{"_id":"65fc7f74a66fd5dadb0962f3","slug":"caste-issue-will-dominate-in-this-lok-sabha-election-bjp-congress-know-all-updates-2024-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lok Sabha Polls: इस बार लोकसभा चुनाव में ये मुद्दा रहेगा हावी; भाजपा-कांग्रेस ने बनाई है खास रणनीति","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Lok Sabha Polls: इस बार लोकसभा चुनाव में ये मुद्दा रहेगा हावी; भाजपा-कांग्रेस ने बनाई है खास रणनीति
सार
महाराष्ट्र में ओबीसी ठीकठाक हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले मेहनत कर रहे हैं। कहते हैं कि 2024 का नतीजा चौंकाएगा। एनसीपी (शरद पवार) के नेता अनिल देशमुख कहते हैं कि इसी में पता चल जाएगा कि कौन कितने पानी में है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन में सबसे अधिक सीटें शिवसेना(यूटीबी) को दे रही है।
विज्ञापन
मल्लिकार्डुन खरगे-पीएम मोदी
- फोटो : social media
विस्तार
चुनाव तारीखों की घोषणा के बाद अब धीरे-धीरे विपक्ष का चुनावी एजेंडा अपना आकार ले रहा है। कई विपक्षी दल जाति को हवा देने में जुट गए हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार के मुताबिक पूर्वांचल की जौनपुर,आजमगढ़ समेत कई सीटों यादव उम्मीदवार न उतारे तो खेल हो जाएगा। पल्लवी पटेल(अपना दल, कमेरावादी) और स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसी एजेंडे पर सपा से किनारा कर लिया है। बिहार में आनंद मोहन के परिवार ने राजद से दूरी बनायी तो लालू प्रसाद के 40 साल पुराने सहयोगी ने कहा दलित, ओबीसी सब मिलकर भाजपा को हराएंगी। हम इस बार बिहार में एनडीके को आधे (20 सीट) पर समेटेंगे।
विज्ञापन
आइए कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र की तरफ चलते हैं। राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनंद शर्मा घर पर शांत बैठे थे। उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने की न इच्छा जताई और न पार्टी से टिकट मांगा। लेकिन कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र को लेकर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जातिगत जनगणना को लेकर चिट्ठी लिख दी है। कांग्रेस यह वादा अन्य पिछड़ा वर्ग,एससी,एसटी को लुभाने के लिए कर रही है। ताकि चुनाव में जाति का मुद्दा अपना स्थान मजबूत कर ले। अब आनंद शर्मा ने चिट्ठी के माध्यम से इसका विरोध किया है। इस विरोध पर कांग्रेस के ही एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि मुझे इस समय आनंद का विरोध समझ में नहीं आया। पार्टी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया था। तब शर्मा चुप थे। आनंद शर्मा ऐसा करके भाजपा को फायदा पहुंचाना चाहते हैं।
विज्ञापन
'मंडल ही तोड़ सकता है कमंडल का 370 पार का सपना'
जद(यू) संस्थापक स्व. शरद यादव कहते थे कि धर्म की राजनीति को जाति ही चुनौती दे सकती है। विपक्षी दल उत्तर भारत में जाति की राजनीति को हवा दे रहे हैं। खबर है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के लोकसभा का रास्ता बनाने में सहयोग दे सकती है। कांग्रेस भी अंदरखाने से ऐसा चाहती है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा को छोड़ने के बाद से ही ऊंचे स्वर में जातिगत राजनीति और पीडीए का राग छेड़ रखा है। पल्लवी पटेल ने इसी का सहारा लेकर राज्यसभा चुनाव में रामजी लाल सुमन के सिवा किसी को अपना वोट नहीं दिया था। अब अलग हैं। इस बहाने ही सही विपक्ष की कोशिश उ.