Foreign Funding Violations: ऑक्सफैम और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, एफसीआरए के कथित उल्लंघन का मामला
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सीबीआई ने ऑक्सफैम और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन के लिए मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि ऑक्सफैम का एफसीआरए पंजीकरण बंद हो गया है, लेकिन उसने धन के लेनदेन के लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल किया गया।
बताया जा रहा है कि सीबीआई ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक शिकायत के आधार पर ऑक्सफैम इंडिया और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के कथित उल्लंघन के लिए दर्ज की गई है। इसके बाद संस्था के दफ्तर पर छापेमारी भी की गई।
इसमें आरोप लगाया गया कि सीबीडीटी द्वारा आईटी (आयकर) सर्वेक्षण के दौरान मिले ईमेल से पता चलता है कि ऑक्सफैम इंडिया विदेशी सरकारों और विदेशी संस्थानों के माध्यम से एफसीआरए के नवीनीकरण के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाने की योजना बना रहा है। ऑक्सफैम इंडिया ने अपने विदेशी सहयोगियों जैसे ऑक्सफैम ऑस्ट्रेलिया और ऑक्सफैम ग्रेट ब्रिटेन की निधि को कुछ एनजीओ को दिया और परियोजना पर नियंत्रण किया।
अपने सहयोगियों के जिए सीपीआर को धन प्रदान कर रहा ऑक्सफैम: प्राथमिकी
इसमें आरोप लगाया गया है कि सीबीडीटी द्वारा आईटी सर्वेक्षण के दौरान पाए गए ईमेल से ऐसा प्रतीत होता है कि ऑक्सफैम इंडिया कमीशन के रूप में अपने सहयोगियों/कर्मचारियों के माध्यम से सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) को धन प्रदान कर रहा है। यह ऑक्सफैम इंडिया के टीडीएस डेटा से भी परिलक्षित होता है, जो वित्त वर्ष 2019-20 में सीपीआर को 12.71 लाख रुपये का भुगतान दिखाता है।
'घोषित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं सीपीआर को किया गया भुगतान'
इसमें कहा गया है कि संगठन ने सामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एफसीआरए पंजीकरण कराया था, लेकिन अपने सहयोगियों या कर्मचारियों के जरिए कमीशन के रूप में सीपीआर को किया गया भुगतान ( पेशेवर या तकनीकी सेवाओं) इसके घोषित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं है। इसमें आरोप लगाया गया है, यह एफसीआरए 2010 की धारा 8 और 12 (4) का उल्लंघन है।
इस महीने की शुरुआत में एक बयान में ऑक्सफैम इंडिया ने कहा कि यह पूरी तरह से भारतीय कानूनों का पालन करता है। ऑक्सफैम इंडिया का एफसीआरए पंजीकरण दिसंबर 2021 में नवीनीकृत नहीं किया गया था। समूह ने अपने एफसीआरए पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं करने के फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
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