में आरोपी संजीव त्यागी ने हश्के की मुलाकात एसपी त्यागी से एक निजी स्थान पर करवाई थी। हश्के के बयान व उससे मिले दस्तावेजों से साफ हो गया था कि इस सौदे के लिये घूस दी गई।