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नोट बैनः सरकार का निर्णय और जनता के सवाल

Fri, 11 Nov 2016 05:58 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 11 Nov 2016 05:58 PM IST
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Cash ban: govt's order public problem

केंद्र सरकार द्वारा आनन फानन में नोट बैन करने के फैसले के बाद हर तरफ अफरातफरी का माहौल है, बैंकों के बाहर लंबी लाइन लगी हैं तो रोजाना नौकरी के लिए घर से निकलने वाले लोग भी परेशान हैं। किसी को बस का टिकट लेने के लिए जूझना पड़ रहा है तो कोई ऑटो-टैक्सी वालों को समझाने में मशक्कत कर रहा है। 

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रोजमर्रा की जरूरत के सामान के लिए भी लोग नकद से ज्यादा उधारी के भरोसे हैं तो बड़े बाजारों में सुस्ती का आलम है। हालांकि कालाधन खत्म करने के सरकार के इस निर्णय को आम जनता ने सकारात्मक नजरिए से ही लिया है जिससे सरकार और उसके कारिंदे भी उत्साहित हैं। 
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बावजूद इसके रह रहकर एक सवाल लगातार उठ रहा है कि सरकार ने इतना बड़ा कदम ‌बिना मुकम्मल तैयारियों के यानि आधी अधूरी तैयारियों के साथ ही उठा लिया। क्या सरकार इतने बड़े निर्णय को करने से पहले थोड़ा और तैयारियां नहीं कर सकती थी? 
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जिससे आम जनता को होने वाली इस मुसीबत से कुछ राहत मिल पाती। सरकार कुछ और पुख्ता कदम उठाकर या जनता को थोड़ा समय देकर भी इस निर्णय को लागू कर सकती थी जिससे आम आदमी को थोड़ा संभलने का मौका मिल जाता। 

शादी वाले घरों में हो रही भारी दिक्‍कत

Cash ban: govt's order public problem

समस्याएं एक नहीं हैं, आज से शादियों का सीजन शुरू हो रहा है, ऐसे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शादीवाले घरों में लोगों को कितनी दिक्‍कत का सामना करना पड़ रहा होगा। 

ऐसी भी खबरें सुनने को मिल रही हैं कि अचानक नोट बैन करने से कुछ लोगों को इस कदर धक्का लगा कि वो अपनी मेहनत की कमाई डूबने के डर से अपनी जान ही गंवा बैठे। यूपी के कुशीनगर जिले में एक वृद््धा की मौत इसलिए हो गई कि वो अपने दो हजार रुपये बदलवाने बैंक पहुंची तो वहां उससे किसी ने कह दिया कि ये अब नहीं चलेंगे। 

तेलंगाना के हैदाराबाद में एक महिला ने कुछ दिन पहले जमीन बेचकर बेटी की शादी के लिए 54 लाख रुपये जुटाए थे। जब उसे सरकार के निर्णय का पता चला तो उसने जहर खाकर जान दे दी। देशभर के कोने कोने से इस तरह की खबरें दिल दिमाग को झकझोर कर रख दे रही हैं। ऐसे में यह सवाल मौज्जू हो जाता है कि क्या सरकार और पुख्ता तैयारियों के साथ इस निर्णय को लेकर आ सकती थी?

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