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नागरिकता संशोधन विधेयक पर गृहमंत्री शाह ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, कांग्रेस का मसौदे पर विरोध

Sat, 30 Nov 2019 10:05 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 30 Nov 2019 10:05 AM IST
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centre likely to table Citizenship amendment bill in parliament on next week, shah is doing meeting
असम के एक केंद्र पर कतार में खड़े लोग (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार अगले हफ्ते नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) दोनों सदनों में पेश करने वाली है। इस विधेयक के पारित होने के बाद मुस्लिम बहुल अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी धार्मिक अल्पसंख्यक यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे। 

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इसे लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्वोत्तर के राज्यों के सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। जिसमें शामिल होने के बाद अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता नबाम तुकी ने कहा कि हम नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करते हैं क्योंकि यदि अवैध प्रवासियों को धर्म के आधार पर नागरिकता दी जाती है, तो आबादी कई राज्यों में फैल जाएगी। कौन सा राज्य उन्हें जमीन देगा?
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संसद में अगले हफ्ते पेश हो सकता है नागरिकता संशोधन विधेयक
संसद में सरकार अगले हफ्ते से नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को पेश करने वाली है। इस विधेयक के तहत मुस्लिम बहुल अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी धार्मिक अल्पसंख्यक यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे।
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इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सामाजिक और सांस्कृतिक निकायों, छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ शुक्रवार से बैठक कर रहे हैं। जिससे कि नागरिकता अधिनियम में संशोधन की योजना पर बातचीत की जा सके। यह जानकारी गृह मंत्रालाय के एक अधिकारी ने दी है।

कैब विधेयक के जरिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया जाना है ताकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यक यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाईयों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जा सके। इसका वादा भाजपा ने 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान किया था।

कैब को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है खासतौर पर पूर्वोत्तर में। उदाहरण के लिए असम में प्रस्तावित संशोधन में यह चिंता जताई गई है कि यह 1985 असम समझौते को रद्द कर देगा। जिसने सभी अवैध अप्रवासियों के निर्वासन के कट-ऑफ के लिए 24 मार्च 1971 की तारीख निर्धारित की था।

इसी तरह मिजोरम में विधेयक का विरोध हो रहा है क्योंकि यह बौद्ध चकमा शरणार्थियों को भारतीय नागरिक बना देगा। प्रस्तावित विधेयक को लेकर त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में विरोध हो चुका है। विपक्षी पार्टियां जैसे कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई (मार्क्सवादी) इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं।


इन विपक्षी पार्टियों का कहना है कि भारत का संविधान धर्म के आधार पर नागरिकता देने की बात नहीं कहता है। इसके विपरीत, भाजपा और उसके सहयोगियों ने जोर देकर कहा है कि तीनों देशों के अल्पसंख्यकों जिनमें बड़ी संख्या में हिंदू शामिल हैं, को वहां उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, इसलिए उन्हें नागरिकता दी जानी चाहिए।

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