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CDS: 'रूस का महत्व कम होगा, चीन मुखर होकर उभरेगा', सीडीएस चौहान ने भविष्य की भू-राजनीति को लेकर कही बड़ी बात

Sat, 14 Oct 2023 01:10 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 14 Oct 2023 01:10 PM IST
सार

सीडीएस ने कहा कि वैगनर ग्रुप की बगावत ने रूस की अंदरूनी कमजोरी को उजागर कर दिया है और इससे पता भी चलता है कि भविष्य में रूस से संबंधित क्या हो सकता है। 

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सीडीएस अनिल चौहान - फोटो : ANI

विस्तार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का कहना है कि आने वाले समय में भू-राजनीति में रूस का महत्व कम होता जाएगा। वहीं चीन मुखर होकर उभरेगा। सीडीएस ने बंगलुरू में आयोजित हुए एयर चीफ मार्शल एलएम कात्रे मेमोरियल लेक्चर में शिरकत की। इस दौरान सीडीएस ने अपने संबोधन में कहा कि 'सैन्य बल लगातार अपने आप को बदल रहे हैं और यह आज का जरूरत है। हम एक ऐसे दौर में दाखिल हो रहे हैं, जो अनिश्चित्ताओं से भरा है और इसके लिए बड़े बदलाव करने की जरूरत है।'
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क्या बोले सीडीएस अनिल चौहान
सीडीएस ने कहा कि सैन्य बल भी इन बदलावों को लेकर सचेत हैं और वह भी इन्हें अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। जहां तक वायुसेना की बात है उन्होंने नेटवर्क केंद्रित युद्धकला में बेहतरी हासिल की है। वहीं नौसेना में भी मिशन आधारित तैनाती हो रही है। भू-राजनीति पर बात करते हुए सीडीएस ने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीति में रूस की अहमियत कम होगी, भले ही वह एक बड़ी परमाणु शक्ति है। वैगनर ग्रुप की बगावत ने रूस की अंदरूनी कमजोरी को उजागर कर दिया है और इससे पता भी चलता है कि भविष्य में रूस से संबंधित क्या हो सकता है। 
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ये देश आ सकते हैं चीन के साथ
चीन को लेकर सीडीएस ने कहा कि आने वाले समय में चीन और ज्यादा मुखर होकर उभरेगा। बेशक रूस और चीन के साझा हित होंगे और कुछ अन्य देश भी इनके साथ आ सकते हैं। इनमें उत्तर कोरिया और ईरान का नाम शामिल है। बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध को चलते हुए लंबा वक्त बीत गया है और इसके चलते पश्चिमी देशों ने रूस पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका असर रूस की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। साथ ही बीते दिनों रूस के वैगनर ग्रुप ने वहां की सेना के खिलाफ ही बगावत कर दी थी। इस दौरान वैगनर ग्रुप के सैनिक राजधानी मॉस्को के नजदीक तक पहुंच गए थे। हालांकि बाद में बेलारूस के राष्ट्रपति की मध्यस्थता से वैगनर ग्रुप ने बगावत का इरादा त्याग दिया था, लेकिन इस बगावत ने पुतिन की रूस पर ढीली पड़ती पकड़ को भी उजागर कर दिया था। 

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