Supreme Court : किराए की कोख और प्रजनन प्रौद्योगिकी कानून को चुनौती, याचिका में दावा-महिलाओं का बढ़ेगा शोषण
याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के प्रजनन अधिकारों का सीधा उल्लंघन, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए निजता के अधिकार का हनन होगा, क्योंकि यह इसका अभिन्न अंग है। इस जनहित याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं।
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किराए की कोख सरोगेसी एक्ट 2021 (Surrogacy Act, 2021) और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी कानून 2021 (Assisted Reproductive Technology Act, 2021) के प्रावधानों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस जनहित याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि इससे महिलाओं का शोषण बढ़ेगा।
न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने याचिका पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और आईसीएमआर से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि सिर्फ परोपकार के लिए किराए की कोख की अनुमति देने और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर एकतरफा पाबंदी से परिवारों के भीतर महिलाओं से बलात श्रम और सरोगेसी के लिए अनियंत्रित बाजार को बढ़ावा मिलेगा। इसके भेदभावपूर्ण और प्रतिबंधात्मक वर्गीकरण से संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त अधिकार का हनन होगा। याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के प्रजनन अधिकारों का सीधा उल्लंघन, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए निजता के अधिकार का हनन होगा, क्योंकि यह इसका अभिन्न अंग है।
यह याचिका अरुण मुथुवेल ने वकील मोहिनी प्रिया के माध्यम से दायर की है। इसमें यह भी कहा गया है कि किराए की कोख के लिए निर्धारित आयु सीमा से सरोगेसी की लागत बढ़ेगी। उन्होंने इन कानूनों के कई अस्थायी प्रावधानों व अस्पष्टता की ओर भी अदालत का ध्यान आकृष्ट किया है।
बता दें, सरोगेसी एक्ट 2021 से संबंधित विधेयक को संसद की मंजूरी के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद ने मंजूरी दे दी थी। यह देश में लागू हो चुका है। इसके जरिए सरोगेसी को वैधानिक मान्यता देने और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। नए कानून से किराए की कोख को धंधा बनाने पर रोक लगा दी गई है। इसमें सिर्फ मातृत्व सुख प्राप्त करने के लिए ही किराए की कोख के इस्तेमाल की छूट है।
बता दें, किराए की कोख का इस्तेमाल कर निसंतान दंपती बच्चे के माता-पिता बन सकते हैं। इसमें दंपती द्वारा चुनी गई सरोगेट मदर उनके बच्चे को अपने गर्भ में पालती है। गर्भावस्था के दौरान उसका पूरा खर्च दंपती उठाते हैं। यानी किराए की कोख लेकर उक्त दंपती माता-पिता बन सकते हैं। किराए की कोख के लिए दूसरी महिला को तैयार करने के बाद डॉक्टर आईवीएफ तकनीक से पुरुष के स्पर्म में से शुक्राणु लेकर सरोगेट महिला की कोख में प्रत्यारोपित करते हैं। मौजूदा कानून में सरोगेसी की इजाजत तभी दी जाती है, जब संतान प्राप्ति का इच्छुक युगल चिकित्सा कारणों से इसमें समर्थ न हो।