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Exclusive: 14 दिन में सिर्फ पांच सौ मीटर ही चलेगा रोवर, उतने में ही खुल जाएंगे चांद के लाखों साल पुराने राज

Tue, 22 Aug 2023 03:47 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 22 Aug 2023 03:47 PM IST
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सार
आखिरी के तेरह मिनट ही होंगे सबसे महत्वपूर्ण। दो मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार चंद्रमा की सतह पर उतरेगा लैंडर विक्रम। रेट्रो फायर से चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण पर किया जाएगा कंट्रोल।
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chandrayaan-3 rover run only five hundred meter on moon reveals lakhs years secret soft landing
चंद्रयान 3 - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

चंद्रमा पर उतरने वाला लैंडर जब उसकी सतह पर उतरेगा तो उसकी स्पीड करीब दो मीटर प्रति सेकेंड होगी। वैज्ञानिकों ने जो प्रोग्रामिंग और मॉनिटरिंग की है उसके मुताबिक चंद्रमा की सतह को छूने के लिए इससे ज्यादा की स्पीड बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती थी। यही नहीं जब लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतर जाएगा तो उसमें से निकलने वाला रोवर भी कुछ सेंटीमीटर की गति के हिसाब से ही चलना शुरू करेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि महज 14 दिनों तक चंद्रमा की सतह पर सक्रिय रूप से काम करने वाला रोवर महज पांच सौ मीटर ही चलकर चंद्रमा के राज खोल देगा। अमर उजाला डॉट कॉम को मिशन चंद्रयान पर बारीकी से नजर रखने वाले वैज्ञानिकों ने बताया कि चंद्रयान के लैंडिंग से तेरह मिनट पहले का वक्त सबसे चैलेंजिंग होगा।


इसलिए होगी शून्य जैसी स्पीड...
जैसे-जैसे मिशन चंद्रयान के पूरे होने की घड़ियां नजदीक आती जा रही हैं समूचे देश ही नहीं बल्कि दुनिया की निगाहें इसरो की ओर से मिलने वाली पल-पल की अपडेट पर बनी हुई है। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर संजीव सहजपाल कहते हैं कि जब चंद्रमा की सतह पर लैंडर उतर रहा होगा तो उसकी स्पीड एक तरह से शून्य ही होगी। उनका कहना है कि वैसे तो चंद्रयान में यह स्पीड दो मीटर प्रति सेकंड की होती है लेकिन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण इसकी प्रोग्रामिंग और प्रणाली ऐसी होती है कि यह सतह पर पहुंचते ही शून्य हो जाए। प्रोफेसर सहजपाल का कहना है कि जैसे-जैसे लैंडर चंद्रमा की सतह के नजदीक आता जाएगा उसकी गति सबसे महत्वपूर्ण होती जाएगी। क्योंकि चंद्रमा के जिस हिस्से पर लैंडर उतरने वाला है वहां की सतह सामान्य जैसी नहीं है। इसलिए अनुमानित गति उतरते करते वक्त 2 मीटर प्रति सेकंड की होगी।


आखिरी के 13 मिनट होंगे महत्वपूर्ण...
वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा की सतह पर लांच होने वाले लैंडर के आखिरी 13 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होंगे। क्योंकि यही वक्त होगा जब लैंडर चंद्रमा की सतह के सबसे करीब पहुंचने वाला होगा और उसके अपने गुरुत्वाकर्षण के चलते उसकी गति को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण को ध्यान में रखकर ही लैंडिंग की पूरी योजना बनाई गई हैं। एक अनुमान के मुताबिक चंद्रमा की सतह से 30 किलोमीटर की ऊंचाई से लैंडिंग शुरू करने पर लैंडर की स्पीड तेज होगी। क्योंकि इसी तेज स्पीड के साथ चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण भी उसको अपनी ओर खींचेगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर संजीव सहजपाल कहते हैं कि इसी प्रक्रिया के दौरान चंद्रयान के सिस्टम से लैंडर के उतरने की विपरीत दिशा में रेट्रो फायर शुरू होगी। इस प्रक्रिया से चंद्रयान की गति चंद्रमा की सतह पर उतरते वक्त न सिर्फ कंट्रोल में रहेगी बल्कि अनुमानतः दो मीटर प्रति सेकंड होगी। और सतह को छूते वक्त करीब करीब शून्य रह जाएगी।



रोवर एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड से चलेगा सतह पर...
वैज्ञानिकों का कहना है कि लैंडर से निकलने वाला रोवर जब चंद्रमा की सतह पर उतरेगा तो वह अपनी सबसे धीमी गति से उसको छुएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक रोवर की स्पीड चंद्रमा की सतह पर 1 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की रहने वाली है। क्योंकि चंद्रमा पर धरती की तुलना में 14 दिनों का एक दिन होता है, इसलिए यह रोवर चंद्रमा के लिए एक दिन और धरती के लिए 14 दिन की प्रोग्रामिंग और मॉनिटरिंग के साथ उतारा जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह आता है कि रोवर 14 दिन में चंद्रमा की सतह पर चलेगा कितने दिन लेगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर सहजपाल कहते हैं इसकी जो गति है उसके लिहाज से यह अपने पूरे 14 दिनों तक सिर्फ पांच मीटर की दूरी ही तय कर सकेगा। हालांकि जो प्रोग्रामिंग तय की गई है उसके मुताबिक 14 दिन बाद दोबारा दिन होने पर रोवर के एक बार फिर से चलने का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक पहले 14 दिनों के भीतर मिलने वाली जानकारी ही बेहद महत्वपूर्ण होगी।

पांच सौ मीटर में ही खोल देगा लाखों साल के राज...
वैज्ञानिकों का कहना है कि रोवर भले ही चंद्रमा की सतह पर महज पांच सौ मीटर ही चले लेकिन वह इतनी दूरी में चंद्रमा की उत्पत्ति से लेकर अब तक के तमाम अनसुलझे रहस्यों की जानकारी ले लेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रमा पर लैंडिंग के साथ टेक्नोलॉजी की न सिर्फ सफल टेस्टिंग होगी बल्कि चंद्रमा के केमिकल कंपोजिशन की भी पूरी जानकारी मिलनी शुरू हो जाएगी। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर सहजपाल कहते हैं कि चंद्रमा पर रोवर की मौजूदगी से जो सूचनाएं मिलने वाली है वह चंद्रमा की उन सभी जानकारियों को पूरा करने में मदद करेंगी जिसके बारे में अभी संपूर्ण जानकारी नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि इसमें चंद्रमा की उत्पत्ति से लेकर वहां के मौसम और गुरुत्वाकर्षण समेत भविष्य के वैज्ञानिक शोध को पूरा करने में महज पांच सौ मीटर की दूरी तक चलने वाले रोवर से ज्यादा से ज्यादा जानकारियां इकट्ठी की जा सकेंगी।

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