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10 साल में सीबीआई ने दर्ज किए 10 हजार केस: 7932 मामलों की जांच पूरी, फिर भी 9 राज्यों ने केंद्रीय एजेंसी से छीना जांच का अधिकार 

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 09 Apr 2022 07:45 PM IST
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सार
सीबीआई को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन 'डीएसपीई' अधिनियम, 1946 की धारा 6 के अनुसार, संबंधित राज्य सरकार से इसके क्षेत्राधिकार में जांच करने के लिए सहमति की आवश्यकता होती है। उक्त प्रावधान के तहत, राज्य सरकारों ने व्यक्तियों की विशिष्ट श्रेणियों के विरूद्ध अपराधों की विशिष्ट वर्ग में जांच के लिए सीबीआई को सामान्य सहमति प्रदान की थी।
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CBI has registered 10 thousand cases in 10 years: investigation of 7932 cases completed yet 9 states snatched the right of investigation from the central agency
सीबीआई - फोटो : फाइल

विस्तार

केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) जिस पर आए दिन राजनीतिक दलों की तरफ से आरोप प्रत्यारोप लगते रहते हैं, उसने 10 साल में 10326 केस दर्ज किए हैं। इन सभी केसों की जांच चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस जांच एजेंसी के कामकाज को लेकर कई अवसरों पर गंभीर टिप्पणी तक की है। यहां तक कि इस जांच एजेंसी को 'पिंजरे में बंद तोता' कहा गया। इसके बावजूद सीबीआई ने दस वर्ष में 7932 मामलों की जांच पूरी की है। दोष सिद्धि की बात की जाए तो ऐसे मामलों की संख्या 5257 है। इस बीच 9 राज्यों ने मामलों की जांच करने के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है। दूसरी ओर, सीबीआई के कामकाज को देखते हुए भारत सरकार ने इसे इंटरपोल ग्लोबल एकेडमी में शामिल होने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। 



जांच एजेंसी पर निष्पक्षता से काम नहीं करने का आरोप…  
सीबीआई को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन 'डीएसपीई' अधिनियम, 1946 की धारा 6 के अनुसार, संबंधित राज्य सरकार से इसके क्षेत्राधिकार में जांच करने के लिए सहमति की आवश्यकता होती है। उक्त प्रावधान के तहत, राज्य सरकारों ने व्यक्तियों की विशिष्ट श्रेणियों के विरूद्ध अपराधों की विशिष्ट वर्ग में जांच के लिए सीबीआई को सामान्य सहमति प्रदान की थी। इसके चलते यह जांच एजेंसी उन विशिष्ट मामलों को दर्ज करने और उनकी जांच करने में समर्थ हुई थी। पिछले दस साल में सीबीआई ने 1095 केसों की जांच बंद की है। साथ ही इस अवधि में 8464 केसों की न्यायालय में सुनवाई पूरी कर ली गई है। 9 राज्यों द्वारा सामान्य सहमति वापस लिए जाने के पीछे वहां के मुख्यमंत्रियों ने यह तर्क दिया कि यह जांच एजेंसी निष्पक्षता से कार्रवाई नहीं करती है। उनका आरोप है कि यह एजेंसी केंद्र सरकार के कहने पर राजनीतिक खुन्नस निकालने का एक यंत्र बन गई है।


इन नौ राज्यों ने वापस ली है सामान्य सहमति ... 

  • छत्तीसगढ़
  • झारखंड
  • केरल
  • महाराष्ट्र
  • मेघालय
  • मिजोरम
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • पश्चिम बंगाल
 

10 साल में दर्ज मामले, इतने केसों में सुनवाई पूरी ... 




 इतने पंजीकृत मामलों में चल रही है जांच ...


सीबीआई के ग्लोबल एकेडमी नेटवर्क में शामिल होने की उम्मीद... 
पिछले दिनों केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सीबीआई मुख्यालय में आयोजित 8वें इंटरपोल लाइजन ऑफिसर्स कॉफ्रेंस-2022 में कहा था, भारत सरकार ने सीबीआई को इंटरपोल ग्लोबल एकेडमी में शामिल होने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब सीबीआई अकादमी के जल्द ही इंटरपोल ग्लोबल एकेडमी नेटवर्क में शामिल होने की उम्मीद है। इससे यह इंटरपोल के विभिन्न विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रदान करने के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र बन जाएगा। गृह मंत्रालय ने आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों ने न्यायालय द्वारा जारी अनुरोध पत्र और गृह मंत्रालय द्वारा जारी पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोध भेजकर विदेश से सहायता प्राप्त करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया प्रदान की है। इन दिशानिर्देशों ने नवीनतम तकनीकी साधनों का उपयोग करके गवाहों के परीक्षण हेतु विस्तृत रूपरेखा भी प्रदान की है। सार्थक अनुरोधों का मसौदा तैयार करने के लिए नमूना भी प्रदान किया गया है। 


जांच एजेंसी कर रही है भगोड़ों को वापस लाने का काम ... 
सुबोध कुमार जायसवाल, निदेशक, सीबीआई के मुताबिक, एक प्रमुख जांच एजेंसी के रूप में सीबीआई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जटिल अपराधों की जांच करने का पर्याप्त अनुभव है। विदेशों मे स्थित साक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। सफल जांच और दंडनीय अपराधों के अभियोजन के लिए डिजिटल साक्ष्य को प्राथमिकता मिल रही है। अपराध, अपराधियों, संदिग्धों, साजिशकर्ताओं, उकसाने वालों, गवाहों और पीड़ितों का वैश्विक फैलाव है। सीबीआई निदेशक ने कहा, हम अपराधियों, भगोड़ों का पता लगाने और उनकी भारत वापसी के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां अलग-थलग होकर काम नहीं कर सकती हैं। खासकर जब आपराधिक तत्व तकनीकी प्लेटफॉर्म जैसे डार्कनेट, क्रिप्टो करेंसी और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के उपयोग के माध्यम से सहयोग बढ़ा रहे हैं। ऑनलाइन कट्टरपंथ, अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क और संगठित अपराध, अंतरराष्ट्रीय अपराध, साइबर सक्षम वित्तीय अपराध आदि से उत्पन्न चुनौतियों के लिए ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए बहुत समन्वित और समानांतर कार्रवाई की आवश्यकता है।

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