CBIC Promotion: कर सहायकों को नहीं मिल रही पदोन्नति, क्यों धूमिल हो रही डिप्टी कमिश्नर बनने की उम्मीद?
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विस्तार
केंद्र सरकार में केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क, बोर्ड (सीबीआईसी) के 'कर सहायक' पदोन्नति की राह पर पिछड़ते जा रहे हैं। अगर तय समय पर और नियमानुसार इन्हें पदोन्नति मिलती है, तो ये 'कर सहायक' रिटायरमेंट से पहले डिप्टी कमिश्नर के पद तक पहुंच सकते हैं। हालांकि अब वह उम्मीद धूमिल हो चली है। लंबे समय से पदोन्नति के लिए आवाज उठा रही 'ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन' का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में 'कर सहायक' मुश्किल से 'अधीक्षक' तक ही पहुंचेंगे। यानी पूरी नौकरी के दौरान उन्हें महज तीन-चार पदोन्नति ही मिल सकेंगी। विभाग, जानबूझकर पदोन्नति में देरी कर रहा है।
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सीनियर-जूनियर क्लॉज को लेकर स्पष्ट नियम हैं, लेकिन विभाग उन्हें लागू करने में झिझक रहा है। जनवरी से लेकर अब तक सीनियर-जूनियर क्लॉज को एग्जामिन करने की बात कही जा रही है। विभागीय मेरिट बेस्ड प्रमोशन का प्रावधान भी नहीं है। विभाग को जगाने के लिए मंगलवार को 1800 कार्मिक, टि्वटर के जरिए आवाज उठाएंगे। एसोसिएशन ने सीबीआईसी के चेयरमैन विवेक जौहरी को लिखे पत्र में कहा है कि 9 मई को सभी सदस्य विरोध स्वरूप काला बैज पहनेंगे।
सीनियर-जूनियर क्लॉज के नाम पर रोकी फाइल
मौजूदा परिस्थितियों में इन कार्मिकों को दस साल में भी पहली पदोन्नति मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही। पदोन्नति की मांग को लेकर 'ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन' लंबे समय से आवाज उठा रही है। नतीजा, कुछ समय पहले ही सीबीआईसी ने 'कर सहायकों' को पदोन्नति देने की योजना बनाई, मगर उसमें भी टालमटोल कर दिया। गत वर्ष विभाग ने पदोन्नति मामले में एकबारगी छूट देने के लिए यूपीएससी को फाइल भेजी थी। एसोसिएशन के मुताबिक, वहां से हरी झंडी मिल गई, लेकिन इसके बाद भी जानबूझकर देरी की जा रही है। यहां तक कि सीनियर-जूनियर क्लॉज को लेकर यूपीएससी ने एक आरटीआई में जो जानकारी दी है, वह कॉपी भी विभाग को सौंप दी गई है। सीनियर-जूनियर क्लॉज को लेकर स्पष्ट नियम हैं, मगर विभाग उन्हें लागू करने में झिझक रहा है। नियमों को एग्जामिन करने की बात कही जा रही है। पदोन्नति में देरी का खामियाजा 'कर सहायकों' को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें न केवल वित्तीय नुकसान हो रहा है, बल्कि भविष्य में मिलने वाली पदोन्नति में भी देरी हो रही है। कुछ कार्मिक के जूनियरों को पदोन्नति मिल गई है।
अगर सब ठीक रहता है तो 5-6 पदोन्नति की उम्मीद
