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ईरान के चाबहार पहुंचकर आसान हो जाएंगी भारत की मध्य एशिया तक की राहें
शशिधर पाठक/ अमर उजाला,नई दिल्ली
Updated Tue, 06 Jun 2017 11:01 PM IST
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भारत और चीन दोनों जल्द से जल्द अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच बनाना चाहते हैं। भारत ने इसके लिए जहां ईरान के चाबहार बंदरगाह से अफगानिस्तान पहुंचने के रूट को चुना है, वहीं चीन ने पाकिस्तान होते हुए आर्थिक गलियारे(सीपीईसी) को अफगानिस्तान तक ले जाने का निर्णय लिया है।
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि चाबहार भारत की प्राथमिकता में है। उन्होंने कहा कि इस बंदरगाह के विकास से जुड़ी सभी दिक्कतें दूर हो गई हैं और अब इस पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है। वहीं राजनयिकों का कहना है कि चाबहार से भारत की मध्य एशिया तक की राहें काफी आसान हो जाएंगी।
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चाबहार के बारे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि इससे जुड़े सभी मुद्दे सुलझा लिए गए हैं। परियोजना पर बहुत तेजी से काम आगे बढ़ रहा है। अब चाबहार परियोजना भारत के सपनों के अनुरुप चलेगी।
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प्रधानमंत्री की सीधी नजर
भारत ने देशों से जुडऩे(कनेक्टिविटी) को प्रथामिकता दी है। खुद विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कनेक्टिविटी को लेकर सीधे रुचि ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसको लेकर हर तीन महीने पर समीक्षा की जानकारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को सौंप दी है।
सुषमा स्वराज इसके बारे में विदेश सचिव एस जय शंकर से जानकारी लेती हैं। पीएम मोदी द्वारा बनायी गई व्यवस्था के अनुसार छह महीने में एक बार वह खुद देशों से भारत को जोडऩे वाली परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे।
ताकि इन परियोजनाओं में किसी तरह की कोई शिथिलता न आने पाए। माना यह जा रहा है कि प्रधानमंत्री की इस पहल से न केवल नेपाल, भूटान, वर्मा(म्यांमार) आदि से जुड़ी परियोजनाओं में तेजी आएगी, बल्कि ईरान के चाबहार बंदरगाह से मध्य एशिया तक पहुंचने का रास्ता आसान हो जाएगा।
चाबहार से सुलगते हैं चीन और पाकिस्तान
चाबहार से सुलगते हैं चीन और पाकिस्तान
भारत की ईरान के बंदरगाह चाबहार पहुंचने की योजना से चीन और पाकिस्तान दोनों सुलगते हैं। चाबहार पहुंचने के भारत ने ईरान से अफगानिस्तान तक के सडक़ और रेल मार्ग विकसित करने की योजना बनाई है। इस संपर्क मार्ग को कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान समेत अन्य देशों तक ले जाने की योजना है। भारत इसके जरिए मद्य एशिया तक सीधी पहुंच चाहता है। ऐसा होने पर भारतीय सामानों के लिए व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा समेत अन्य को पंख लगने के पूरे आसार हैं। ईरान से गैस पाइप लाइन की भारत तक पहुंच और मद्य एशिया के देशों तक सीधी आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा। अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच होने से भारतीय उद्योगजगत को नया बाजार भी मिलेगा। वहीं चीन की योजना पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक पहुंचने के बाद सीपीईसी को अफगानिस्तान तक ले जाने और सडक़ मार्ग से मध्य एशिया तक पहुंचने की है।
नरसिंहा राव के समय की परिकल्पना
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने भारत की विदेश नीति में नया अध्याय लिखा था। फिलिस्तीन के साथ-साथ इस्राइल से रिश्ते बढ़ाने की परिकल्पना और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच के लिए चाबहार बंदरगाह के ईरान के साथ साझा विकास की परिकल्पना उन्होंने ही की थी। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे आगे बढ़ाया। बाद में प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे तेजी से साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी इस परियोजना को लेकर खास रूचि ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी एक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने भारत की लुक ईस्ट पालिसी को एक्ट ईस्ट पालिसी का रूप दे दिया है।
रिंग ऑफ पर्ल की काट
