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Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 का लैंडर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल अलग हुए, अब 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग की तैयारी

Thu, 17 Aug 2023 08:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 17 Aug 2023 08:08 PM IST
सार

14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से रवाना होने के बाद चंद्रयान-3 ने तीन हफ्तों में कई चरणों को पार किया। पांच अगस्त को पहली बार चांद की कक्षा में दाखिल हुआ था।

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Chandrayaan 3 Propulsion Lander Module Separation soft landing soon news and updates
चंद्रयान-3 से अलग हुए लैंडर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत के चंद्रयान-3 मिशन के लिए गुरुवार को बड़ी खुशखबरी आई। चंद्रयान-3 के लैंडर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल योजना के मुताबिक, दो टुकड़ों में टूटकर अलग-अलग चांद की यात्रा कर रहे हैं। इसी के साथ चंद्रयान-3 का लैंडर अब चांद के और करीब पहुंच गया है। यह 23 अगस्त को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।

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इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन के बारे ट्वीट कर बताया कि इस बीच, प्रॉपल्शन मॉड्यूल वर्तमान कक्षा में महीनों या वर्षों तक अपनी यात्रा जारी रख सकता है। प्रॉपल्शन मॉड्यूल में पृथ्वी के वायुमंडल का स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन करने और पृथ्वी पर बादलों से ध्रुवीकरण में भिन्नता को मापने के लिए स्पेक्ट्रो-पोलरिमेट्री ऑफ हेबिटेवल प्लानेट अर्थ (SHAPE) पेलोड लगा हुआ है। यह हमें इस बारे में जानकारी देगा कि चंद्रमा पर रहने योग्य क्षमता है या नहीं। इस पेलोड को यूआर राव सैटेलाइट सेंटर और इसरो, बेंगलुरु द्वारा आकार दिया गया है।

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मिशन का अगला चरण क्या?
मिशन के अगले पड़ाव में अब लैंडर मॉड्यूल शुक्रवार को चांद की निचली कक्षा में पहुंचाया जाएगा। इसरो ने लैंडर मॉड्यूल की तरफ से एक्स पर एक पोस्ट में चंद्रयान-3 की यात्रा को लेकर ट्वीट भी किया। इसमें लैंडर की तरफ से प्रॉपल्शन के लिए कहा गया- "साथ में यात्रा के लिए शुक्रिया मित्र।" इसमें आगे कहा गया, "लैंडर मॉड्यूल सफलतापूर्वक प्रॉपल्शन मॉड्यूल से अलग हो गया। अब शुक्रवार शाम चार बजे इसे चांद की कक्षा में और नीचे उतारा जाएगा।"

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14 दिन तक प्रयोग करेगा चंद्रयान 3
बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन में लैंडर, रोवर और प्रॉपल्शन मॉड्यूल शामिल हैं। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे और 14 दिनों तक प्रयोग करेंगे। वहीं प्रॉपल्शन मॉड्लूय चांद की कक्षा में ही रहकर चांद की सतह से आने वाले रेडिएशंस का अध्ययन करेगा। इस मिशन के जरिए इसरो चांद की सतह पर पानी का पता लगाएगा और यह भी जानेगा कि चांद की सतह पर भूकंप कैसे आते हैं।

इस तरह पहुंचा चांद के पास
14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से रवाना होने के बाद चंद्रयान-3 ने तीन हफ्तों में कई चरणों को पार किया। पांच अगस्त को पहली बार चांद की कक्षा में दाखिल हुआ था। इसके बाद 6, 9 और 14 अगस्त को चंद्रयान-3 ने अलग-अलग चरण में प्रवेश किया। इसरो ने इन तीन हफ्तों में चंद्रयान-3 को पृथ्वी से बहुत दूर स्थित कक्षाओं में स्थापित किया।

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