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132 साल की विरासत को आगे बढ़ाने में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की चुनौतियां

Sat, 16 Dec 2017 01:03 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Sat, 16 Dec 2017 01:03 PM IST
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Challenges of Congress President Rahul Gandhi in pursuing the heritage of 132 years old party
राहुल गांधी - फोटो : @INCIndia
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के नए अध्यक्ष हैं राहुल गांधी। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष एम. रामचंद्रन ने इसकी घोषणा की। इसके साथ ही कांग्रेस में राहुल युग की औपचारिक शुरुआत हो गई है। 132 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी के इतिहास में राहुल गांधी 60वें अध्यक्ष बने हैं। वे गांधी-नेहरू परिवार से छठे और आजादी के बाद से कांग्रेस पार्टी के 17वें अध्यक्ष बने। 
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राहुल के सामने है क्या होंगी चुनौतियां 
राहुल गांधी ने 2004 में लोकसभा का चुनाव जीतकर राजनीति में औपचारिक कदम रखा था। इसके तीन साल बाद 2007 में उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया और 2013 से वह पार्टी उपाध्यक्ष रहे। इन 10 सालों के दौरान राहुल ने पार्टी संगठन के कामकाज को बहुत नजदीक से देखा है। 
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अध्यक्ष बनने के बाद नई जिम्मेदारी के साथ नई चुनौतियां भी होंगी। देशभर के कांग्रेस कार्यकर्ता जोश, उत्साह और संगठनात्मक जरूरतों के लिए उनकी तरफ देखेंगे। राहुल को पार्टी संगठन को खड़ा करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। पार्टी में जमीनी नेता नहीं हैं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को उत्साहित होकर काम करने के लिए प्रेरित करना होगा। प्रदेश कांग्रेस कमिटी, जिला कांग्रेस कमिटी काम नहीं कर रही। 

अनुभवी और युवा दोनों की जरूरत
राहुल को अनुभवी लोगों और युवाओं दोनों की जरूरत होगी। दोनों को मिला कर आगे बढ़ना मुश्किल काम है। खबरों के मुताबिक राहुल 65-70 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को पार्टी में पद नहीं देंगे। इस फैसले से अहमद पटेल और मोतीलाल वोहरा जैसे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका क्या होगी ये देखने वाली बात होगी। हालांकि राहुल अपनी टीम में पी. चिदंबरम, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल जैसे लोगों को रख सकते हैं। 

यूपीए को एकजुट रखना
सोनिया गांधी अभी यूपीए की चेयरपर्सन बनी रहेंगी या नहीं। इस सवाल पर सोनिया गांधी ने कहा है कि उनकी उम्र रिटायर होने की है। शायद वे पार्टी मेंटर के रूप में काम करती रहेंगी। यूपीए की कई सहयोगी पार्टियां हैं। टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की बात मानते हैं। लेकिन ये सभी वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की बात मानेंगे या नहीं ये भविष्य में तय होगा। हालांकि सीताराम येचुरी ने कहा था कि सोनिया गांधी के पार्टी अध्यक्ष नहीं रहने से यूपीए टूट जाएगी। 

कांग्रेस पार्टी मजबूत होगी तभी क्षेत्रीय पार्टियां उससे जुड़ेंगी और मजबूत गठबंधन के बिना 2019 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का जीतना मुश्किल होगा। नए-पुराने नेताओं को साथ लेकर चलना और सहयोगी पार्टियों के साथ गठबंधन कायम करना राहुल गांधी की मुख्य चुनौतियां होंगी। 

देश के लिए विजन बताना
राजीव गांधी 21वीं सदी की बात करते थे। कंप्यूटर को भारत लाने का श्रेय भी राजीव गांधी के नाम है। राजीव के पास एक उन्नत भारत का विजन था। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, और संजय गांधी सभी के पास एक दूरदृष्टि थी। राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हैं कि उनके राज में नौकरियां लगातार कम हुई हैं। अब राहुल गांधी को यह बताना होगा कि देश की आर्थिक नीति और विदेश नीति को लेकर उनका नजरिया क्या है। देश के विकास का मॉडल रख पाना आसान काम नहीं है और यह राहुल गांधी के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है। 

दो कांग्रेस अध्यक्षों ने ठुकराया देश का पीएम पद

Challenges of Congress President Rahul Gandhi in pursuing the heritage of 132 years old party
सोनिया गांधी - फोटो : SOCIAL MEDIA
आजादी के बाद जवाहर लाल नेहरू ने 3 साल, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने 8-8 साल और फिर सोनिया गांधी ने 19 सालों तक कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला। आजादी से पहले मोतीलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे। चार विदेशी मूल के व्यक्ति भी कांग्रेस के अध्यक्ष बने। जिन्हें भारत की आजादी से पहले यह जिम्मेदारी मिली, उनमें जार्ज यूले, वियिमन वेडरबर्न, अलफ्रेड वेब, हेनरी कॉटन और ऐनी बेसेंट शामिल हैं। 

कांग्रेस पार्टी की स्‍थापना एक अंग्रेज ए. ओ. ह्यूम ने दो भारतीयों दादा भाई नारौजी और दिनशा वाचा के साथ मिलकर की थी। 28 दिसम्बर 1885 को बांबे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में 72 प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कांग्रेस की स्‍थापना हुई थी।

महात्मा गांधी के आने के बाद यह स्वतंत्रता संग्राम का मंच बन गया। जिससे देश की आजादी की लड़ाई को धार दी गई। गांधी ने ही इसे आम भारतीय की पार्टी बनाया। साल 1924 में महात्मा गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बने। 

कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले कई नेता देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे हैं। जिनमें जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री पद और राजेन्द्र प्रसाद, नीलम संजीव रेड्डी और शंकर दयाल शर्मा राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे।

के. कामराज और सोनिया गांधी दोनों ऐसे नेता रहे जिनके सामने अध्यक्ष रहते प्रधानमंत्री बनने का मौका था लेकिन दोनों ने ही यह पद ठुकराकर पार्टी संगठन को तवज्जो दी।
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