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Cancer: युवाओं में बढ़ा कैंसर का खतरा, 20 फीसदी मरीजों की आयु 40 से कम; 67% इलाज के लिए निजी अस्पताल पर निर्भर

Mon, 27 May 2024 02:34 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 27 May 2024 02:34 AM IST
सार

एनजीओ कैंसर मुक्त भारत फाउंडेशन की कैंसर मरीजों के लिए चलाई जाने वाली हेल्पलाइन पर दूसरी राय लेने के लिए फोन करने वालों में 20 फीसदी कैंसर मरीज 40 साल की कम उम्र के हैं। यह साफ इशारा है कि युवाओं में कैंसर बढ़ रहा है।

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Cancer Mukt Bharat Foundation report claims increased risk of cancer among Indian youth
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : एएनआई

विस्तार

देश के युवा कैंसर की गिरफ्त में हैं। यह खुलासा ऑन्कोलॉजिस्ट के एक समूह के शुरू किए एनजीओ कैंसर मुक्त भारत फाउंडेशन की रिपोर्ट में हुआ है। एनजीओ की कैंसर मरीजों के लिए चलाई जाने वाली हेल्पलाइन पर दूसरी राय लेने के लिए फोन करने वालों में 20 फीसदी कैंसर मरीज 40 साल की कम उम्र के हैं। यह साफ इशारा है कि युवाओं में कैंसर बढ़ रहा है।

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कैंसर मुक्त भारत फाउंडेशन के मुताबिक, मरीजों के लिए निशुल्क दूसरी राय लेने के लिए हेल्पलाइन नंबर (93-555- 20202) शुरू किया गया। यह सोमवार से शनिवार तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चालू रहता है। कैंसर मरीज प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट से सीधे बात करने के लिए इन हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं या कैंसर के इलाज पर चर्चा करने के लिए वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। इस हेल्प लाइन पर एक मार्च से 15 मई के बीच 1,368 कैंसर मरीजों की कॉल उन्हें आई थीं। एनजीओ के मुताबिक, सबसे ज्यादा कॉल हैदराबाद से थीं। इसके बाद मेरठ, मुंबई और नई दिल्ली का नंबर था। इनमें 40 साल से कम उम्र के कैंसर मरीजों में 60 फीसदी मरीज पुरुष थे।
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सिर और गर्दन के कैंसर सबसे अधिक
अध्ययन में देखा गया कि सबसे अधिक सिर और गर्दन के कैंसर (26 फीसदी) के थे। इसके बाद गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर (16 फीसदी), स्तन कैंसर (15) फीसदी) और फिर रक्त कैंसर (9 फीसदी) थे। अध्ययन में यह भी पाया गया कि भारत में 27 फीसदी मामलों में कैंसर का पता चरण 1 और 2 और 63 फीसदी में चरण 3 या 4 में पहुंचने पर पता चलता है। हेल्पलाइन पर कैंसर रोगियों आम सवाल अपने इलाज के सही, अपडेटेड, नवीनतम होने और दवाई को लेकर थे। वहीं, कई मरीज अपने कैंसर के चरण और रोकथाम के बारे में जानकारी लेते थे।
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उपचार में मिलेगी मदद...
कैंसर मुक्त भारत अभियान का नेतृत्व करने वाले मुख्य अन्वेषक और वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आशीष गुप्ता का कहना है कि हेल्पलाइन नंबर के लॉन्च के बाद से यह पूरे भारत में कैंसर मरीजों के लिए मददगार प्रणाली साबित हुई है। इस पर हर दिन लगभग सैकड़ों कॉल आती हैं। यह अध्ययन हमें इलाज के लिए अधिक लक्षित कैंसर दृष्टिकोण अपनाने और भारत को कैंसर मुक्त बनाने में मदद करता है। भारत जैसी बड़ी आबादी वाली देश में सही स्क्रीनिंग को कम अपनाने की वजह से लगभग दो तिहाई मामलों में कैंसर का देर से पता चलता है।


कैंसर मरीज निजी अस्पतालों के भरोसे
अध्ययन से पता चला कि 67 फीसदी कैंसर रोगी निजी अस्पतालों में तो 33 फीसदी सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे थे। डॉ. आशीष गुप्ता का कहना है कि हमारे देश में बढ़ता मोटापा, आहार संबंधी बदलाव, खास तौर से अल्ट्रा- प्रोसेस्ड भोजन की खपत में बढ़ोतरी और गतिहीन जीवनशैली भी उच्च कैंसर दर को बढ़ा रही है।

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