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CAPF: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 11 लाख जवानों को कैसे मिलेगी पुरानी पेंशन? अब पीएमओ पर टिकी नजरें

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 15 Nov 2023 03:39 PM IST
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सार
CAPF: इस साल 11 जनवरी को 'सीएपीएफ' में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने जो बड़ा फैसला दिया था, उस पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फरवरी 2024 तक स्थगन आदेश ले लिया था। अब प्रधानमंत्री कार्यालय से बुलावा आता है, तो उनके समक्ष 'केंद्रीय अर्धसैनिक बल' के जवानों की व्यथा रखी जाएगी...
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CAPF: How 11 lakh soldiers of central paramilitary forces will get their old pension? Now eyes on PMO
CAPF: PM Modi - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' के 11 लाख जवानों को 'पुरानी पेंशन व्यवस्था' में शामिल कराने की लड़ाई जारी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इस मामले में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का समय मांगा गया है। एसोसिएशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी एचआर सिंह और महासचिव रणबीर सिंह सहित दूसरे पदाधिकारियों का कहना है, सीएपीएफ में ओपीएस की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। इसके लिए लगातार आंदोलन किया जा रहा है। इस साल 11 जनवरी को 'सीएपीएफ' में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने जो बड़ा फैसला दिया था, उस पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फरवरी 2024 तक स्थगन आदेश ले लिया था। अब प्रधानमंत्री कार्यालय से बुलावा आता है, तो उनके समक्ष 'केंद्रीय अर्धसैनिक बल' के जवानों की व्यथा रखी जाएगी। उनकी ड्यूटी की नेचर के मुताबिक, वे सिविल फोर्स नहीं, बल्कि 'भारत संघ के सशस्त्र बल' हैं। ऐसे में उन्हें 'पुरानी पेंशन' का लाभ दिया जाए।

'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'भारत संघ के सशस्त्र बल' हैं। अदालत ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'एनपीएस' को स्ट्राइक डाउन करने की बात कही थी। इन बलों में चाहे कोई आज भर्ती हुआ हो, पहले कभी भर्ती हुआ हो या आने वाले समय में भर्ती होगा, सभी जवान और अधिकारी, पुरानी पेंशन के दायरे में आएंगे। दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 जनवरी को दिए अपने फैसले में कहा था कि 'सीएपीएफ' में आठ सप्ताह के भीतर पुरानी पेंशन लागू कर दी जाए। अदालत की वह अवधि होली पर खत्म हो चुकी थी। तब तक केंद्र सरकार, उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ, सुप्रीम कोर्ट में तो नहीं गई, मगर अदालत से 12 सप्ताह का समय मांग लिया। खास बात ये रही कि केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट के समक्ष जो दलील दी, उसमें 12 सप्ताह में 'ओपीएस' लागू करने की बात नहीं कही। इस मुद्दे पर महज सोच-विचार के लिए समय मांगा गया था। मतलब, इस अवधि में केंद्र सरकार, दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी जा सकती है या कानून के दायरे में कोई दूसरा रास्ता भी अख्तियार कर सकती है। केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में दी अपनी याचिका में ये सब अधिकार अपने पास सुरक्षित रखे थे।

सीएपीएफ भी आर्मी/नेवी/वायु सेना की तरह सशस्त्र बल हैं

केंद्र सरकार, कई मामलों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बल मानने को तैयार नहीं थी। पुरानी पेंशन का मुद्दा भी इसी चक्कर में फंसा हुआ था। पहली जनवरी 2004 के बाद केंद्र सरकार की नौकरियों में भर्ती हुए सभी कर्मियों को पुरानी पेंशन के दायरे से बाहर कर दिया गया था। उन्हें एनपीएस में शामिल कर दिया गया। सीएपीएफ को भी सिविल कर्मचारियों के साथ पुरानी पेंशन से बाहर कर दिया। उस वक्त सरकार का मानना था कि देश में सेना, नेवी और वायु सेना ही सशस्त्र बल हैं। बीएसएफ एक्ट 1968 में कहा गया है कि इस बल का गठन भारत संघ के सशस्त्र बल के रूप में किया गया था। इसी तरह सीएपीएफ के बाकी बलों का गठन भी भारत संघ के सशस्त्र बलों के रूप में हुआ है। कोर्ट ने माना है कि सीएपीएफ भी भारत के सशस्त्र बलों में शामिल हैं। इस लिहाज से उन पर भी एनपीएस लागू नहीं होता। सीएपीएफ में कोई व्यक्ति चाहे आज भर्ती हुआ हो, पहले हुआ हो या भविष्य में हो, वह पुरानी पेंशन का पात्र रहेगा। गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 6 अगस्त 2004 को जारी पत्र में घोषित किया गया है कि गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत 'केंद्रीय बल' 'संघ के सशस्त्र बल' हैं।

