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चंद्रयान-2 मिशन: इसरो चेयरमैन ने बताई लॉन्च होने की तारीख, चांद पर पहुंचने में लगेगा इतना समय

Sun, 14 Jul 2019 03:48 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Sun, 14 Jul 2019 03:48 PM IST
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Chandrayaan-2 mission will lauch of 15 july said ISRO chairman Dr. K. Sivan
इसरो के चेयरमैन डॉक्टर के. सिवान - फोटो : ANI

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉक्टर के. सिवान ने चंद्रयान-2 मिशन के लॉन्च होने की तारीख की घोषणा कर दी है। उन्होंने बताया है कि चंद्रयान-2 मिशन को 15 जुलाई की अलसुबह 2.51 बजे (14 और 15 जुलाई के बीच का समय ) लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन के लिए GSLV MK-III का इस्तेमाल किया जाएगा। 

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सिवान ने आगे कहा कि सफलतापूर्वक लॉन्च के बाद इसे दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रमा तक पहुंचने और लैंड करने में दो माह का वक्त लगेगा।

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इसरो ने आठ जुलाई को अपनी वेबसाइट पर चंद्रयान की तस्वीरों को जारी किया। इसकी जानकारी देते हुए इसरो के अध्यक्ष डॉक्टर के सिवान ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी) के सातवें दीक्षांत समारोह में कहा कि चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है।

अगर चंद्रयान-2 से चांद पर बर्फ की खोज हो पाती है तो भविष्य में यहां इंसानों का प्रवास संभव हो सकेगा। जिससे यहां शोधकार्य के साथ-साथ अंतरिक्ष विज्ञान में भी नई खोजों का रास्ता खुलेगा। लॉन्चिंग के 53 से 54 दिन बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान- 2 की लैंडिंग होगी और अगले 14 दिन तक यह डाटा जुटाएगा।

के सिवान ने कहा, 'चंद्रयान-2 के जरिए इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जा रहा है जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है। अगर हम उस जोखिम को लेते हैं तो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ होगा। जोखिम और लाभ जुड़े हुए हैं।' चंद्रयान छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा। ऐसा होते ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा।

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर नहीं पहुंचती सूर्य की किरणें

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक कोई भी देश नहीं जा सका है लेकिन अब यहां भारत अपने चंद्रयान- 2 को उतारकर इतिहास रचने जा रहा है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणे सीधी नहीं बल्कि तिरछी पड़ती हैं। इसलिए, यहां का तापमान बहुत कम होता है। 

चांद के दक्षिणी ध्रुव के अधिकतर भाग पर अंधेरा रहता है। इसके अलावा यहां बड़े-बड़े क्रेटर भी हैं जिनके गढ्ढों का तापमान -250 डिग्री के आसपास पहुंच जाता है। इतनी ठंड में लैंडर और रोवर को ऑपरेट करना बड़ी चुनौती है। माना जा रहा है कि इन क्रेटर्स में जीवाश्म के अलावा पानी भी बर्फ के रूप में मौजूद है।

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