अब लोगों के बीच नहीं आएंगे शेर, गैंडे और हाथी, सरकार जंगल में ही देगी उन्हें 'दाना-पानी'
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2967 बाघ, 3,584 गैंडे और 30 हजार हाथी
गुरुवार को डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित श्रीराम वेदिरे की लिखी किताब 'ए डिस्टिंक्टिव वाटर मैनेजमेंट स्टोरी-दा राजस्थान वे' के विमोचन अवसर प्रकाश जावड़ेकर ने यह बात कही है। उन्होंने कहा, हमारे देश में करीब 2967 बाघ हैं, 3,584 गैंडे और 30 हजार हाथी हैं। जिन इलाकों में ये जानवर रहते हैं, उनके आसपास के लोगों की यह शिकायत रहती थी कि ये जानवर हमारे घरों के आसपास आ जाते हैं और घरों पर हमला कर देते हैं। किसानों का कहना था कि ये जानवर फसलों को तबाह करते ही हैं, साथ ही लोगों की जान पर भी बन आती है।
जंगल में ही मुहैया कराएंगे घास और पानी
जावड़ेकर ने बताया कि मैंने कई किसानों से बातचीत की। किसानों ने ही इसका हल भी बता दिया। वे बोले, मंत्री जी आप केवल एक काम कर दे,जहां पर ये जानवर रहते हैं, वहां पानी और घास या अन्य वनस्पति जो इन्हें पसंद है, वह उगवा दें। इसके बाद देखना कि ये जानवर कभी भी गांव या शहर की ओर नहीं आएंगे। बतौर जावड़ेकर, किसानों ने पते की बात कही। जानवर तभी तो बाहर आता है जब उन्हें अपने क्षेत्र में पानी या खाने पीने को कुछ नहीं मिलता।
50 हजार करोड़ रुपये की राशि वितरित
इसके बाद हमारे मंत्रालय ने योजना बनाई कि इन जानवरों को वहीं पर ही सब कुछ मिलेगा। जंगल में पानी पहुंचाने, घास या दूसरी वनस्पति उगाने की एक विस्तृत योजना पर काम शुरू कर दिया गया। इसके लिए विभिन्न राज्यों को 50 हजार करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा रही है। जो अंतिम रिपोर्ट तैयार हुई, उसके लिए देशभर से अफसरों को बुलाया गया था। सभी राज्य वॉटर फीडर ऑग्मेंटेशन योजना पर उक्त राशि खर्च करेंगे। उन्होंने कहा, जंगलों में पानी पहुंचाना या स्थाई वॉटर बॉडी का निर्माण करना मुश्किल नहीं है, क्योंकि देश की 80 फीसदी नदियां जंगलों से होकर बहती हैं।