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सीबीआई डीएसपी ए के बस्सी ने पोर्ट ब्लेयर तबादले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Mon, 21 Jan 2019 05:57 PM IST
आसिम खान भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Mon, 21 Jan 2019 05:57 PM IST
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CBI DSP AK Bassi challenged the transfer of Port Blair in supreme court

केन्द्रीय जांच ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक ए के बस्सी ने अपने पोर्ट ब्लेयर तबादले को सोमवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। बस्सी का दावा है कि उनका तबादला दुर्भावना से प्रेरित है और इससे जांच ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच प्रभावित होगी। जांच एजेन्सी के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में दर्ज प्राथमिकी की जांच करने वाले ए के बस्सी ने आरोप लगाया गया है कि वह जांच एजेन्सी के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव के शोषण का शिकार हैं। 

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बस्सी ने याचिका में दावा किया है कि जांच एजेन्सी के भीतर कुछ तत्वों का प्रतिनिधित्व कर रहे नागेश्वर राव नहीं चाहते कि राकेश अस्थाना की प्राथमिकी के मामले में याचिकाकर्ता स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच करे। जांच एजेन्सी के इस अधिकारी ने याचिका में कहा है कि नागेश्वर राव ने ही 24 अक्टूबर, 2018 को भी उनका तबादला पोर्ट ब्लेयर किया था और एक बार फिर वह आलोक वर्मा प्रकरण में शीर्ष अदालत के फैसले की अनदेखी करते हुये उन्हें अंडमान निकोबार भेज रहे हैं।
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बस्सी ने अपनी याचिका में जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के 11 जनवरी के तबादला आदेश को चुनौती देते हुये कहा है कि इससे जांच एजेन्सी के पूर्व निदेशक आलोक कुमार वर्मा के मामले में न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन होता है। शीर्ष अदालत के आठ जनवरी के फैसले के बाद हालांकि आलोक वर्मा को जांच एजेन्सी के निदेशक पद पर बहाल कर दिया गया था परंतु दो दिन बाद ही उन्हें उच्चस्तरीय समिति ने भ्रष्टाचार और जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही की वजह से पद से हटा दिया था। 
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शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में बस्सी सहित उन सभी अधिकारियों, जिनका वर्मा को अवकाश पर भेजने के केन्द्र सरकार के फैसले के बाद अलग-अलग स्थानों पर तबादला किया गया था, से कहा था कि वे अपने तबादलों के मामले में उचित मंच से संपर्क करें। इस अधिकारी के अनुसार वर्मा की बहाली के बाद नौ जनवरी को उन्होंने जांच एजेन्सी के निदेशक को एक प्रतिवेदन दिया था जिस पर उनका वापस दिल्ली तबादला कर दिया गया था।


बस्सी ने अपनी याचिका में कहा है कि यह आदेश ऐसे अधिकारी ने दिया है जो ऐसे आदेश देने के लिये सक्षम नहीं है। याचिका में कहा गया है कि इस आदेश का मकसद उनका शोषण करना है और यह राकेश अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर, 2018 को दर्ज प्राथमिकी की जांच को अनुचित तरीके से प्रभावित करने वाला है। बस्सी ने याचिका में यह भी कहा है कि वह अस्थाना से संबंधित प्राथमिकी की जांच करने वाले जांच दल या किसी अन्य मामले की जांच कर रहे ब्यूरो के दल का हिस्सा बनने का दावा नहीं कर रहे हैं 

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