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सीएपीएफ में आईपीएस की तैनाती: केंद्र ने प्रतिनियुक्ति घटाने के बजाय बढ़ाई; सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ब्योरा

Wed, 28 Oct 2026 08:47 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 28 Oct 2026 08:47 PM IST
सार

सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति घटाने के आदेश के बावजूद सरकार ने इसे बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से प्रतिनियुक्ति का ब्योरा मांगा है। आखिर कैडर समीक्षा का प्रस्ताव कब तक पेश होगा? शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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Centre violated direction for cadre review of CAPFs, says SC, asks proposal submission by Nov 30
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की कैडर समीक्षा पर दिए गए अपने पुराने निर्देश का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने कैडर समीक्षा समिति को 30 नवंबर तक मंजूरी के लिए प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया है।
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जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने केंद्र सरकार से पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आंकड़ा भी मांगा। इनमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) शामिल हैं।
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कोर्ट ने वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक प्रतिनियुक्त आईपीएस अधिकारियों का ब्योरा मांगा। यह स्तर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रैंक के अधिकारी के बराबर होता है। 

पीठ ने अपने आदेश में कहा, शुरुआत में, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सीएपीएफ की ओर से कैडर समीक्षा के प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं और कैडर समीक्षा समिति उनकी जांच कर रही है। उन्होंने भरोसा दिया है कि 30 नवंबर तक कैडर समीक्षा समिति मंजूरी के लिए प्रस्ताव पेश कर देगी। 

पीठ ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 9 दिसंबर की तारीख तय की। साथ ही, उसने ऐश्वर्या भाटी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें 23 मई 2025 तक और अगली सुनवाई की तारीख तक, प्रत्येक सीएपीएफ में एसएजी स्तर तक प्रतिनियुक्त आईपीएस अधिकारियों की संख्या और उनका पूरा ब्योरा देना होगा।

पीठ ने यह भी कहा कि कैडर समीक्षा समिति (सीआरसी) की ओर से मंजूरी के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव की जानकारी देते हुए एक हलफनामा दाखिल किया जाए।

सीएपीएफ के अधिकारियों का क्या आरोप है?
सीएपीएफ के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने सभी सीएपीएफ में कैडर समीक्षा कराने के निर्देश का पालन नहीं किया है। यह समीक्षा 2021 से लंबित थी। 23 मई 2025 के आदेश के अनुसार, इसे छह महीने के भीतर पूरा किया जाना था। इसी आदेश का पालन नहीं करने के आरोप में अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।

शीर्ष कोर्ट सीएपीएफ के नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें सीएपीएफ के अधिकारियों की ओर से मई 2025 के कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं करने को लेकर दायर अवमानना याचिका भी शामिल है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने सीएपीएफ की कैडर समीक्षा से जुड़े मूल दस्तावेजों को देखा। इसके बाद उसने कहा, हम देख रहे हैं कि उन्होंने कैडर समीक्षा के निर्देश का उल्लंघन किया है। हम उनसे इस संबंध में भरोसा देने को कहेंगे और निर्देश का पालन करने के लिए एक तय समयसीमा देंगे। 

अवमानना याचिका दायर करने वाले अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गुरु कृष्णकुमार ने कहा कि 23 मई 2025 को कोर्ट ने आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। लेकिन सरकार ने इसे कम करने के बजाय बढ़ा दिया।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा, नए कानून के तहत बनाए गए नियमों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान है। उन्होंने बताया, पांच सीएपीएफ में समूह 'ए' के कुल 13,491 पद हैं। इनमें आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के लिए केवल 213 पद स्वीकृत हैं। फिलहाल, ऐसे अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति केवल 129 पदों पर है।

2025 के फैसले में दिए गए निर्देशों को देखने के बाद पीठ ने कहा, अदालत ने सरकार को आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति पूरी तरह खत्म करने का निर्देश नहीं दिया था। निर्देश केवल इतना था कि सीएपीएफ में ऐसी नियुक्तियों को धीरे-धीरे कम किया जाए।

जस्टिस मिश्रा ने कहा, फिलहाल, हमारे पास इस बात का स्पष्ट आंकड़ा नहीं है कि फैसले की तारीख पर प्रतिनियुक्ति का प्रतिशत कितना था। हमारे पास आज तक प्रतिनियुक्ति की जानकारी है।


उन्होंने कहा, हम यह देखना चाहते हैं कि फैसले का पालन उसके शब्दों और भावना के अनुरूप किया गया या केवल कागजों पर। इसके लिए हमें 23 मई 2025 तक सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का प्रतिशत जानना होगा। 

पीठ ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें 23 मई 2025 से लेकर अब तक सभी सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की पूरी स्थिति का संक्षिप्त विवरण देना होगा।


 
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