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राम मंदिर, राफेल, तीन तलाक के मुद्दों पर होगी दुनिया की नजर, 11 दिसंबर से 8 जनवरी तक चलेगा सत्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 14 Nov 2018 05:19 PM IST
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संसद भवन
संसद का शीतकालीन सत्र 11 दिसंबर से 8 जनवरी तक चलेगा। संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी ने बुधवार को राष्ट्रपति से इस पर सहमति मांगी है। सत्र के दौरान राम मंदिर, राफेल, तीन तलाक, सीबीआई में खींचतान, नोटबंदी जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने होंगे। सत्र के पहले ही दिन मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होंगे। इसका असर सत्र की कार्यवाही पर भी देखेगा।
इस सत्र में सबकी नजर राम मंदिर मुद्दे पर होगी। सत्र से पहले मंदिर मामले में राजनीति चरम पर है। भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने इस मामले में निजी बिल पेश करने का एलान किया है, जबकि संत समाज सरकार से इसी सत्र में कानून के जरिए मंदिर निर्माण की राह प्रशस्त करने की मांग कर रहा है। सरकार के अंदर भी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश या बिल का सहारा लिए जाने पर मंथन चल रहा है।
इसके अलावा राफेल करार, सीबीआई में शीर्ष अधिकारियों के बीच टकराव, आरबीआई, तीन तलाक और नोटबंदी के मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहेंगे। तीन तलाक मामले में संसद में बिल पारित कराने में नाकाम रहने के बाद सरकार ने इसे दंडनीय अपराध बनाने के लिए अध्यादेश का सहारा लिया था। अब सरकार को इस मामले में संसद की मंजूरी लेनी होगी। इसके कई प्रावधानों पर विपक्ष को ऐतराज है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में इस मामले में तीखी भिड़ंत होने के आसार हैं।
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इसी प्रकार सीबीआई में चल रही खींचतान और राफेल करार मामले में भी सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं। सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजे जाने के अलावा राफेल मामले से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। जाहिर तौर पर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दोनों पक्षों का रुख निर्भर करेगा।
विधानसभा के नतीजे तय करेंगे सत्र का भविष्य
शीत सत्र की शुरुआत के दिन ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होंगे। नतीजे अगर भाजपा के प्रतिकूल रहे तो विपक्ष के तेवर बेहद आक्रामक रहेंगे। इसके उलट नतीजे सकारात्मक रहने पर विपक्ष का रुख ठंडा रहेगा।
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इस सत्र में सबकी नजर राम मंदिर मुद्दे पर होगी। सत्र से पहले मंदिर मामले में राजनीति चरम पर है। भाजपा के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने इस मामले में निजी बिल पेश करने का एलान किया है, जबकि संत समाज सरकार से इसी सत्र में कानून के जरिए मंदिर निर्माण की राह प्रशस्त करने की मांग कर रहा है। सरकार के अंदर भी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश या बिल का सहारा लिए जाने पर मंथन चल रहा है।
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इसके अलावा राफेल करार, सीबीआई में शीर्ष अधिकारियों के बीच टकराव, आरबीआई, तीन तलाक और नोटबंदी के मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहेंगे। तीन तलाक मामले में संसद में बिल पारित कराने में नाकाम रहने के बाद सरकार ने इसे दंडनीय अपराध बनाने के लिए अध्यादेश का सहारा लिया था। अब सरकार को इस मामले में संसद की मंजूरी लेनी होगी। इसके कई प्रावधानों पर विपक्ष को ऐतराज है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में इस मामले में तीखी भिड़ंत होने के आसार हैं।
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इसी प्रकार सीबीआई में चल रही खींचतान और राफेल करार मामले में भी सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं। सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजे जाने के अलावा राफेल मामले से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। जाहिर तौर पर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दोनों पक्षों का रुख निर्भर करेगा।
विधानसभा के नतीजे तय करेंगे सत्र का भविष्य
शीत सत्र की शुरुआत के दिन ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होंगे। नतीजे अगर भाजपा के प्रतिकूल रहे तो विपक्ष के तेवर बेहद आक्रामक रहेंगे। इसके उलट नतीजे सकारात्मक रहने पर विपक्ष का रुख ठंडा रहेगा।