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कांग्रेस से कुछ लेना नहीं-भाजपा में जाना नहीं: कैप्टन ने अलग पार्टी बना ली तो ‘हाथ’ का कितना नुकसान, पंजाब में अब कितने असरदार अमरिंदर

Fri, 01 Oct 2021 03:03 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Fri, 01 Oct 2021 03:03 PM IST
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सार
पंजाब की राजनीति में अमरिंदर सिंह अब कितने असरदार रह गए हैं, यह सवाल वे कांग्रेसी एक दूसरे से पूछने लगे हैं जो कल तक उनके करीबी माने जाते थे। कितने आदमी थे....कुछ इसी तरह फिल्मी डॉयलॉग के तर्ज पर  चुन-चुन कर उनके लोगों की पहचान की जा रही है। मतलब साफ है ऐसे लोगों के लिए अब यही रास्ता बचा है कि वे या तो अमरिंदर के साथ जाएं या कांग्रेस में अपने लिए अलग रास्ता बनाएं। 
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captain amarinder singh set to form new political party ahead of punjab polls how much damage will it do to congress
अमरिंदर सिंह - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बुधवार को अपने दिल्ली दौरे के दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उसके अगले दिन कांग्रेस छोड़ने की घोषणा कर दी। साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की अटकलों पर भी फिलहाल विराम लगा दिया। अब पंजाब की राजनीति में अब उनकी भूमिका को लेकर कयास यह लग रहे हैं कि वे अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं।


बताया जा रहा है कि लगभग एक दर्जन कांग्रेस नेता पूर्व सीएम के संपर्क में है। कथित तौर पर, सिंह अपने समर्थकों के साथ एक कार्य योजना तैयार करने के लिए परामर्श कर रहे हैं। उनके राज्य के कुछ किसान नेताओं से भी मिलने की संभावना है। उम्मीद है कि वह एक पखवाड़े के भीतर नई पार्टी बनाएंगे।


ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि कैप्टन अपनी अलग पार्टी बना लेंगे तो इससे कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचेगा और किसको फायदा होगा? कांग्रेस ने 2017 का पिछला चुनाव अमरिंदर सिंह के चेहरे पर ही लड़ा था। कांग्रेस को यहां 77 सीटें मिली थीं और अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में यहां सरकार बनी थी।  

कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचाएंगे अमरिंदर
सेंटर फॉर स्टडी फॉर डेवलपिंग सोसायटीज (सीएसडीएस) के निदेशक और राजनीतिक टिप्पणीकार संजय कुमार का मानना है कि यह निश्चित बात है कि जिस तरह अमरिंदर सिंह पार्टी से निकाले गए हैं उनके निशाने पर कांग्रेस ही होगी। लेकिन यह अनुमान लगाना कठिन है यदि वे अलग पार्टी बना लेते हैं तो कांग्रेस को कितनी सीटों पर नुकसान होगा।  कैप्टन का पटियाला सीटों पर असर है और हो सकता है कि उनकी पार्टी पांच-छह प्रतिशत वोट ले आए और यह कांग्रेस का ही वोट होगा।

वे कहते हैं, हो सकता है छिटपुट तौर पर उनके कुछ उम्मीदवार जीत भी जाएं लेकिन वे सहानुभूति लहर पर सवार नहीं हो पाएंगे। दरअसल पंजाब के कद्दावर नेता होते हुए भी निश्चित तौर पर पंजाब में उनकी लोकप्रियता में कुछ गिरावट आई है, अब वे पंजाब की राजनीति में उतने असरदार नहीं रह सकते हैं, इस वजह से वे कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुंचाने की स्थिति में नहीं है। 
 

अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल - फोटो : PTI (File Photo)
नई पार्टी बनाएंगे तो कैप्टन को सियासी संजीवनी मिलेगी?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कैप्टन नई पार्टी बनाते हैं तो इससे कुछ हद तक उन्हें सियासी संजीवनी मिल सकती है। राज्य में चुनाव होने वाले हैं तो उनकी पार्टी की चर्चा हो सकती है, लेकिन इसका ज्यादा फायदा उन्हें चुनावों में नहीं मिल सकता है। संजय कुमार के मुताबिक चुनाव में अब इतने कम समय बचे हैं ऐसे में नई पार्टी बनाना, संगठन तैयार करना आसान काम नहीं होता।

उनका कहना है, थोड़ी देर के लिए मान भी लें कि कैप्टन के वफादार और निष्ठावान कार्यकर्ता रातों-रात संगठन तैयार कर भी लेते हैं तो वे क्या वे कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली-बसपा गठबंधन के बीच अपनी पार्टी के लिए  जमीन तैयार कर पाएंगे? कांग्रेस जैसे बड़ी पार्टी उनके पास नहीं रहेगी, साथ ही उनका उम्रदराज होना भी इस राह की बड़ी मुश्किल है।

आम आदमी पार्टी लूट ले जाएगी मंजर?
कांग्रेस के आंतरिक संकट और अमरिंदर सिंह के नई पार्टी बनाने से यदि कांग्रेस को बहुत नुकसान नहीं होता दिखाई दे रहा तो फायदा किसे मिलेगा? इस बारे में संजय कुमार की राय यह है कि कांग्रेस में जो घमासान चल रहा है, उससे कांग्रेस के पुराने परंपरागत वोटर्स के मन में यह धारणा बन सकती है, कांग्रेस के नेता सत्ता के लिए लड़ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के वोटों का बिखराव जरूर होगा। जिसका फायदा आम आदमी पार्टी को मिल सकता है क्योंकि मतदाताओं का कुछ वर्ग ऐसा है जिसका झुकाव आप की तरह बढ़ता दिखाई दे रहा है।

