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RG Kar Case: आरजी कर मामले में कई रहस्य खुलने के बाद भी CBI के हाथ खाली, सबूतों के अभाव के चलते जांच प्रभावित

Mon, 09 Sep 2024 11:48 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 09 Sep 2024 11:48 AM IST
सार

अस्पताल के सेमिनार कक्ष में नौ अगस्त को प्रशिक्षु डॉक्टर का शव मिलने के बाद से घटना के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन हुए। इस मामले में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है, मगर सीबीआई अधिकारियों के हाथ अभी खाली हैं। 

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Can of worms opened but lack of evidence affects CBI probe into RG Kar rape-murder case news updates
कोलकाता की घटना के विरोध में जुलूस निकालते डॉक्टर। - फोटो : संवाद

विस्तार

पश्चिम बंगाल में प्रशिक्षु महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को आज पूरा एक महीना बीत गया है। मगर, सीबीआई के हाथ अभी भी खाली है। जांचकर्ता अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुए अपराध की असली वजह क्या है। अधिकारी इसके बीच का कारण सबूतों का अभाव होना बता रहे हैं। 

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यह है मामला
गौरतलब है, अस्पताल के सेमिनार कक्ष में नौ अगस्त को प्रशिक्षु डॉक्टर का शव मिलने के बाद से घटना के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन हुए। पुलिस ने इस सिलसिले में अगले दिन कोलकाता पुलिस के नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया।टीएमसी सरकार और पश्चिम बंगाल पुलिस कठघरे में है। सुप्रीम कोर्ट से लगातार फटकार लग रही है। राज्य में हंगामा जारी है। वहीं, तनाव बढ़ता देख कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इससे पहले कोलकाता पुलिस मामले की जांच कर रही थी।
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 कई कड़ियां जोड़ने में असमर्थ सीबीआई अधिकारी
अब सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि सबूतों के अभाव के कारण वे मामले की कई कड़ियां जोड़ने में असमर्थ हैं। इससे जांच प्रभावित हुई है। जांच के दौरान पाया गया कि अस्पताल के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष ने 10 अगस्त को डॉक्टरों का रेस्ट रूम और सेमिनार हॉल से लगे शौचालय को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। आशंका है कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा इन क्षेत्रों का कुछ हिस्सा ढहाए जाने के कारण महत्वपूर्ण सबूत भी नष्ट हो गए।
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सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो में यह भी दिख रहा कि शव मिलने के तुरंत बाद सेमिनार हॉल में लोगों की भीड़ लग गई थी। हालांकि, पुलिस ने दावा किया कि कमरे के अंदर की जगह को घेर लिया गया था।

सीबीआई ने घोष, अन्य चिकित्सकों, अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और गिरफ्तार मुख्य आरोपी संजय रॉय सहित गवाहों से पूछताछ की है। एक अधिकारी ने बताया, ‘इस मामले में सबूतों का अभाव है। यही कारण है कि हमारी जांच किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रही है। परिस्थितिजन्य सबूत, लोगों से पूछताछ और डीएनए साक्ष्यों से महिला पर यौन हमले में कई लोगों की संलिप्तता की पुष्टि नहीं हो पा रही है।’

डीएनए मिले
उन्होंने कहा कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) में किए गए फोरेंसिक परीक्षणों में, पीड़िता के शरीर के एक हिस्से में पाए गए डीएनए, मौके पर पाए गए डीएनए और गिरफ्तार नागरिक स्वयंसेवक के डीएनए के बीच मिलान की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, पीड़िता और रॉय से एकत्र नमूनों पर अलग-अलग डीएनए जांच और अपराध स्थल से मिले अन्य सबूतों के साथ डीएनए की तुलना ने भी सीएफएसएल रिपोर्ट की पुष्टि की

परिजनों का भी दावा- सबूतों के साथ की गई छेड़छाड़
सबूतों के साथ छेड़छाड़ के सीबीआई के दावों को दोहराते हुए मृतका के परिजनों ने भी यही आरोप लगाया है। मृतका की मां का कहना है, ‘जब हम वहां पहुंचे (उसकी मौत के बाद), तो हमने सेमिनार हॉल के अंदर कई लोगों को पाया। एक पुलिसकर्मी प्रवेश द्वार की रखवाली कर रहा था और कई अन्य बाहर खड़े थे। यह माना जा सकता है कि पूरा दृश्य बहुत सावधानी से तैयार किया गया था। अपराध की क्रूरता को देखते हुए, ऐसा नहीं हो सकता।’

'असली अपराधियों का बचाया जा रहा'
आरोपी के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को असली अपराधियों को बचाने के लिए फंसाया गया है।

पूर्व प्राचार्य घोष पर धन की हेराफेरी करने का आरोप
अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पूर्व प्राचार्य घोष को तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था। इस संबंध में सीबीआई अधिकारी ने कहा कि उन्हें और भी नाम मिले हैं जो इसमें कथित तौर पर शामिल थे। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष बताया है कि घोष की, 2022 से 2023 तक अस्पताल में प्राचार्य के रूप में कार्यकाल के दौरान धन की हेराफेरी करने और 84 अवैध नियुक्तियों में महत्वपूर्ण भूमिका थी। 

ईडी भी कर रहा जांच
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी वित्तीय अनियमितताओं के मामले की साथ साथ जांच कर रहा है, जिसमें खुलासा हुआ है कि पूर्व प्रिंसिपल और उनकी पत्नी के पास पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में एक शानदार बंगला है। उन्होंने घोष के स्वामित्व वाली और भी संपत्ति का पता लगाया और उनके आवास पर तथा उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों के आवासों पर भी तलाशी अभियान के दौरान कई ‘महत्वपूर्ण’ दस्तावेज जब्त किए।

ईडी ने घोष के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है और अपनी जांच शुरू कर दी है। ईसीआईआर को आम तौर पर ईडी द्वारा केस सूचना रिपोर्ट के रूप में दायर किया जाता है। यह आपराधिक मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के समान है।




मीडिया की खबरों में यह भी दावा किया गया है कि स्वास्थ्य विभाग में तबादलों सहित प्रशासन के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करते हुए कथित तौर पर घोटाला चल रहा था जिसमें छात्रों की परीक्षाओं के दौरान अनुचित साधनों का भी इस्तेमाल भी शामिल है।

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