फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Cases in which court monitored probe showed better outcome said Supreme Court judge

जिन मामलों की जांच अदालत की निगरानी में होती है उनके परिणाम बेहतर होते हैं: सुप्रीम कोर्ट जज

Sun, 18 Aug 2019 02:24 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Sun, 18 Aug 2019 02:24 PM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट के जज धनंजय चंद्रचूड़ का कहना है कि जिन मामलों की जांच कोर्ट की निगरानी में होती है, उनके नतीजे बेहतर होते हैं।
  • पहलू खान लिंचिंग मामले के सभी आरोपियों के बरी होने का अवलोकन करते हुए जज ने ये बात कही।
  • अलवर के अपर जिला सत्र न्यायालय ने बीते बुधवार को छह आरोपियों को पुलिस जांच में गंभीर कमियों के चलते संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था।
  • पुलिस जांच में कई तरह की कमियों के कारण मामले में संदेह पैदा हुए और आरोपियों को संदेह का लाभ लेने का अवसर मिला।  

विज्ञापन
Cases in which court monitored probe showed better outcome said Supreme Court judge
जज धनंजय चंद्रचूड़ - फोटो : social media

विस्तार

उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय चंद्रचूड़़ ने पहलू खान मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामले जिनकी जांच अदालत की निगरानी में हुई है उनमें बेहतर परिणाम सामने आए हैं। मुंबई में शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि हम यह लगातार देख रहे हैं.. एक न्यायाधीश के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि उसके समक्ष जिस तरह से सबूत पेश किया जाता है उसी मुताबिक उसे निर्णय करना होता है।

विज्ञापन


पहलू खान लिंचिंग मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि और तब आप पाते हैं कि पुलिस द्वारा की गई जांच बेहद अपर्याप्त है या तो जानबूझ कर अथवा अयोग्य होने के कारण ऐसा हुआ है, जो आगे चल कर बरी होने का कारण बनेगी। 
विज्ञापन


गौरतलब है कि राजस्थान की एक अदालत ने पहलू खान की पीट-पीट कर हत्या किए जाने के मामले में सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया था। यह सब पुलिस जांच में बेहद खामी के चलते संदेह के लाभ के कारण हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘ऐसे मामलों में जहां उचित स्तर पर अदालतों से संपर्क किया गया और जांच की निगरानी संभव हो सकी, उनमें बेहतर परिणाम सामने आए हैं।’ उन्होंने कठुआ बलात्कार मामले का उदाहरण पेश किया जहां उच्चतम न्यायालय ने अनेक ऐसे कदम उठाए कि जांच प्रभावित नहीं हो।


हालांकि उन्होंने कहा कि अदालत की निगरानी में जांच के मामले सीमित होते हैं। वह ‘इमैजिनिंग फ्रीडम थ्रू आर्ट’ पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी उन लोगों के खिलाफ जहर उगलने का जरिया बन गई है जो अलग तरह से सोचते-विचारते हैं, बोलते हैं, खाते हैं, पहनते हैं और अलग नजरिया रखते हैं।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘खतरा तब पैदा होता है जब आजादी को दबाया जाता है...या तो राज्यों के द्वारा, लोगों के द्वारा अथवा कला के जरिए।’ 




 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed