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जस्टिस एसके कौल बोले: देश की सीमाओं तक सीमित नहीं न्याय तक पहुंच की चुनौतियां, सामूहिक ज्ञान का लाभ उठाएं लोग

Mon, 27 Nov 2023 07:38 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 27 Nov 2023 07:38 PM IST
सार

Justice SK Kaul: न्यायमूर्ति एसके कौल ने कहा कि न्याय की तलाश में कानूनी सहायता के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह निष्पक्षता, समानता और कानून के शासन के सिद्धांतों को बनाए रखने वाली आधारशिला है।

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Challenges in ensuring access to justice not confined by borders: Justice Kaul
जस्टिस एसके कौल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की चुनौतियां आपस में जुड़ी दुनिया में सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) सामूहिक ज्ञान का लाभ उठा सकता है। सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर सकता है और एक साथ आकर भौगोलिक सीमाओं से परे अभिनव समाधानों की तलाश कर सकता है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसके कौल ने सोमवार को यह बात कही। 

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न्यायमूर्ति कौल ने कानूनी सहायता तक पहुंच पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) द्वारा आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि न्याय की तलाश में कानूनी सहायता के महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह निष्पक्षता, समानता और कानून के शासन के सिद्धांतों को बनाए रखने वाली आधारशिला है।

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उन्होंने कहा, 'एक ऐसी दुनिया में जो आपस में जुड़ी हुई है, उसमें न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में हमारे सामने आने वाली चुनौतियां सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। एक साथ आकर हम सामूहिक ज्ञान का लाभ उठा सकते हैं, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर सकते हैं और भौगोलिक सीमाओं को पार करने वाले अभिनव समाधानों का पता लगा सकते हैं। मेरा भरोसा है कि हमें अपने लोगों को समझने और उनका बेहतर प्रतिनिधित्व करने के लिए अपने कार्यों और दृष्टिकोणों को विकसित करना चाहिए।'

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कानूनी सहायता को सौतेला बच्चा मानता मानते हैं वकील: वेंकटरमणी
वहीं, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि वकील कानूनी सहायता को सौतेला बच्चा मानता है, जो कि चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता कोई खैरात नहीं है। विधि अधिकारी ने कहा कि जो लोग सोचते हैं कि कानूनी पेशे में प्रगति केवल कॉर्पोरेट या सरकारी काम के जरिए  होती है, वे अपने पेशे के बुनियादी सिद्धांतों को लेकर अंधे हैं। उन्होंने कहा, वकीलों द्वारा कानूनी सहायता को सौतेले बच्चे के रूप में मानने का पाप चिंता का विषय बना हुआ है। कानूनी सहायता कोई वैकल्पिक खैरात नहीं है। मैं इस तरह के रवैये की निंदा करता हूं। 

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