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तब्लीगी जमात मामले में सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा- याचिकाएं विचार करने योग्य नहीं, प्रवेश के अधिकार पर कही यह बात

Wed, 11 May 2022 08:43 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 11 May 2022 08:43 PM IST
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Centre tells Supreme Court that entry into any sovereign country can never be enforceable fundamental right news in Hindi
Supreme Court - फोटो : ANI

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि किसी भी संप्रभु देश में प्रवेश कभी भी लागू करने वाला मौलिक अधिकार नहीं हो सकता है और भारत ने तब्लीगी गतिविधियों को साल 2003 से प्रतिबंधित कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट 35 देशों के कई नागरिकों को तब्लीगी जमात की गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल होने के लिए भारत की यात्रा करने से 10 साल के लिए  ब्लैकलिस्ट करने के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं समेत अन्य पर सुनवाई कर रहा था।

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न्यायाधीश एएम खानविलकर, एएस ओका और जेबी परडीवाला की पीठ को केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि एक संप्रभु देश में प्रवेश का अधिकार, उस देश के कानून के विपरीत, संविधान के अनुच्छेद 21 के लिए कभी नहीं मिल सकता है। याचिकाओं को विचार करने योग्य न बताते हुए मेहता ने सुझाव दिया कि ब्लैकलिस्टिंग के आदेश को खारिज करने के लिए याचिकाकर्ता संबंधित अधिकारी के समझ एक प्रस्तुति दे सकते हैं।
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मेहता ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी को भी कानून के अनुसार उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनका पक्ष नहीं सुना गया या उनके खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग का आदेश जारी करते समय उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया। उनका तर्क है कि यह आदेश तब जारी हुआ था जब वे भारत में थे ही नहीं, इसलिए अनुच्छेद 21 उनके लिए उपलब्ध है।
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गुरुवार को भी जारी रहेगी सुनवाई
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 कहता है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किसी को भी उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है। सरकार के निषेध के विपरीत भारत में रहने का अधिकार कभी भी जीवन के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से नहीं मिल सकता। ब्लैकलिस्ट में शामिल किए जाने से इन लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में कोई कमी नहीं आई है। इस मामले पर सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

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