फौजी महकमे के सभी कानून लागू होते हैं

सीएपीएफ के जवानों और अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर फौजी महकमे वाले सभी कानून लागू होते हैं। सरकार खुद मान चुकी है कि ये बल तो भारत संघ के सशस्त्र बल हैं। इन्हें अलाउंस भी सशस्त्र बलों की तर्ज पर मिलते हैं। इन बलों में कोर्ट मार्शल का भी प्रावधान है। इस मामले में सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। अगर इन्हें सिविलियन मानते हैं, तो आर्मी की तर्ज पर बाकी प्रावधान क्यों हैं। फोर्स के नियंत्रण का आधार भी सशस्त्र बल है। जो सर्विस रूल्स हैं, वे भी सैन्य बलों की तर्ज पर बने हैं। अब इन्हें सिविलियन फोर्स मान रहे हैं, तो ऐसे में ये बल अपनी सर्विस का निष्पादन कैसे करेंगे। इन बलों को शपथ दिलाई गई थी कि इन्हें जल थल और वायु में जहां भी भेजा जाएगा, ये वहीं पर काम करेंगे। सिविल महकमे के कर्मी तो ऐसी शपथ नहीं लेते हैं। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने पहले ही ऐसी संभावना जता दी थी कि सरकार, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जाएगी। बाद में वैसा ही हुआ, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टे ले लिया। अब 14 फरवरी 2024 को पुलवामा डे के अवसर पर दिल्ली में लाखों अर्धसैनिक परिवार एकत्रित होंगे और अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरु करेंगे।

पुरानी पेंशन, बन सकता है चुनावी मुद्दा

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' में पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने जो अहम फैसला दिया था, उसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टे ले लिया है। रणबीर सिंह के मुताबिक, यह कदम पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर भारी असर डालेगा। इतना ही नहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने सरकार को याद दिलाया है कि किस तरह महज एक प्रतिशत वोट के अंतर से हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सत्ता खिसक गई। हिमाचल के विधानसभा चुनाव में 'ओपीएस' एक बड़ा मुद्दा बना था। कर्नाटक चुनाव में भी ओपीएस ने रंग दिखाया था। देश में 20 लाख पैरामिलिट्री परिवार व उनके पड़ोसी, रिश्तेदार एवं चाहने वाले, जिनकी आबादी पांच फीसदी है, यह संख्या चुनाव में महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका अदा करेगी।

एनपीएस में चार हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी

फेडरेशन के महासचिव रणबीर सिंह कहते हैं, सरकारें भूल रही हैं कि निर्वाचन आयोग के आदेश के मुताबिक, पोलिंग बूथ पर सिर्फ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए जाते हैं। ये जवान, चुनावों में बराबर निष्पक्ष भूमिका निभाते आए हैं। जब एक सिपाही चालीस साल तक देश की सेवा करने के बाद रिटायर होता है, तो बिना पेंशन के उसका गुजर बसर कैसे होगा। देश के सामने यह एक गंभीर सवाल है। एनपीएस तो शेयर व बाजार भाव पर टिका है। मौजूदा समय में बाजार भाव की पतली हालत से सभी वाकिफ हैं। 2004 के बाद सेवा में आए नई पेंशन पाने वाले जवानों की रिटायरमेंट की शुरुआत 2024 में हो जाएगी। तब पता चलेगा कि उन्हें तीन या चार हजार रुपये मासिक पेंशन मिल रही है। इतनी पेंशन तो तब मिलती थी, जब भारत एक गरीब देश था। पांच ट्रिलियन इकॉनमी की तरफ बढ़ रहे देश में क्या आज भी वही पेंशन मिलेगी।

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