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फर्जी बिल बनाने के मामले में सीबीआई की छापेमापी, चार नौसेना अधिकारियों पर मुकदमा

Thu, 30 Jul 2020 09:21 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 30 Jul 2020 09:21 PM IST
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CBI filed case against four Indian Navy Officers in a case of Fake bill generation
सांकेतिक तस्वीर

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिमी नौसेना कमान को तथाकथित आईटी हार्डवेयर की आपूर्ति के लिए 6.76 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाकर पैसा निकालने के आरोप में नौसेना के चार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच एजेंसी ने इसके बाद चार राज्यों में 28 स्थानों पर छापे मारे। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली, मुंबई, गुजरात और कर्नाटक में छापेमारी की कार्रवाई बुधवार आधी रात तक चली। इस दौरान 10 लाख रुपए की नकदी बरामद की गई।

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अधिकारियों ने बताया कि जांच एजेंसी ने कैप्टन अतुल कुलकर्णी, कमांडर मंदर गोडबोले, कमांडर आरपी शर्मा और पेटी ऑफिसर एलओजी (एफ एंड ए) कुलदीप सिंह बघेल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस संबंध में सीबीआई की प्राथमिकी रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सभी आरोपियो ने अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल कर नौसेना के प्राधिकारियों को धोखा दिया और सरकारी खजाने को लूटकर आर्थिक लाभ उठाया।’
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आरोप है कि ये बिल सूचना प्रौद्योगिकी एवं नेटवर्किंग संबंधी हार्डवेयर की आपूर्ति के लिए मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमान (डब्ल्यूएनसी) में 2016 में जनवरी से मार्च के बीच तैयार किए गए। सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है, ‘बिल में जिस सामान का जिक्र किया गया है, उनमें से किसी सामान की आपूर्ति डब्ल्यूएनसी के मुख्यालय में नहीं की गई। बिलों की तैयारी संबंधी वित्तीय मंजूरी, खरीदारी के ऑर्डर, रसीद वाउचर इत्यादि जैसे कोई दस्तावेज मुख्यालय में नहीं हैं।’
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आरोप लगाया गया है कि गोडबोले और शर्मा की एफआईसी यूजर आईडी से फर्जी बिल तैयार किए गए, जिससे अपराध में उनकी सक्रिय मिलीभगत का पता चलता है। जिस इकाई में बिल तैयार किए गए थे, कुलकर्णी उसका पर्यवेक्षक अधिकारी था। एजेंसी ने रक्षा लेखा नियंत्रक के चार अधिकारियों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए हैं। इसके अलावा निजी कंपनियों स्टार नेटवर्क, एसीएमई नेटवर्क्स, साइबरस्पेस इंफोविजन और मोक्ष इंफोसिस के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं।


बता दें कि नौसेना ने बजट पर निगरानी के लिए और जमा किए गए बिलों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए साल 2012 में एक वित्तीय सूचना प्रणाली (एफआईसी) लागू की थी। सभी बिल में एफआईसी संख्या होती है। एफआईसी यूजर आईडी किसी अधिकारी को आवंटित की गई निजी संख्या होती है। अन्य कर्मी उस तक नहीं पहुंच सकता। 

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