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Carbon Emission: बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच कार्बन उत्सर्जन रोकने की चुनौती, इस तरह हासिल हो सकता है लक्ष्य

Fri, 29 Jul 2022 09:01 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 29 Jul 2022 09:01 PM IST
सार

टेरी के शोध पत्र में अपना योगदान देने वाली ऊर्जा विशेषज्ञ तरूणा इडनानी ने अमर उजाला को बताया कि भारत अभी अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 10 प्रतिशत नवीकरणीय संसाधनों से प्राप्त कर रहा है। लेकिन कार्बन उत्सर्जन दर को कम रखने के लिए इसे 70 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए।

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challenge of stopping carbon emissions amidst increasing energy needs this way the target can be achieved
कार्बन उत्सर्जन - फोटो : iStock

विस्तार

देश में बढ़ती आबादी और बदलते जीवन स्तर के कारण ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही देश में ऊर्जा का उत्पादन भी बढ़ रहा है। वर्ष 2010-11 में देश में कुल ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य 850 बिलियन यूनिट रखा गया था। 2015-16 में यह बढ़कर 1173 बिलियन यूनिट हो गया। 2020-21 में 1356 बिलियन यूनिट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, वास्तविक उत्पादन 1234.608 बिलियन यूनिट ही किया जा सका। इसके पूर्व वर्ष यानी 2019-20 में कुल बिजली उत्पादन 1250 बिलियन यूनिट किया गया था।

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बढ़ते बिजली उत्पादन के बाद भी ऊर्जा की कुल मांग की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर के आंकड़े के मुताबिक 2010-11 में ऊर्जा की सबसे ज्यादा मांग (Peak Demand) 122287 मिलियन यूनिट की थी, जबकि केवल 110256 मिलियन यूनिट बिजली ही उपलब्ध कराई जा सकी। कुल मांग और उत्पादन में 8.5 फीसदी का नकारात्मक अंतर रहा। देश में बढ़ते बिजली उत्पादन के कारण मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम हो रहा है, लेकिन इसके बाद भी पूरी आपूर्ति होने की स्थिति नहीं बन पा रही है। 2021-22 में मांग के अनुसार आपूर्ति 0.4 प्रतिशत नकारात्मक रही।
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जैसे-जैसे लोगों का जीवन स्तर सुधर रहा है, बिजली की मांग लगातार बढ़ने वाली है। 2001 में देश में प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 560 किलोवाट घंटा प्रति वर्ष थी जो 2022 में दोगुने से भी ज्यादा होकर 1208 किलोवाट घंटा तक हो गई। 2050 तक यह प्रति व्यक्ति के हिसाब से तीन गुना से भी ज्यादा हो सकती है। इसके साथ ही देश-दुनिया में कार्बन उत्सर्जन की समस्या बढ़ सकता है। लेकिन चूंकि पूरी दुनिया में ऊर्जा खपत में नवीकरणीय संसाधनों का उपयोग बढ़ रहा है, इस पर लगाम लगाने की कोशिशें भी की जा रही हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत विशेष उपायों को अपनाए तो कार्बन उत्सर्जन को कम रखते हुए भी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
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दि इनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (teri) के एक शोधपत्र के मुताबिक, 2030 में देश को लगभग 800 गीगावाट यूनिट ऊर्जा की आवश्यकता हो सकती है। कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसमें से 500 गीगा वाट बिजली उत्पादन नवीकरणीय संसाधनों से किया जाना चाहिए। इस समय केवल 165 गीगावाट यूनिट सोलर, हाइड्रो या विंड एनर्जी के माध्यम से उत्पादन किया जा रहा है। इसे अगले वर्षों में लगभग 350 गीगावाट यूनिट तक बढ़ाया जाना चाहिए। यानी प्रति वर्ष लगभग 40 गीगावाट बिजली उत्पादन के नए नवीकरणीय स्रोत पैदा किए जाने चाहिए।

विशेषज्ञ की राय
टेरी के शोध पत्र में अपना योगदान देने वाली ऊर्जा विशेषज्ञ तरूणा इडनानी ने अमर उजाला को बताया कि भारत अभी अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 10 प्रतिशत नवीकरणीय संसाधनों से प्राप्त कर रहा है। लेकिन कार्बन उत्सर्जन दर को कम रखने के लिए इसे 70 प्रतिशत तक लाया जाना चाहिए। देखने में यह लक्ष्य काफी बढ़ा है, लेकिन देश जिस गति से नवीकरणीय संसाधनों को तेजी से अपना रहा है, यह लक्ष्य पाना बहुत मुश्किल नहीं है। लेकिन इसके लिए केंद्र-राज्य सरकारों के साथ-साथ निजी क्षेत्र को भी सहयोग करना होगा।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गांवों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने को प्राथमिकता देनी होगी। भारत में लगभग छह लाख गांव हैं। प्रति गांव एक मेगावाट नवीकरणीय बिजली उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने पर पूरे देश में 600 गीगा वाट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन करना संभव हो सकता है। इसके लिए नई तकनीकी और निवेश की आवश्यकता होगी जिसके लिए केंद्र-राज्य और निजी क्षेत्र को प्रयास करना होगा।

भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के बाद भी दूर-दराज के गांवों में आज तक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। उन तक बिजली ले जाने की समस्या इसमें सबसे बड़ी बाधा बनती है, जबकि उन्हीं गांवों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर बिजली पहुंचाने की समस्या से बचा जा सकता है, साथ ही उन्हें 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। निजी क्षेत्र इन गांवों में निवेश के लिए अनिच्छुक हो सकता है, लेकिन यदि उनकी अतिरिक्त बिजली को निश्चित दर पर खरीद को सुनिश्चित कर दिया जाए तो निजी क्षेत्र को भी इसके लिए आकर्षित किया जा सकता है।  


ऊर्जा विशेषज्ञों की सलाह है कि सरकार को हाइड्रो एनर्जी और टरबाइन एनर्जी के नवीन उपाय अपनाना चाहिए जिससे बिजली की आपूर्ति की जा सके। सोलर, हाइड्रो और टरबाइन तकनीकी में उपयोग होने वाले उपकरणों को स्वदेश में निर्मित करने पर जोर देना चाहिए। इससे चीन जैसे देशों पर सोलर पैनलों-बैटरी के लिए निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, साथ ही इससे देश में रोजगार के विकल्प भी पैदा होंगे।

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