सीएसएस पदोन्नति: नॉर्थ ब्लॉक में मचा हल्ला, एक साथ पहुंचे 1500 अधिकारी तो 10 मार्च तक प्रमोशन देने का मिला भरोसा
केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के अधिकारियों में पदोन्नति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से पदोन्नति को लेकर उनके साथ अन्याय हो रहा है। सीएसएस के अनेक अधिकारी, बिना प्रमोशन मिले ही रिटायर हो रहे हैं। जब प्रमोशन नहीं मिलता तो उन्हें वित्तीय लाभों से भी वंचित रहना पड़ता है...
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'केंद्रीय सचिवालय सेवा' यानी सीएसएस, जिसे भारत सरकार की 'रीढ़ की हड्डी' कहा जाता है, शुक्रवार को उसके 1500 अधिकारी एकाएक नॉर्थ ब्लॉक पहुंच गए। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के मंत्री 'एमओएस 'डॉ. जितेंद्र सिंह पहले से तय किसी बैठक में व्यस्त थे। उनके कार्यालय के बाहर गलियारे में खड़े सीएसएस अधिकारियों को देखकर नॉर्थ ब्लॉक में हलचल मच गई। अधिकारियों की एसोसिएशन 'सीएसएस फोरम' के सदस्यों का कहना था कि उनकी नियमित पदोन्नति छह साल से बंद है। अधिकारी, बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो रहे हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह के पीएस हिमांशु शर्मा ने इन अधिकारियों को बताया, मंत्री जी इस मुद्दे को लेकर संजीदा हैं। पदोन्नति से जुड़े ऐसे सभी मामलों को 10 मार्च तक निपटा दिया जाएगा।
केंद्रीय सचिवालय सेवा 'सीएसएस' के अधिकारियों में पदोन्नति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से पदोन्नति को लेकर उनके साथ अन्याय हो रहा है। सीएसएस के अनेक अधिकारी, बिना प्रमोशन मिले ही रिटायर हो रहे हैं। जब प्रमोशन नहीं मिलता तो उन्हें वित्तीय लाभों से भी वंचित रहना पड़ता है। पिछले दिनों इन अधिकारियों ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग 'डीओपीटी' को चेताने के लिए #SaveCSS हैशटैग के साथ एक रिले ट्विटर अभियान भी शुरू किया था। 'सीएसएस फोरम' का कहना था, इसे लेकर डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात हुई थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा। बाद में कुछ नहीं हुआ। नतीजा, अधिकारियों को नॉर्थ ब्लाक में एकत्रित होना पड़ा।
सरकार की लेट लतीफी से सीएसएस संगठित कैडर ग्रुप 'ए' के जो फायदे अधिकारियों को मिलने चाहिए थे, वे नहीं मिल रहे। पदोन्नति के लिए विभागीय परीक्षा को लेकर भी मंत्रालय सुस्त है। करीब 4500 पद खाली पड़े हैं। इनमें सीएसएस कैडर की चालीस फीसदी क्षमता गिनी जाती है। इसका कारण छह साल से नियमित पदोन्नति नहीं होना है। केंद्र सरकार में सीएसएस के अधिकारी डीओपीटी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम करते हैं। सीएसएस फोरम (सभी सीएसएस अधिकारियों की एसोसिएशन) के महासचिव मनमोहन वर्मा का कहना है कि डीओपीटी ने आरक्षण नीति मामलों पर नोडल विभाग होने के नाते सभी विभागों/मंत्रालयों को अन्य सेवा/पदों पर, जरनैल सिंह मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के परिणाम तक, पदोन्नति देते रहने के निर्देश दिए हैं।
खास बात ये है कि अन्य सभी मंत्रालय और विभाग, डीओपीटी के निर्देशों के अनुसार सभी ग्रेडों में पदोन्नति कर रहे हैं, जबकि खुद डीओपीटी के अंतर्गत आने वाली सीएस डिवीजन अपने ही सीएसएस/सीएसएसएस/सीएससीएस अधिकारियों को समय पर पदोन्नति नहीं दे रही है। इससे अधिकारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। उन्हें न्यायोचित पदोन्नति से भी वंचित रखा जा रहा है। कई अधिकारी पिछले पांच छह वर्ष से उपलब्ध रिक्तियों पर पदोन्नति दिए जाने के पात्र हैं, लेकिन उन्हें अभी तक नियमित पदोन्नति नहीं दी गई है। ऐसा नहीं है कि इस तरह का विरोध पहली बार हो रहा है। पहले भी कई बार ज्ञापन दिए गए हैं। इसके बावजूद एनएफयू एनएफएसजी के मामले लंबित पड़े हैं।