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2930 करोड़ रुपये के घोटाले में सीबीआई ने दर्ज किया मुकदमा
Thu, 17 Dec 2020 02:56 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 17 Dec 2020 02:56 AM IST
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सीबीआई
- फोटो : ani
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सीबीआई ने चेन्नई स्थित सुराना कार्पोरेशन और उसके निदेशकों के खिलाफ 2930 करोड़ रुपये की कर्ज धोखाधड़ी के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। सीबीआई अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि यह धोखाधड़ी भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के समूह के साथ की गई है। सीबीआई ने स्टेट बैंक की तरफ से दी गई शिकायत के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया है।
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स्टेट बैंक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि प्रबंधन निदेशक विजयराज सुराना समेत कंपनी के निदेशकों व अन्य ने धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसके चलते बैंक और समूह के अन्य सदस्यों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
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बता दें कि सुराना समूह ने हाल ही में आरोप लगाया था कि 2012 में सीबीआई की तरफ से जब्त किया गया उसका 100 किलोग्राम सोना कंपनी परिसर में सील किए गए वॉल्ट से गायब हो गया है।
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सीबीआई ने 2012 में चेन्नई में सुराना कार्पोरेशन के कार्यालय में तलाशी अभियान चलाकर 400.47 करोड़ रुपये का सोना व आभूषण जब्त किए थे। यह कार्रवाई खनिज और धातु व्यापार निगम (एमएमटीसी) के अधिकारियों द्वारा सोने व चांदी के आयात में कंपनी को कथित छूट दिए जाने के मामले में की गई थी।
कंपनी परिसर में ही मौजूद रही ये सील किए गए वॉल्ट को इस साल 27 और 29 फरवरी को बैंक अधिकारियों और सुराना के लिए अधिकृत ऋणशोधक की उपस्थिति में खोला गया। उस समय वॉल्ट में 103 किलोग्राम सोना कम पाया गया, जबकि सीबीआई की सील पूरी तरह सुरक्षित थी।
बैंक समूह का कंपनी पर 3161.91 करोड़ रुपये बकाया था, लेकिन वॉल्ट में निकले करीब 232 करोड़ रुपये के सोने को सीबीआई की तरफ से रिलीज कर दिए जाने के कारण यह घाटा कम होकर 2930 करोड़ रुपये रह गया है। बैंक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि कंपनी को सोना खरीदने और आभूषण बेचने के लिए कर्ज सुविधा दी गई थी।
इसलिए कंपनी के पास पैसा ठोस सोने, स्वर्ण आभूषण या खरीदारों से आई नकदी के रूप में होना चाहिए था। लेकिन कंपनी के खातों में खरीदारों से आया अधिकतर पैसा बट्टे खाते में डाल दिया गया।
बैंक का आरोप है कि कंपनी ने पैसे को हजम करने के लिए झूठी एंट्री दिखाकर उसे दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दिया। कंपनी की तरफ से स्टॉक में दिखाए गए सोने और वास्तविक रूप में जांच में मिले सोने में भी कई बार विभिन्न विभागों की जांच में बहुत बड़ा अंतर पाया जा चुका है।