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अमर उजाला से विशेष बातचीत में नायडू बोले- देश में गठबंधन की लहर है, भाजपा-कांग्रेस की नहीं 

Sun, 12 May 2019 03:12 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sun, 12 May 2019 03:12 AM IST
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chandrababu naidu says There is a wave of coalition alliance in the country, not BJP-Congress
chandrababu naidu - फोटो : PTI
दक्षिण भारत से पीएम के सवाल पर कहा, यह सब सहमति से तय होगा
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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगू देशम पार्टी के मुखिया एन चंद्रबाबू नायडू को भरोसा है कि एकता के दम पर विपक्षी गठबंधन की सरकार बनकर रहेगी। चंद्रबाबू का कहना है कि विपक्षी दलों ने चुनाव भले ही अलग-अलग और विभिन्न विचारधाराओं के साथ लड़ा हो पर देश में प्रजातांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन के लिए सब साथ होंगे। 

उन्होंने कहा- मजबूत विपक्ष एकमत है, इसमें कांग्रेस को अपनी भूमिका तय करनी है। नायडू के मुताबिक संयुक्त विपक्ष की रणनीति 19 मई को ही तय हो जाएगी। चंद्रबाबू ने कहा, राष्ट्रीय स्तर पर भले ही लड़ाई मोदी बनाम राहुल हो लेकिन देशभर में लहर संयुक्त विपक्ष की है। पूनम मेहता से बातचीत में चंद्रबाबू ने विपक्षी एकता, चुनावी समीकरणों, ईवीएम और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की आशंकाओं समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय व्यक्त की...
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क्या आम चुनाव में लड़ाई राहुल बनाम मोदी हो गई है?

राष्ट्रीय स्तर की बात करें तो यह धारणा सही है। लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर यह आकलन ठीक नहीं है। 36 राज्यों की 543 सीटों पर लड़ाई मोदी बनाम राहुल गांधी नहीं है। तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा में भाजपा कहां है? कई जगहों पर कांग्रेस की स्थिति भी यही है। कुछ राज्यों में क्षेत्रीय दलों के नेताओं का बोलबाला है। कई जगह कांग्रेस और भाजपा दोनों ही नहीं हैं। ऐसे में हम फिर मतदान के बाद मिलकर बैठेंगे और नंबर गेम की बात करेंगे।
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तेलंगाना के सीएम केसीआर कांग्रेस-भाजपा रहित गठजोड़ की बात कर रहे हैं?

देश में केवल एक बार थर्ड फ्रंट बना। तब कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया था। अब हालात अलग हैं, कांग्रेस अब यूपीए में है, उसके साथ बहुत से दल हैं। जैसे यूपी में सपा-बसपा गठबंधन अलग है लेकिन अमेठी और रायबरेली में छूट है। पूरे देश में विपक्ष इसी तरह साथ है। अभी संभव है कि विचारधारा की लड़ाई हो, मुद्दों पर एकता न हो लेकिन यह तय मानिए कि 2019 में देश को नया पीएम मिल रहा है। 

कांग्रेस के बिना थर्ड फ्रंट नहीं बन सकता?
   
नहीं, इस समय यह बहुत कठिन होगा। आपको एक राजनीतिक दल का समर्थन लेना पड़ेगा। एक पार्टी को अगुवा बनना होगा। सबको व्यावहारिक होकर सोचना होगा। कांग्रेस के सामने भी तीन विकल्प हैं। कांग्रेस समर्थन ले या बाहर से समर्थन दे या शामिल हो जाए। उसके सामने इसके अलावा कोई चौथा रास्ता नहीं है। 

बहुत से दल कांग्रेस को पसंद नहीं करते?

हमारी लड़ाई किससे है? भाजपा के खिलाफ विपक्ष को कई बातें देखनी हैं, देश के सामाजिक ताने-बाने को बचाना है। सांविधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन करना है। चुनाव से पहले समान विचारधारा के कुछ लोग एकजुट हुए, कुछ चुनाव बाद साथ आएंगे। सबको अपने हितों के बजाय देशहित को सामने रखकर सोचना है। इसलिए मेरा विश्वास है सब अपने हितों का लोकतंत्र हित के लिए त्याग करेंगे।

विपक्ष कहां खड़ा है? 

केवल दो चरण के चुनाव बाकी हैं, मुझे कहने में गुरेज नहीं है कि समूचा विपक्ष मजबूती से साथ खड़ा है। हम अपनी जनतांत्रिक जरूरत को देख रहे हैं। हमारा कुनबा लगातार शक्तिशाली हो रहा है। हम एक साल से साझा लड़ाई लड़ रहे हैं।

ईवीएम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कितना बड़ा धक्का है?

हम इस मुद्दे पर दस साल से लड़ रहे हैं। हमें सफलता भी मिली है, अब हमारा संघर्ष वोटिंग के सुधारों को लेकर है। हम इसे आगे लेकर जाएंगे। आयोग पर दबाव बनाएंगे। मतदान में और पारदर्शिता आनी चाहिए। जर्मनी भी ईवीएम को असांविधानिक करार दे चुका है। चुनाव आयोग मुद्दे को भटका रहा है। उसके पास ठोस जवाब नहीं है। लोगों को शक है। वोटर भी लोकतांत्रिक परंपरा के हिस्सेदार हैं, इसलिए आयोग को चाहिए कि मतदाता को भरोसे में लेने के लिए ठोस कदम उठाए। हम लगातार कह रहे हैं, सरकार ने सभी सांविधानिक संस्थाओं पर संकट ला दिया है। आयोग को संज्ञान लेना चाहिए। कड़े कदम उठाने चाहिए, वोटरों के हित में, ताकि उसकी प्रासंगिकता बनी रहे। 

एक सभा में आपने कहा कि कार्यकर्ताओं को समय देंगे, क्या हार की आशंका है?

ऐसा है नहीं। मैंने कहा कि कार्यकर्ता मेरे परिवार सरीखे हैं। तीन दशक से ज्यादा हो गया। राजनीति में थोड़ा आत्मावलोकन करना है। कार्यकर्ताओं के साथ समय गुजारना है। सरकार बनने के बाद भी मैं हर दिन कार्यकर्ताओं को वक्त दूंगा, ऐसा तय किया है।

क्या नया प्रधानमंत्री दक्षिण से होगा?

नहीं, ऐसा कहना विपक्ष में दरार डालने की कोशिश है। हम साथ मिलकर सहमति से पीएम तय करेंगे...पर पीएम तो विपक्ष से ही होगा। यह तय है।
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