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केंद्र सरकार कहती है आधार दो, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी कहते हैं मत दो आधार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 13 Sep 2018 09:09 AM IST
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Manoj Tiwari
केंद्र की भाजपा सरकार किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए हमेशा आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने की बात कहती है। जिससे योजना का लाभ सही लोगों को मिले और उसका दुरुपयोग न हो सके। लेकिन उसी भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी यहां के लोगों से कह रहे हैं कि आधार मत दो।
दरअसल, मनोज तिवारी की यह प्रतिक्रिया उस खबर के बाद आई है जिसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों से उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड और वोटर इलेक्शन कार्ड की जानकारी स्कूल में जमा करने को कहा है। इन प्रमाण पत्रों की वैधता को जानने के लिए कथित रुप से एक एजेंसी की सेवाएं भी ली जा रही हैं।
तिवारी का कहना है कि चूंकि वैधता की जानकारी एक प्राइवेट फर्म के द्वारा कराई जा रही है, इसलिए इसके गलत हाथों में जाने और दुरुपयोग होने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस जानकारी को मांगते समय कोई कारण भी नहीं बताया है जिससे इसके दुरुपयोग की आशंका और बढ़ गई है।
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तिवारी का कहना है कि दिल्ली का कोई भी बच्चा हो, उसको शिक्षा देना सरकार का काम है, लेकिन बच्चों के अभिभावकों के इलेक्शन कार्ड मंगवाने से किसी बच्चे का क्या भला होगा, यह समझ में न आने वाली बात है। यही कारण है कि इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दिल्ली सरकार में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शिक्षा का काम खुद देख रहे हैं। शिक्षा मंत्री के रुप में काम करते हुए उनके कई प्रयासों की सराहना हुई है। कुछ स्कूलों को बेहतर सुविधाएं देने से लेकर उनके हैप्पीनेस करीकुलम की चर्चा लोगों की जुबान पर है। शिक्षा मंत्री स्वयं हर जगह इसकी चर्चा कर रहे हैं। यही कारण है कि दिल्ली सरकार की यह योजना विपक्ष के निशाने पर है।
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दरअसल, मनोज तिवारी की यह प्रतिक्रिया उस खबर के बाद आई है जिसमें कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों से उनके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड और वोटर इलेक्शन कार्ड की जानकारी स्कूल में जमा करने को कहा है। इन प्रमाण पत्रों की वैधता को जानने के लिए कथित रुप से एक एजेंसी की सेवाएं भी ली जा रही हैं।
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तिवारी का कहना है कि चूंकि वैधता की जानकारी एक प्राइवेट फर्म के द्वारा कराई जा रही है, इसलिए इसके गलत हाथों में जाने और दुरुपयोग होने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस जानकारी को मांगते समय कोई कारण भी नहीं बताया है जिससे इसके दुरुपयोग की आशंका और बढ़ गई है।
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तिवारी का कहना है कि दिल्ली का कोई भी बच्चा हो, उसको शिक्षा देना सरकार का काम है, लेकिन बच्चों के अभिभावकों के इलेक्शन कार्ड मंगवाने से किसी बच्चे का क्या भला होगा, यह समझ में न आने वाली बात है। यही कारण है कि इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दिल्ली सरकार में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शिक्षा का काम खुद देख रहे हैं। शिक्षा मंत्री के रुप में काम करते हुए उनके कई प्रयासों की सराहना हुई है। कुछ स्कूलों को बेहतर सुविधाएं देने से लेकर उनके हैप्पीनेस करीकुलम की चर्चा लोगों की जुबान पर है। शिक्षा मंत्री स्वयं हर जगह इसकी चर्चा कर रहे हैं। यही कारण है कि दिल्ली सरकार की यह योजना विपक्ष के निशाने पर है।