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भ्रष्टाचार: इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन शुक्ला के खिलाफ सीबीआई ने दाखिल किया आरोपपत्र

Thu, 16 Dec 2021 09:12 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 16 Dec 2021 09:12 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया है।

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CBI files chargesheet against former Allahabad High Court Judge SN Shukla in a corruption case news in Hindi
सीबीआई - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपपत्र दाखिल किया। एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने अपने आदेशों में कथित तौर पर एक निजी मेडिकल कॉलेज का पक्ष लिया था। सेवानिवृत्त न्यायाधीश के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अनुमति मिलने के बाद एजेंसी ने आरोपपत्र दायर किया है।

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सीबीआई ने न्यायाधीश शुक्ला और अन्य आरोपियों के खिलाफ दिसंबर 2019 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधियिनम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था। एजेंसी की एफआईआर में न्यायाधीश शुक्ला के साथ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आईएम कुद्दूसी, प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट के पलाश यादव, ट्रस्ट और भावना पांडेय व सुधीर गिरि का नाम भी है।
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2017 में लगाया गया था छात्रों को प्रवेश देने पर प्रतिबंध
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि आरोप है कि प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज पर केंद्र सरकार ने मई 2017 में छात्रों को प्रवेश देने पर प्रतिबंध लगा दिया था। केंद्र सरकार की ओर से यह कदम कॉलेज में मानकहीन सुविधाओं और जनूनी मानदंडों को पूरा न करने की वजह से लिया गया था। इसके अलावा 46 अन्य मेडिकल कॉलेज पर भी इसी आधार पर प्रतिबंध लगाया था।
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पहले सुप्रीम कोर्ट गए आरोपी, फिर वापस ले ली याचिका
अधिकारियों ने बताया कि प्रवेश देने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को ट्रस्ट ने एक रिट याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन, इसके बाद एफआईआर में नामजद लोगों ने साजिश रची और अदालत की अनुमति से याचिका वापस ले ली। इसके बाद 24 अगस्त 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीछ के सामने एक अन्य रिट याचिका दाखिल की गई थी। यहां पीठ की ओर से कॉलेज के पक्ष में निर्णय दिया गया था।


हाईकोर्ट की पीठ ने सुनाया था कॉलेज के पक्ष में फैसला
एफआईआर में यह आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट की खंड पीठ ने 25 अगस्त 2017 को इस याचिका पर सुनवाई की थी और उसी दिन कॉलेज के पक्ष में फैसला सुना दिया था। यह आदेश देने वाली पीठ में न्यायाधीश शुक्ला भी शामिल थे। उन्होंने कथित कौर पर 2017-18 शैक्षणिक सत्र के लिए निजी कॉलेजों को छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ के आदेशों की अवहेलना की थी।

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