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Custodial Death Case: मध्य प्रदेश के दो पुलिसकर्मियों की सूचना देने पर मिलेगा दो लाख का इनाम, CBI ने की घोषणा

Thu, 25 Sep 2025 09:08 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 25 Sep 2025 09:08 AM IST
सार

Custodial Death Case: सीबीआई ने हिरासत में मौत के मामले में फरार दो पुलिसकर्मियों की जानकारी देने पर 2-2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक गिरफ्तारी न होने पर सीबीआई को फटकार लगाई थी और दोनों पुलिसकर्मियों को एक महीने के भीतर गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। मृतक की मां का आरोप है कि पुलिस ने यातना देकर बेटे की हत्या की। जबकि पुलिस का दावा है कि मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। 

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CBI announces Rs 2 lakh reward for information on 2 MP cops in custodial death case
CBI - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मध्य प्रदेश के दो फरार पुलिसकर्मियों संजीव सिंह मवई और उत्तम सिंह कुशवाहा की जानकारी देने पर 2-2 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है। यह गुना जिले के म्याना थाने में पुलिस हिरासत में देवा पारधी की मौत से जुड़ा मामला है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। 
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अधिकारियों ने बताया कि संजीत सिंह मवई उस समय निरीक्षक और उत्तम सिंह कुशवाहा सहायक उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे। देवा पारधी को चोरी के आरोप में हिरासत में लिया गया था। पुलिस हिरासत में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। सीबीआई पहले ही इस मामले में उप निरीक्षक देवराज सिंह परिहार, निरीक्षक जुबैर खान और एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। लेकिन मवई और कुशवाहा अभी भी फरार हैं। 
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सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि इन दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके हैं और उन्हें 'घोषित अपराधी' करार दिया गया है। उन्होंने बताया कि इनाम की घोषणा इसलिए की गई है, ताकि आम जनता से विश्वसनीय जानकारी मिल सके और आरोपी पकड़े जा सकें। 

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को लगाई थी फटकार
इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने सीबीआई से पूछा था कि अब तक इन दोनों पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है। इसके साथ कोर्ट ने चेतावनी भी दी कि अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। 
 
मध्य प्रदेश पुलिस से सीबीआई को सौंपी गई थी जांच
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच 24 वर्षीय पीड़ित की मां की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि 15 मई को कोर्ट के आदेश के बावजूद सीबीआई ने अभी तक गिरफ्तारी नहीं की है। कोर्ट ने जांच को मध्य प्रदेश पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपा गया था। 


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हिरासत में एक और मौत नहीं देखना चाहते: सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह एक महीने के भीतर दोनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करे। साथ ही यह भी चेतावनी दी कि अगर पीड़ित के इकलौते चश्मदीद गवाह गंगाराम को कुछ भी हुआ, तो एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा। गंगाराम इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। कोर्ट ने गंगाराम की सुरक्षा को लेकर कहा कि वह हिरासत में एक और मौत नहीं देखना चाहता। 

देवा पारधी को उसके चाचा गंगाराम के साथ चोरी के आरोप में पकड़ा गया था। देवा पारधी की मां का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को यातना दी और मार डाला। जबकि पुलिस का कहना है कि उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। 

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