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CBI: सीबीआई ने BNS के तहत पहली FIR दर्ज की, पुलिस अधिकारियों पर तिहाड़ से कैदी छुड़ाने की साजिश के आरोप

Thu, 04 Jul 2024 07:38 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 04 Jul 2024 07:38 PM IST
सार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में देशभर में लागू हुए नए आपराधिक कानून- भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। मामला दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप में दर्ज किया गया है।

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CBI First FIR Bhartiya Nyay Sanhita Delhi Police Officers Tihar Jail Prisoner Release Assurance
सीबीआई (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देशभर में एक जुलाई से नए आपराधिक कानून लागू हो चुके हैं। ओडिशा, महाराष्ट्र और दिल्ली समेत कई राज्यों में नए कानून- भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। ताजा घटनाक्रम में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत पहली प्राथमिकी दर्ज की है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज इस प्राथमिकी में 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। एफआईआर के मुताबिक रिश्वत की एवज में आरोपी पुलिस अधिकारियों ने तिहाड़ जेल में बंद कैदी की रिहाई में मदद करने का भरोसा दिलाया था।
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नारकोटिक्स के मामले में पुलिस अधिकारियों पर आरोप
बता दें कि बुधवार शाम को दर्ज प्राथमिकी में मौरिस नगर नारकोटिक्स सेल में तैनात हेड कॉन्सटेबल रवींद्र ढाका और परवीन सैनी के खिलाफ कथित आपराधिक साजिश से संबंधित बीएनए 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत रिश्वतखोरी के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। शिकायत दर्ज कराने वाले शख्स के मुताबिक तिहाड़ जेल में बंद उसके भाई की रिहाई में मदद के लिए 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। रिपोर्ट के मुताबिक जेल में बंद शख्स के पास से एनआरएक्स ड्रग्स बरामद किया गया था। इन दवाओं को योग्य डॉक्टर के पर्चे के बिना दुकानों के काउंटर पर नहीं खरीदा जा सकता।
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तिहाड़ से रिहा कराने में मदद की एवज में 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी
शिकायतकर्ता ने सीबीआई को बताया, उसके भाई कोशिंदर के पास दवाइयों को गलत तरीके से दिखाया गया। हालांकि, सीबीआई का आरोप है कि ढाका और सैनी ने फर्जी बिल तैयार करने में मदद के लिए घूस मांगी। उन्होंने शिकायतकर्ता को आश्वस्त किया था कि एनआरएक्स दवाओं के विवरण के साथ तैयार फर्जी बिल को असली के रूप में सत्यापित कर भाई को तिहाड़ से रिहा कराया जा सकेगा। आरोप के मुताबिक न्यायिक हिरासत में कैद शख्स को रिहा कराने में मदद की एवज में 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई।
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जांच कर रहे अधिकारी से 2.50 करोड़ रुपये में समझौता
आरोपी पुलिसकर्मी को पकड़ने के लिए सीबीआई ने सत्यापन की कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता के दावों की पुष्टि के लिए एक गुप्त रिकॉर्डर साथ भेजा। ढाका ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से कहा कि मामले की जांच कर रहे अधिकारी से 2.50 करोड़ रुपये में समझौता कर लेगा। 
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