उनके मुताबिक पंजाब की जनता पहले अकाली दल की सरकार देख चुकी हैं जिनकी छवि अच्छी नहीं रही। दूसरी तरफ दिल्ली में चल रही आम आदमी पार्टी की सरकार को लेकर लोगों के मन में कुछ हद तक सकारात्मक धारणा है, इस वजह से हो सकता है कि आप इसका फायदा उठा ले जाए। लेकिन वह भी इस बात पर निर्भर करता है कि आप वहां चुनाव किस तरह लड़ती है।  

पंजाब कांग्रेस के एक विधायक ने नाम नहीं लिखे जाने की शर्त पर कहा अमरिंदर सिंह और सिद्धू की लड़ाई से पार्टी का बहुत नुकसान हो चुका है। अब चुनाव में बहुत कम समय बचा है, जब चुनाव में उतरने का समय आया तो हमारे वरिष्ठ नेता आपस में लड़ने लगे, ऐसे में स्वाभाविक है दूसरी पार्टियां तो फायदा उठाएगी ही। हमारे लोग लड़ते रहे और उन्होंने (आम आदमी पार्टी) ने राज्य के अधिकतर हिस्सों में अपनी पकड़ बना ली है।

 

कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू।
कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू। - फोटो : अमर उजाला

अमरिंदर के साथ कौन?
नवजोत सिंह सिद्धू की जिद्द की वजह से अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस वजह से उन्हें बड़ा सियासी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, सिद्धू को राष्ट्र के लिए खतरनाक बताकर और लगातार उन पर निशाना साध कर कैप्टन अपने इरादे जाहिर कर चुके हैं। विश्लेषक मानते हैं कि उनकी आगे की रणनीति भी यही रहेगी कि वे अपने इस ‘सियासी दुश्मन’ को पंजाब की राजनीति में आगे न बढ़ने दें। जाहिर तौर पर यदि सिद्धू कांग्रेस में ही रहते हैं तो सिद्धू के साथ-साथ कांग्रेस को भी कुछ नुकसान पहुंचा सकते हैं।

बताया जा रहा है कि कैप्टन की टीम ने उन सभी नेताओं से संपर्क साध रखा है जो सिद्धू के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद और अमरिंदर सिंह के इस्तीफा देने के बाद पार्टी में दरकिनार कर दिए गए हैं। अमरिंदर की कोशिश अब इन नेताओं को साधने की है जो सिद्धू से नाराज हैं। साथ ही कैप्टन के करीबी जिनके टिकट काटे जाने की आशंका बढ़ गई है कैप्टन उन नेताओं और साथियों को अपनी टीम में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। 

संजय कुमार यहां बताते हैं कि अमरिंदर सिंह के साथ जाने वाले विधायकों की संख्या बहुत कम हो सकती है हो सकता है कि यह संख्या 10 फीसदी से भी कम हो। संभावना है कि उनके साथ वही विधायक या नेता जाएंगे जिनके टिकट काटे जाएंगे, जाहिर तौर वे सिद्धू या चन्नी के करीबी नहीं होगें। या फिर वे उनके नई पार्टी में शामिल होंगे जो अमरिंदर सिंह के निष्ठावान और उनके बहुत करीबी माने जाते हैं।
 

अमित शाह के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह
अमित शाह के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : PTI (File Photo)
वे डूबता जहाज
वहीं कांग्रेस विधायक कुलबीर सिंह जीरा का मानना है ‘अमरिंदर सिंह अब डूबता जहाज हैं, उनके साथ कोई जाएगा नहीं। मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता तो लेकिन कैप्टन के कई बेहद करीबी ही अभी उनके साथ नहीं गए। यदि उन्होंने साढ़े चार साल काम किया होता और विधायकों की सुनी होती तो लोग उनके साथ खड़े रहते।‘ 

भाजपा में गए तो पंजाब का चुनाव बदल जाएगा
वैसे अमरिंदर सिंह ने भाजपा मे जाने की अटकलों को अभी खारिज कर दिया है, लेकिन संभावना अभी खत्म नहीं हुई है।  सूत्रों के मुताबिक भाजपा के साथ भाजपा की बातचीत का दरवाजा खुला हुआ है। लेकिन उनकी शर्त यही है कि भाजपा किसान कानून वापस लेने को तैयार हो जाए और इसका श्रेय अमरिंदर सिंह को दिया जाए।

यदि ऐसा होता तभी अमरिंदर सिंह के भाजपा में जाने का फायदा दोनों पक्षों को मिलता। लेकिन मौजूदा हालात में यही कहा जा रहा है कि इस बात की संभावना बेहद कम है कि सरकार इस कानून को वापस लेने जा रही है। संजय कुमार बताते हैं कि यदि ऐसा हो जाए कि अमरिंदर सिंह के भाजपा में जाते ही सरकार कृषि कानून वापस ले तो समझिए कि पंजाब का चुनाव पूरी तरह बदल जाएगा। 
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