रिंग ऑफ पर्ल(मोतियों का हार)चीन की मशहूर परियोजना है। इस परियोजना के तहत चीन न केवल जमीन पर बल्कि समुद्र में भी भारत के चारों ओर अपनी उपस्थिति बना रहा है। इसी परियोजना के तहत वह दक्षिण चीन सागर से लेकर सिंगापुर के सेतुवे, बांग्लादेश के चट्गांव, श्रीलंका के हंबनटोटा, पाकिस्तान के ग्वादर समते तमाम क्षेत्रों में अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए लगातार तत्पर है। नेपाल के बीरगंज के रेल लाइन, सडक़ के विकास की परियोजना का खाका तैयार कर रहा है। बीरगंज बिहार राज्य की सीमा से सटा क्षेत्र है। माना यह जा रहा है कि मलक्का जलडमरू के मुहाने पर स्थित चाबहार बंदरगाह तक भारत की पहुंच के बाद चीन की परियोजना को बड़ा झटका लगना तय है।
क्या है प्रगति
भूतल परिवहन और जहाजरानी मंत्री के साथ ईरान के अधिकारियों के बीच बनी सहमति के बाद तेहरान चाहता है कि भारत तेजी से बंदरगाह के विकास का काम शुरू करे। भारत इस योजना पर 250 डॉलर(25 करोड़ अमेरिकी डॉलर) निवेश करने के पक्ष में है। इसके लिए पहले चरण में एक्जिम बैंक की लाइन ऑफ क्रेडिट के जरिए 15 करोड़ डॉलर पोर्ट काम्पलेक्स के विकास पर खर्चने की योजना है। इसके अलावा 8.5 करोड़ डॉलर से बंदरगाह के अन्य हिस्सों के विकास की योजना है।
भारत की ईरान के बंदरगाह चाबहार पहुंचने की योजना से चीन और पाकिस्तान दोनों सुलगते हैं। चाबहार पहुंचने के भारत ने ईरान से अफगानिस्तान तक के सडक़ और रेल मार्ग विकसित करने की योजना बनाई है। इस संपर्क मार्ग को कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान समेत अन्य देशों तक ले जाने की योजना है। भारत इसके जरिए मद्य एशिया तक सीधी पहुंच चाहता है। ऐसा होने पर भारतीय सामानों के लिए व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा समेत अन्य को पंख लगने के पूरे आसार हैं। ईरान से गैस पाइप लाइन की भारत तक पहुंच और मद्य एशिया के देशों तक सीधी आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा। अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच होने से भारतीय उद्योगजगत को नया बाजार भी मिलेगा। वहीं चीन की योजना पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक पहुंचने के बाद सीपीईसी को अफगानिस्तान तक ले जाने और सडक़ मार्ग से मध्य एशिया तक पहुंचने की है।
नरसिंहा राव के समय की परिकल्पना
पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने भारत की विदेश नीति में नया अध्याय लिखा था। फिलिस्तीन के साथ-साथ इस्राइल से रिश्ते बढ़ाने की परिकल्पना और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच के लिए चाबहार बंदरगाह के ईरान के साथ साझा विकास की परिकल्पना उन्होंने ही की थी। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे आगे बढ़ाया। बाद में प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे तेजी से साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी इस परियोजना को लेकर खास रूचि ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी एक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने भारत की लुक ईस्ट पालिसी को एक्ट ईस्ट पालिसी का रूप दे दिया है।
रिंग ऑफ पर्ल की काट
रिंग ऑफ पर्ल(मोतियों का हार)चीन की मशहूर परियोजना है। इस परियोजना के तहत चीन न केवल जमीन पर बल्कि समुद्र में भी भारत के चारों ओर अपनी उपस्थिति बना रहा है। इसी परियोजना के तहत वह दक्षिण चीन सागर से लेकर सिंगापुर के सेतुवे, बांग्लादेश के चट्गांव, श्रीलंका के हंबनटोटा, पाकिस्तान के ग्वादर समते तमाम क्षेत्रों में अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए लगातार तत्पर है। नेपाल के बीरगंज के रेल लाइन, सडक़ के विकास की परियोजना का खाका तैयार कर रहा है। बीरगंज बिहार राज्य की सीमा से सटा क्षेत्र है। माना यह जा रहा है कि मलक्का जलडमरू के मुहाने पर स्थित चाबहार बंदरगाह तक भारत की पहुंच के बाद चीन की परियोजना को बड़ा झटका लगना तय है।
क्या है प्रगति
भूतल परिवहन और जहाजरानी मंत्री के साथ ईरान के अधिकारियों के बीच बनी सहमति के बाद तेहरान चाहता है कि भारत तेजी से बंदरगाह के विकास का काम शुरू करे। भारत इस योजना पर 250 डॉलर(25 करोड़ अमेरिकी डॉलर) निवेश करने के पक्ष में है। इसके लिए पहले चरण में एक्जिम बैंक की लाइन ऑफ क्रेडिट के जरिए 15 करोड़ डॉलर पोर्ट काम्पलेक्स के विकास पर खर्चने की योजना है। इसके अलावा 8.5 करोड़ डॉलर से बंदरगाह के अन्य हिस्सों के विकास की योजना है।