संजय भंडारी से वाड्रा कनेक्शन खोजने में फिर जुटी सीबीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीबीआई के तत्कालिक अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव नवंबर 2018 में हथियार सौदागर संजय भंडारी के खिलाफ जांच प्रक्रिया बंद करने का आदेश दे दिया था। नागेश्वर राव का यह आदेश पूर्व निदेशक के 13 मार्च 2018 को सबूतों तथा तथ्यों के अभाव में केस बंद करने के निर्णय के क्रम में था, लेकिन सीबीआई ने नए सिरे से संजय भंडारी के ठिकानों पर छापेमारी करके सारे नेटवर्क को जिंदा कर दिया है। जांच एजेंसियों के पूर्व अधिकारी भी इसमें संजय भंडारी के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई राबर्ट वाड्रा का भी कनेक्शन देख रहे हैं। खबर है कि सीबीआई संजय भंडारी को भारत लाने की कोशिशों को तेज करेगी और इसकी सीधी आंच राबर्ट वाड्रा पर पड़नी तय है।
सीबीआई ने क्यों बंद किया था केस
सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक ने संजय भंडारी के खिलाफ जांच पूर्व निदेशक का आदेश बताकर बंद की थी। यह फाइल जांच के लिए दोबारा उनके पास गई थी, लेकिन जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं उच्चतम न्यायालय की गाइडलाइन के अनुसार यह नीतिगत निर्णय था, जिसे अंतरिम निदेशक द्वारा लिया जाना कठिन था। माना जा रहा है कि नई जांच के केन्द्र में 2009 में हुआ पेट्रोलियम सौदा और वायुसेना के लिए करीदा गया बेसिक जेट ट्रेनर का सौदा अहम होगा। यहां से इसके तार रक्षा सौदों में दलाली खाने वालों तक पहुंच सकेंगे।
कौन हैं संजय भंडारी
संजय भंडारी पेशे से चाटर्ड अकाऊंटेंट थे। अब हथियारों के सौदागर, कमीशनखोर या दलाल कहे जा रहे हैं। संजय भंडारी ने कई धंधे किए हैं। उन्होंने बाद में आफसेट इंडिया सोल्यूशंस नाम की एक कंपनी बनाई थी। उनपर मोदी सरकार-1 के समय में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आरोप लगाया था कि उनकी(भंडारी) कंपनी 2008 में राफेल लड़ाकू विमानों में भी आफसेट पार्टनर बनना चाहती थी, लेकिन देसाल्ट एवियेशन के विरोध के कारण नहीं बन पाई।
संजय भंडारी की इस कंपनी के पीछे कोई बड़ा हाथ(राबर्ट वाड्रा) का बताया जाता है और कहा जाता है कि राबर्ट वाड्रा के लंदन में 12, बायंस्टन स्वायर बंगले की खरीद फरोख्त दलाली की रकम से हुई थी। यह एक जटिल फाइनैंशियल ट्रांसैक्शन था। इन सबके परिदृश्य में 2005 में हुए रक्षा सौदे(बेसिक जेट ट्रेनर) और 2009 में हुए एक पेट्रोलियम सौदे को बताया जा रहा है। बताते हैं पहले 12, बायंस्टन स्कावयर का बंगला सिंटेक कंपनी ने खरीदा। इसके बाद इसे संजय भंडारी की वोरटेक्स ने खरीद लिया।
2010 में इसी बंगले को दुबई के प्रवासी भारतीय कारोबारी सीपी थंपी ने स्काईलाइट एफजेडई के जरिए ले लिया। इस कंपनी का खाता शारजाह में है। स्काईलाइट राबर्ट वाड्रा की बताई जाती है।इ स दौरान वाड्रा की कंपनी के अकाऊंट में दिहरम में बड़े पैमाने पर धनराशि जमा हुई और जटिल लेन-देन में सीपी थंपी पर प्रवर्तन निदेशालय ने 1000 करोड़ रुपये के फेमा कानून को तोडऩे का मामला दर्ज कर रखा है।
2016 में भाग गए थे संजय भंडारी
