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West Bengal: अभी मुर्शिदाबाद में तैनात ही रहेगा केंद्रीय बल, कलकत्ता हाईकोर्ट का ममता सरकार को आदेश
Thu, 15 May 2025 09:52 PM IST
बशु जैन
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 15 May 2025 09:52 PM IST
सार
कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सौमेन सेन ने कहा कि जिलों में पुलिस की संख्या कम है। अगर पुलिस बल पर्याप्त होता, तो हाल ही में मुर्शिदाबाद में जो साम्प्रदायिक तनाव हुआ, उसे नियंत्रित किया जा सकता था।
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा है कि अशांत मुर्शिदाबाद जिले में अभी केंद्रीय बल की तैनाती बनी रहेगी। जब तक अगला आदेश न आ जाए, तब तक बल को हटाया नहीं जा सकता। इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। गुरुवार को कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सौमेन सेन ने इस संबंध में यह निर्देश दिया।
न्यायाधीश सेन ने कहा कि जिलों में पुलिस की संख्या कम है। अगर पुलिस बल पर्याप्त होता, तो हाल ही में मुर्शिदाबाद में जो साम्प्रदायिक तनाव हुआ, उसे नियंत्रित किया जा सकता था। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान हालात देखते हुए हर जिले में पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती जरूरी है। केंद्र सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया कि यदि अदालत निर्देश दे, तो एनआईए जांच के लिए तैयार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि अगले आदेश तक केंद्रीय बल तैनात रहेगी।
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गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सेन ने राज्य सरकार के अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय से कहा, अब समय आ गया है कि पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जाए। मुर्शिदाबाद समेत कई जिलों में पुलिस की संख्या बहुत कम है। यदि पर्याप्त पुलिस बल होती, तो शायद स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता था।
इसके जवाब में कल्याण बंद्योपाध्याय ने तर्क दिया कि पूरे देश में सुरक्षा बलों की संख्या कम है। अगर बल पर्याप्त होते, तो पहलगाम जैसी घटना नहीं होती। इस पर न्यायाधीश ने कहा, हर जगह कम से कम सुरक्षा बल की मौजूदगी जरूरी है। राज्य सरकार के मुआवजे पर भी सवाल उठा। अधिवक्ता ने कहा, मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया है। इस पर न्यायाधीश सेन ने पूछा, क्या मुआवजा राज्य की तय योजना के अनुरूप दिया गया है। क्योंकि जो आप पर्याप्त मान रहे हैं, वह पीड़ित परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं भी हो सकता है।
ये भी पढ़ें: सरकार ने तहव्वुर राणा के खिलाफ केस लड़ने के लिए बनाई वकीलों की टीम, तुषार मेहता बने अध्यक्ष
इस बीच, केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कहा गया है कि राज्य में कम से कम 15 स्थानों पर अशांति फैलने की आशंका है। 18 अप्रैल को ही राज्य के मुख्य सचिव और डीजी को चेतावनी दी गई थी कि केंद्रीय संपत्तियों पर हमले की संभावना है। अदालत यदि आदेश दे तो एनआईए जांच का भार लेने को तैयार है। हालांकि न्यायाधीश सेन ने यह भी कहा, अब तक जो रिपोर्ट अदालत के समक्ष आई है, उससे लगता है कि प्रशासन ने अच्छा कार्य किया है। अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
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न्यायाधीश सेन ने कहा कि जिलों में पुलिस की संख्या कम है। अगर पुलिस बल पर्याप्त होता, तो हाल ही में मुर्शिदाबाद में जो साम्प्रदायिक तनाव हुआ, उसे नियंत्रित किया जा सकता था। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान हालात देखते हुए हर जिले में पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती जरूरी है। केंद्र सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया कि यदि अदालत निर्देश दे, तो एनआईए जांच के लिए तैयार है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि अगले आदेश तक केंद्रीय बल तैनात रहेगी।
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गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सेन ने राज्य सरकार के अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय से कहा, अब समय आ गया है कि पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जाए। मुर्शिदाबाद समेत कई जिलों में पुलिस की संख्या बहुत कम है। यदि पर्याप्त पुलिस बल होती, तो शायद स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता था।
इसके जवाब में कल्याण बंद्योपाध्याय ने तर्क दिया कि पूरे देश में सुरक्षा बलों की संख्या कम है। अगर बल पर्याप्त होते, तो पहलगाम जैसी घटना नहीं होती। इस पर न्यायाधीश ने कहा, हर जगह कम से कम सुरक्षा बल की मौजूदगी जरूरी है। राज्य सरकार के मुआवजे पर भी सवाल उठा। अधिवक्ता ने कहा, मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया है। इस पर न्यायाधीश सेन ने पूछा, क्या मुआवजा राज्य की तय योजना के अनुरूप दिया गया है। क्योंकि जो आप पर्याप्त मान रहे हैं, वह पीड़ित परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं भी हो सकता है।
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इस बीच, केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कहा गया है कि राज्य में कम से कम 15 स्थानों पर अशांति फैलने की आशंका है। 18 अप्रैल को ही राज्य के मुख्य सचिव और डीजी को चेतावनी दी गई थी कि केंद्रीय संपत्तियों पर हमले की संभावना है। अदालत यदि आदेश दे तो एनआईए जांच का भार लेने को तैयार है। हालांकि न्यायाधीश सेन ने यह भी कहा, अब तक जो रिपोर्ट अदालत के समक्ष आई है, उससे लगता है कि प्रशासन ने अच्छा कार्य किया है। अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
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