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केंद्र ने की 22 भाषाओं में ईआईए मसौदा छापने के निर्देश पर पुनर्विचार की मांग
Sat, 05 Sep 2020 05:07 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 05 Sep 2020 05:07 AM IST
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Delhi High Court Demo Pic
- फोटो : फाइल फोटो
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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका देकर पर्यावरण प्रभाव आकलन 2020 के मसौदे को संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी 22 भाषाओं में प्रकाशित करने के उसके फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की याचिका पर पर्यावरणविदों को जारी किया नोटिस
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने केंद्र की याचिका पर उन पर्यावरणविदों को नोटिस जारी किया जिनकी याचिका पर ईआईए 2020 के मसौदे को 22 भाषाओं में अनुवाद करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने इन लोगों से 23 सितंबर तक जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने 30 जून के अपने आदेश में मसौदा ईआईए पर राय एवं आपत्तियां जताने के लिए समयसीमा बढ़ाकर 11 अगस्त की थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि फैसले के दस दिन के भीतर अधिसूचना सभी 22 भाषाओं में प्रकाशित की जाए। कोर्ट ने यह आदेश पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़े की याचिका पर दिया था।
केंद्र सरकार हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी लेकिन शीर्ष कोर्ट ने पहले पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को कहा था। जिसके बाद केंद्र ने याचिका वापस लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। सुपीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने तक केंद्र के खिलाफ अवमानना कार्रवाई पर रोक भी लगाई थी।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र की याचिका पर पर्यावरणविदों को जारी किया नोटिस
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने केंद्र की याचिका पर उन पर्यावरणविदों को नोटिस जारी किया जिनकी याचिका पर ईआईए 2020 के मसौदे को 22 भाषाओं में अनुवाद करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने इन लोगों से 23 सितंबर तक जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने 30 जून के अपने आदेश में मसौदा ईआईए पर राय एवं आपत्तियां जताने के लिए समयसीमा बढ़ाकर 11 अगस्त की थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि फैसले के दस दिन के भीतर अधिसूचना सभी 22 भाषाओं में प्रकाशित की जाए। कोर्ट ने यह आदेश पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़े की याचिका पर दिया था।
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केंद्र सरकार हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी लेकिन शीर्ष कोर्ट ने पहले पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को कहा था। जिसके बाद केंद्र ने याचिका वापस लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। सुपीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने तक केंद्र के खिलाफ अवमानना कार्रवाई पर रोक भी लगाई थी।
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