संजय भंडारी 2016 में ही चुपके से विदेश भाग गए थे। बताते हैं भंडारी को अपने उच्चस्तरीय संपर्कों से पता चला कि आयकर विभाग उनके यहां छापा मारने वाला है। बताते हैं आयकर छापा पडऩे के पहले ही वह विदेश भाग गए। विदेश जाने के लिए नेपाल का रूट चुने जाने की संभावना है और तब से वह लंदन में हैं। भाजपा के एक बड़े नेता का दावा है कि लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी के यूरोपीय टूर के दौरान उनके इर्द-गिर्द संजय भंडारी का साया भी मंडराया था। एक भाजपा नेता को यहां तक आशंका है कि कांग्रेस के पास राफेल से जुड़े कुछ दस्तावेज भी इसी रूट से आए थे।
आयकर विभाग के इस छापे में संजय भंडारी और राबर्ट वाड्रा कनेक्शन के कुछ संकेत मिले थे। ई-मेल आदान-प्रदान, लंदन के बंगले की जानकारी समेत कुछ अन्य तथ्य जांच एजेंसी को पता चले थे। इसी क्रम में प्रवर्तन निदेशालय ने पहले राबर्ट वाड्रा के करीबी मनोज अरोड़ा और फिर सीपी थंपी, सुमित चड्ढा तक को जांच के घेरे में लेना शुरू किया था। ज्यूरिख के यूबीएस बैंक से आफसेट इडियन सोल्यूशंस के खाते में ढाई लाख और साढ़े सात लाख स्विस फ्रैंक स्थानांतरित हुए थे। जांच एजेंसियां इसकी जद तक पहुंचना चाहती हैं। पिछले साल से प्रवर्तन निदेशालय अदालत के आदेश पर राबर्ट वाड्रा से लगातार पूछताछ कर रहा है।
क्या है राबर्ट वाड्रा की पृष्ठभूमि
राबर्ट वाड्रा अच्छी साइकिल, मोटर साइकिल, उम्दा कारों के शौकीन हैं। सालसा नृत्य में अच्छी पकड़ है और उनकी यही खूबी उन्हें प्रियंका गांधी के करीब लाई थी। वाड्रा के दादा सियालकोट, पाकिस्तान से भारत आए थे और पीतल के कारोबार में वाड्रा परिवार जुड़ा था। उनके पिता राजेन्द्र वाड्रा भी पीतल कारोबारी थे। वाड्रा की मां मरीन वाड्रा स्काटलैंड से हैं और आर्टेक्स एक्सपोर्ट कंपनी के जरिए वाड्रा हैंडीक्राफ्ट आइटम, कस्टम ज्वेलरी का कारोबार करते थे। बाद में वाड्रा ने जमीन, रीयल स्टेट के धंधे में भी कदम रखा।
कहा जाता है कि स्काईलाइट एफ जेडई के वह प्रमोटर हैं। राबर्ट वाड्रा को लेकर एजेंसी सूत्रों का आरोप हैं उन्होंने संजय भंडारी से संपर्क साधा था। ई-मेल किया था। संजय भंडारी की कंपनी ब्लू ब्रिज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के रजिस्टर्ड नंबर पर कई बार वाड्रा ने कॉल की थी। आरोप तो यह भी है कि संजय भंडारी के इस नंबर का इस्तेमाल कभी राबर्ट वाड्रा करते थे। कुल मिलाकर जांच के घेरे में संजय भंडारी के साथ-साथ सिंटेक कंपनी, ब्लू ब्रिज ट्रेडिंग प्रा. लिमिटेड, आफसेट इंडिया सोल्यूशंस, स्काईलाइट एफजेडई, सिंटेक कंपनी है। इस कड़ी में जांच को संजय भंडारी, सीपी थंपी, मनोज अरोड़ा, सुमित चड्ढा, राबर्ट वाड्रा समेत अन्य लोगों से पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है।
कितने की है दलाली?
अभी जो सामने आ रहा है, उसमें 339 करोड़ रुपये की दलाली का मामला है। जांच जारी है और यह राशि बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि इसमें अभी जांच के दौरान कुछ और तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियों की निगाह 12, बायंस्टन स्क्वायर स्थिति बंगले की राशि के भुगतान, सिंटेक द्वारा बंगले के राशिके भुगतान, फिर इसका हस्तांतरण संजय भंडारी से सीपी थंपी तक का रहस्य कई नई जानकारी सामने ला सकता है।