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एम्स के सर्जरी विभाग में टेंडर घोटाले में सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Tue, 16 Jan 2018 02:42 AM IST
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एम्स
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प्रतिष्ठित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सर्जरी विभाग में टेंडर देने में कथित धांधली के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। 24.17 लाख रुपये के कथित टेंडर घोटाले में जांच एजेंसी ने एम्स के एक वरिष्ठ क्लर्क नरेश कुमार और निजी कंपनी एच एस एंटरप्राइजेज की मालकिन चांदनी झट्टा और कर्मचारी जगमोहन ऋषि के खिलाफ केस दर्ज किया है।
गौरतलब है कि एम्स के तत्कालीन सतर्कता अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने 19 मई, 2014 को सीबीआई को सौंपी अपनी रिपोर्ट में एच एस एंटरप्राइजेज से लेन-देन पर रोक लगाने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उस दौरान एक खास तरह का ट्रेंड देखा गया, जिसमें पांच आपूर्तिकर्ताओं और एच एस एंटरप्राइजेज से रेट की जानकारी प्राप्त हुई, जिसमें इन्होंने सबसे कम रेट कोट की थी। इससे यह स्पष्ट है कि ऑर्डर को जानबूझकर विभाजित किया गया ताकि उच्च अधिकारी उस पर रोक न लगा दें।
पढ़ें- सोहराबुद्दीन मामले में बंजारा और दूसरे IPS अधिकारियों की रिहाई को नहीं देंगे चुनौती : CBI
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रिपोर्ट में कहा गया कि यह साफ था कि बदनीयत से इन फर्मों के लिए अनुचित वित्तीय लाभ लेने के लिए जानबूझकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया गया। हाल ही में दर्ज अपनी एफआईआर में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 2013-14 में एम्स के स्टोर ऑफिस द्वारा रेट एनक्वायरी के जरिये कुल 27 ऑर्डर दिए गए। एफआईआर के मुताबिक एच एस एंटरप्राइजेज एक मालिकाना कंपनी है और उसका कार्यालय डिफेंस कॉलोनी में है।
कंपनी के प्रतिनिधि ऋषि ने अलग-अलग कंपनियों के लेटर हेड पर फर्जी हस्ताक्षर कर रेट कोट की। सीबीआई ने कहा कि इस कारण ज्यादातर टेंडर एच एस एंटरप्राइजेज को मिल गए। जांच एजेंसी को पता चला कि ऋषि ने जिन कंपनियों, भगवान दास नरिंदर कुमार, हर्ष साइंटिफिक और साई मेडिवेल, के लेटर हेड का फर्जीवाड़ा कर इस्तेमाल किया था, उन्होंने कभी भी कोटेशन जमा ही नहीं की थी।
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गौरतलब है कि एम्स के तत्कालीन सतर्कता अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने 19 मई, 2014 को सीबीआई को सौंपी अपनी रिपोर्ट में एच एस एंटरप्राइजेज से लेन-देन पर रोक लगाने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उस दौरान एक खास तरह का ट्रेंड देखा गया, जिसमें पांच आपूर्तिकर्ताओं और एच एस एंटरप्राइजेज से रेट की जानकारी प्राप्त हुई, जिसमें इन्होंने सबसे कम रेट कोट की थी। इससे यह स्पष्ट है कि ऑर्डर को जानबूझकर विभाजित किया गया ताकि उच्च अधिकारी उस पर रोक न लगा दें।
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रिपोर्ट में कहा गया कि यह साफ था कि बदनीयत से इन फर्मों के लिए अनुचित वित्तीय लाभ लेने के लिए जानबूझकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया गया। हाल ही में दर्ज अपनी एफआईआर में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 2013-14 में एम्स के स्टोर ऑफिस द्वारा रेट एनक्वायरी के जरिये कुल 27 ऑर्डर दिए गए। एफआईआर के मुताबिक एच एस एंटरप्राइजेज एक मालिकाना कंपनी है और उसका कार्यालय डिफेंस कॉलोनी में है।
कंपनी के प्रतिनिधि ऋषि ने अलग-अलग कंपनियों के लेटर हेड पर फर्जी हस्ताक्षर कर रेट कोट की। सीबीआई ने कहा कि इस कारण ज्यादातर टेंडर एच एस एंटरप्राइजेज को मिल गए। जांच एजेंसी को पता चला कि ऋषि ने जिन कंपनियों, भगवान दास नरिंदर कुमार, हर्ष साइंटिफिक और साई मेडिवेल, के लेटर हेड का फर्जीवाड़ा कर इस्तेमाल किया था, उन्होंने कभी भी कोटेशन जमा ही नहीं की थी।