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मोदी-शाह के करीबी हैं BSF के नए डीजी अस्थाना, सीमा पर घुसपैठियों की कमर तोड़ना होगी बड़ी चुनौती!
Tue, 18 Aug 2020 07:53 AM IST
योगेश साहू
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली।
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 18 Aug 2020 07:53 AM IST
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राकेश अस्थाना
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करीब पांच माह बाद बीएसएफ को नया डीजी मिल गया है। इस बल की कमान पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी रहे गुजरात कैडर के 84 बैच के आईपीएस राकेश अस्थाना को सौंपी गई है। ऐसे में उनके सामने पाकिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर पर कई चुनौतियां भी हैं। पहली चुनौती तो यही है कि इन दोनों देशों की सीमा से होने वाली घुसपैठ पर कैसे नियंत्रण होगा।
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पाकिस्तानी सीमा के भीतर स्थित लॉन्चिंग पैड पर 250-300 आतंकी कश्मीर में आने के लिए तैयार बैठे हैं। दूसरा, पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम नीति का उल्लंघन करना आम बात हो गई है। पिछले साल पाकिस्तान ने कश्मीर में सबसे ज्यादा 3168 बार सीजफायर तोड़ा था। इस साल का आंकड़ा देखें तो वह अब तक दो हजार से अधिक बार ऐसा कर चुका है। दूसरी ओर बांग्लादेश सीमा पर तमाम प्रयासों के बावजूद नशीले पदार्थों की तस्करी नहीं रुक पा रही है। वहां बीएसएफ रोजाना मादक पदार्थों की छोटी बड़ी खेप पकड़ती है।
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राकेश अस्थाना को तेज तर्रार अफसर माना जाता है। उनके समकक्ष दूसरे आईपीएस अधिकारियों का कहना है कि वे शुरू से ही गुजरात में मोदी और शाह के करीबी रहे हैं। उन्हें पोस्टिंग भी दमदार मिली हैं। अस्थाना ने ही 1997 में चारा घोटाले के आरोपी और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया था। उस दौरान वे सीबीआई में बतौर एसपी काम कर रहे थे।
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उसके बाद भी उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है। मौजूदा केंद्र सरकार ही उन्हें सीबीआई में लेकर आई थी। सूत्र बताते हैं कि वे सीबीआई में नंबर दो पर थे, लेकिन निदेशक आलोक वर्मा के साथ उनकी पटरी नहीं बैठ पाई। नतीजा, दोनों को सीबीआई से बाहर आना पड़ा। दोनों अफसरों पर कई तरह के आरोप लगे थे।
बता दें कि सीबीआई के वर्तमान निदेशक आरपी शुक्ला जनवरी 2021 में रिटायर होंगे। उस वक्त राकेश अस्थाना एक बार फिर सीबीआई निदेशक पद की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। अगर अस्थाना सीबीआई चीफ बनाए जाते हैं तो वे दो साल के लिए इस पद पर काम करेंगे। यदि वे बीएसएफ में ही रहते हुए अपना कार्यकाल पूरा करते हैं तो जुलाई 2021 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
अस्थाना के लिए सबसे बड़ी चुनौती घुसपैठ पर रोक लगाना रहेगी। वजह है पाकिस्तान सीमा से आतंकी कश्मीर में घुसपैठ करते हैं तो वहीं बांग्लादेश सीमा से तस्कर पश्चिम बंगाल में घुसने का प्रयास करते हैं। यहां पर पशु तस्करी का मुद्दा सबसे बड़ा है। बीएसएफ जवान ग्वालों की तरह गायों के पीछे घूमते रहते हैं।
पहले उन्हें तस्करों के चंगुल से मुक्त कराते हैं और फिर जब तक प्रशासन उनकी बोली नहीं लगाता, तब तक वे बीएसएफ की बीओपी पर ही टिकी रहती हैं। उनके खाने पीने का इंतजाम बीएसएफ के जवानों को ही करना पड़ता है। बहरहाल, दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने के लिए रोजाना संघर्ष विराम उल्लंघन कर रही है। इस साल जनवरी में 367, फरवरी में 366, मार्च में 411, अप्रैल में 387, मई में 382 और जून में 114 मामले सामने आए हैं।