एसोसिएशन के पदाधिकारी बताते हैं कि जॉब में आने से लेकर रिटायरमेंट तक उन्हें नियमानुसार पांच पदोन्नति मिलनी चाहिए। जैसे टैक्स असिस्टेंट के पद पर भर्ती होने के बाद दूसरी पदोन्नति एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट की मिलती है। इसके बाद इंस्पेक्टर, अधीक्षक और असिस्टेंट कमिश्नर बनते हैं। कई अधिकारियों को डिप्टी कमिश्नर बनने का मौका मिल जाता है। दूसरी तरफ सीबीडीटी में ज्वाइंट कमिश्नर के पद तक पहुंचने की उम्मीद बनी रहती है। सीबीआईसी में इंस्पेक्टर के पद पर सीधी भर्ती भी होती है। ऐसे में वे इंस्पेक्टर, 'कर सहायक' भर्ती हुए कर्मियों से सीनियर हो जाते हैं। यहां पर 15 साल से काम करने वाले 'कर सहायकों' के अनुभव को कोई नहीं पूछता। डीओपीटी, सीएपीपफ, जल और संचार सहित केंद्र के कई विभागों में विभागीय मेरिट बेस्ड परमोशन का भी प्रावधान है, लेकिन सीबीआईसी में ऐसा नहीं है।
पहली पदोन्नति 10 साल में मिल रही है
सीबीआईसी और सीबीडीटी, ये दोनों विभाग वित्त मंत्रालय के तहत आते हैं। दोनों विभागों में 'कर सहायकों' की भर्ती प्रक्रिया एवं योग्यता समान है। सीबीडीटी में कर सहायकों को तीन वर्ष में पहली पदोन्नति मिल रही है। सेवाकाल में उन्हें पदोन्नति के पांच अवसर मिल जाते हैं। सीबीआईसी में पहली पदोन्नति 10 साल में मिल रही है। भर्ती नियम तय करते समय शेयर होल्डर के सुझावों को नहीं माना गया। नए भर्ती नियमों में न केवल पदोन्नति का समय बड़ा कर 10 साल कर दिया, बल्कि 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' के पद पर सीधी भर्ती करने की बात कह दी गई। इतना ही नहीं, प्रोटेक्शन क्लोज भी नहीं दिया गया। इन सब बातों ने विभाग में पहले से कार्यरत 'कर सहायकों' को बुरी तरह प्रभावित किया है। एसोसिएशन का कहना है, नियमानुसार, लगातार दो पदों पर सीधी भर्ती नहीं की जा सकती। सीबीआईसी ने इस नियम का पालन नहीं किया। लगातार तीन पदों पर सीधी भर्ती हो रही है। एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पदोन्नति से भरे जाने वाले पदों का प्रतिशत सौ कर दिया जाए।
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यूपीएससी से फाइल को मिल गई थी मंजूरी
डीओपीटी के अनुसार, जब किसी पद पर कोई सीनियर कार्मिक, तय सेवाकाल के हिसाब से पदोन्नति के लिए योग्य नहीं है, लेकिन उसका जूनियर पदोन्नति के सभी नियम यानी निर्धारित सेवाकाल पूरा करता है, तो ऐसे में वरिष्ठ को पदोन्नति देने के लिए कुछ नियमों में छूट मिलती है। उसमें यह देखा जाता है कि वरिष्ठ कार्मिक ने उस पद पर दो साल पूरे कर लिए हों या पदोन्नति के लिए जितने सेवाकाल की जरुरत है, उसका आधा सेवाकाल पूरा कर लिया हो। यह शर्त पूरी होती है, तो उसे भी पदोन्नति मिल जाएगी। इस मामले में 'वन टाइम रिलेक्सेशन' लेने के लिए सीबीआईसी द्वारा, डीओपीटी के अनुमोदन के पश्चात, यूपीएससी को फाइल भेजी गई थी। वहां से मंजूरी मिल गई है। कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी को अब यह अधिकार मिल गया है कि अब किसी कार्मिक ने दस की बजाए, अगर छह साल का सेवाकाल पूरा कर लिया है तो उसे पदोन्नति दी जा सकती है। अब विभाग ने 'सीनियर जूनियर क्लॉज' का पंगा फंसा दिया। पांच माह में भी इस नियम का अध्ययन पूरा नहीं हो सका। सीनियर जूनियर क्लॉज एक संवैधानिक प्रावधान है, जिसे लागू करने में कोई दिक्कत नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि अथॉरिटी, जानबूझकर पदोन्नति देने में देरी कर रही है।