प्र. में राजनीतिक मुद्दों को हवा देने की है। बसपा ने भी अपने प्रत्याशियों में ब्राह्मण और मुस्लिम उम्मीदवारों को वरीयता देना शुरू किया है। एक प्रमुख चुनाव सर्वेक्षण एजेंसी के लिए काम करने वाले अजीत कुमार सिंह कहते हैं कि पश्चिमी उ.प्र. से लेकर गोरखपुर तक उम्मीदवार की जाति देखी जाती है। जिस क्षेत्र में जो जातियां अधिक है, राजनीतिक दल उनकी अनदेखी नहीं करते। अजीत कहते हैं कि बसपा का कोर वोट दलित, रालोद का जाट, सुभासपा का राजभर, अपना दल का कुर्मी ही तो है? साहिल इस समय बिहार में राजनीतिक हवा सूंघने गए हैं। साहिल कहते हैं कि एनडीए के साथ जाकर नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को नेता बना दिया है। अब पिछड़ा वर्ग तेजी से तेजस्वी के साथ खड़ा हो रहा है। लोकसभा चुनाव में इसका असर दिखना चाहिए। भाजपा मुख्यालय में बैठने वाले पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इसे स्वीकारते हुए कहा कि फिर भी 40 में से 30-32 सीट एनडीए ही जीतेगा। बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी अब भाजपा है और लोकसभा में 2014,2019 की तरह सबसे बड़ी पार्टी बनी रहेगी।
विज्ञापन
महाराष्ट्र, बिहार, उ.प्र. में भाजपा को लगेगा झटका, भाजपा नेता ने कहा देखने दीजिए विपक्ष को सपने
महाराष्ट्र में ओबीसी ठीकठाक हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले मेहनत कर रहे हैं। कहते हैं कि 2024 का नतीजा चौंकाएगा। एनसीपी(शरद पवार)के नेता अनिल देशमुख कहते हैं कि इसी में पता चल जाएगा कि कौन कितने पानी में है। महाविकास अघाड़ी गठबंधन में सबसे अधिक सीटें शिवसेना(यूटीबी) को दे रही है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस और तीसरे नंबर पर शरद पवार की पार्टी है। महाराष्ट्र के नेता कहते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना(एकनाथ शिंदे) और एनसीपी(अजीत पवार) की राजनीतिक गहराई का पता चल जाएगा। उत्तर भारतीयों की राजनीती करने वाले वीडी चुतर्वेदी कहते हैं कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे का पलड़ा अजीत और शिंदे से भारी है। वीडी चतुर्वेदी कहते हैं कि महाराष्ट्र में जाति, वर्ग क्षेत्र सब चलता है। विपक्ष के नेता आश्वस्त हैं कि बिहार, उ.प्र., महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे चौंकाएंगे। उत्तर भारत में भाजपा को बड़ा झटका लगेगा। हालांकि भाजपा की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय कहते हैं कि सपना सभी को देखने का हक है। केन्द्र में लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ही नेतृत्व में बनेगी।
जाति आधारित राजनीति से घबराती है भाजपा?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के मद्देनजर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बनारस में एक बैठक ली थी। संघ के नेता ज्ञानेश्वर कहते हैं कि इस बैठक में शाह ने उ.प्र. के विधानसभा चुनाव को जातिगत मुद्दे पर जाने से रोकने के लिए कार्यकर्ताओं का आह्वान किया था। चुनाव के कुशल प्रबंधक अमित शाह को पता है कि जाति आधारित चुनाव भाजपा के पक्ष में कम रहेंगे। भाजपा ने इस गंभीरता को भांपते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले धर्म और आस्था को केन्द्र में रखकर राम मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा समेत कई बड़े प्रयास कर चुकी है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी संसद में खुद को अन्य पिछड़ वर्ग का बताकर विपक्ष की राजनीति को कुंद करने का प्रयास किया था। माना जा रहा है कि पहले चरण के चुनाव प्रचार के शुरू होने के बाद एक बार फिर यह मुद्दा अपना आकार लेने के लिए जनता के बीच में उतरेगा।