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उम्मीदों को लगा झटका, इसरो अधिकारी ने कहा- लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की उम्मीद न के बराबर
Sat, 07 Sep 2019 11:59 AM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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Published by: Trainee Trainee
Updated Sat, 07 Sep 2019 11:59 AM IST
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चंद्रयान-2 मिशन
- फोटो : PTI
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भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2 मिशन को लेकर लोगों के बीच काफी उत्साह हैं लेकिन भारत की उम्मीदों को उस समय एक बड़ा झटका लगा जब लैंडर विक्रम का इसरो से संपर्क टूट गया। इसके बाद से ही वैज्ञानिक लैंडर से संपर्क साधने में लगे हैं।
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चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ इसरो अधिकारी ने शनिवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ‘विक्रम’ लैंडर और उसमें मौजूद ‘प्रज्ञान’ रोवर को संभवत: खो दिया है।
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इससे पहले लैंडर जब चंद्रमा की सतह के नजदीक जा रहा था तभी निर्धारित सॉफ्ट लैंडिंग से चंद मिनटों पहले उसका पृथ्वी स्थित नियंत्रण केंद्र से सपंर्क टूट गया।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई तक सामान्य तरीके से नीचे उतरा। इसके बाद लैंडर का धरती से संपर्क टूट गया। आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है।
चंद्रयान-2 मिशन से करीब से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लैंडर से कोई संपर्क नहीं है। यह लगभग समाप्त हो गया है। कोई उम्मीद नहीं है। लैंडर से दोबारा संपर्क स्थापित करना बहुत ही मुश्किल है।
चंद्रयान-2 मिशन के तहत भेजा गया 1,471 किलोग्राम वजनी लैंडर ‘विक्रम’ भारत का पहला मिशन था जो स्वदेशी तकनीक की मदद से चंद्रमा पर खोज करने के लिए भेजा गया था। लैंडर का यह नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई पर दिया गया था।
इसे चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया था और इसे एक चंद्र दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिन के बराबर काम करना था। लैंडर विक्रम के भीतर 27 किलोग्राम वजनी रोवर ‘प्रज्ञान’ था। सौर ऊर्जा से चलने वाले प्रज्ञान को उतरने के स्थान से 500 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर चलने के लिए बनाया गया था।
इसरो के मुताबिक लैंडर में सतह और उपसतह पर प्रयोग करने के लिए तीन उपकरण लगे थे जबकि चंद्रमा की सहत को समझने के लिए रोवर में दो उपकरण लगे थे।
मिशन में ऑर्बिटर की आयु एक साल है।