फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CBI Controversy: why alok verma was removed as CBI chief

सीबीआई की साख के लिए लौटे आलोक वर्मा साख के लिए ही हटाए गए

Thu, 10 Jan 2019 09:19 PM IST
शशांक गौर शशिधर पाठक / जितेन्द्र भारद्वाज, नई दिल्ली
शशिधर पाठक / जितेन्द्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: शशांक गौर Updated Thu, 10 Jan 2019 09:19 PM IST
विज्ञापन
CBI Controversy: why alok verma was removed as CBI chief
आलोक वर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने कुर्सी संभालते ही दो दिन में कुल 18 अफसरों के स्थानांतरण किए। इनमें आलोक वर्मा ने अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव के सभी फैसलों को पलट दिया था। आलोक वर्मा की इस कार्य प्रणाली को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उच्चतम न्यायालय के नामित जज जस्टिस एके सीकरी और नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई सेलेक्ट कमेटी ने आलोक वर्मा का स्थानांतरण करने का निर्णय लिया है। सीबीआई निदेशक को एजेंसी की साख बचाने के लिए 77 दिन बाद उच्चतम न्यायालय ने निदेशक के तौर पर बहाली कराई थी और अब साख बचाने के लिए ही उनका स्थानांतरण कर दिया गया। 
विज्ञापन

खड़गे का रुख वर्मा के पक्ष में था

प्रधानमंत्री आवास पर हुई सेलेक्ट कमेटी की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे का रुख आलोक वर्मा के पक्ष में बताया जा रहा है। वहीं सरकार का निर्णय आलोक वर्मा के दो दिन के कार्यकाल में कामकाज के खिलाफ था। बताते हैं जस्टिस सीकरी की भूमिका निर्णायक रही और बहुमत के आधार पर समिति ने वर्मा के स्थानांतरण का निर्णय लिया है। 
विज्ञापन


यह पहली बार हुआ है जब जांच एजेंसी के एक निदेशक को उच्चतम न्यायालय ने पद पर वापसी कराई और सेलेक्ट कमेटी ने उन्हें जांच एजेंसी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। ताकि सीबीआई जैसी प्रीमियर जांच एजेंसी की साख को बट्टा लगने से बचाया जा सके। इस तरह से आलोक वर्मा की अति सक्रियता फिर उन पर भारी पड़ी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्मा के ज्वाइन करते ही टकराहट का माहौल बन गया

आलोक वर्मा के दोबारा आते ही सीबीआई मुख्यालय में टकराहट का माहौल बन गया था। सीबीआई अफसर जो किसी खेमेबाजी में नहीं रहे, वे खुद को दो निदेशकों की लड़ाई में असुरक्षित मानने लगे थे। जिन अफसरों को नागेश्वर राव ने अपने विश्वास में लेकर अहम पदों पर बैठाया था, आलोक वर्मा ने पहले ही दिन उनमें से कई अफसरों को यह संदेश दे दिया कि वे बोरिया-बिस्तर बांधने के लिए तैयार रहें। 

उन्होंने ज्वाइन करते ही नागेश्वर राव द्वारा लिए गए सभी निर्णयों वाली फाइलें भी तलब की। नागेश्वर राव के कार्यकाल के दौरान जो भी फैसले लिए गए, उनकी पड़ताल शुरु कर दी। ऐसे में सीबीआई दफ्तर में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भय का माहौल बन गया। मुख्यालय में यह संदेश जा रहा था कि ये दोनों अधिकारी सीबीआई मुख्यालय में रहते हैं तो इसका असर कामकाज पर पड़ेगा। 


उधर, वर्मा ने भी अत्याधिक तेजी दिखाते हुए जिस तरह से एक ही झटके में कई अफसरों को इधर-उधर किया, उससे सरकार को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि वर्मा का ज्यादा समय तक यहां रहना सीबीआई की साख के लिए सही नहीं होगा। अगर वर्मा इसी तरह काम करते रहे तो पहले जैसी स्थिति हो जाएगी। राकेश अस्थाना के भ्रष्टाचार मामले की जांच करने वाले डीएसपी एके बस्सी, जिसका नागेश्वर ने अंडमान तबादला किया था और वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक में चले गए थे, को वर्मा ने ज्वाइन करने के थोड़ी देर बाद ही सीबीआई मुख्यालय बुला लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed