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Kolkata: 'पत्नी की मित्र-मायके वालों का टिके रहना पति के साथ क्रूरता'; तलाक के मुकदमे में हाईकोर्ट का फैसला

Mon, 23 Dec 2024 04:09 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 23 Dec 2024 04:09 PM IST
सार

 जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस उदय कुमार की खंडपीठ ने पति के पक्ष में तलाक का फैसला न देने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया और इसे त्रुटिपूर्ण करार दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपीलकर्ता (पति) ने प्रतिवादी (पत्नी) के खिलाफ मानसिक क्रूरता का पर्याप्त मजबूत मामला दर्ज कराया है जिससे इन आधार पर तलाक देने को उचित ठहराया जा सकता है।

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Calcutta High Court grants divorce decree to husband for 'imposition' of wife's friend, family on him
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

तलाक के एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया है। फैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि पति की इजाजत के बिना पत्नी के दोस्तों और उसके रिश्तेदारों का उसके घर में ज्यादा रहना क्रूरता है। इतना ही नहीं, तब इसकी और भी अति हो जाती है जबकि पत्नी घर में न हो। न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 19 दिसंबर को याची पति द्वारा दाखिल अपील पर फैसला सुनाते हुए उसे तलाक की डिक्री दे दी। बता दें कि यह मामला बीते16 साल से अदालत में था। पत्नी ने इस मामले में पति के खिलाफ वैवाहिक क्रूरता का झूठा मुकदमा भी दर्ज करा रखा था।

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 जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस उदय कुमार की खंडपीठ ने पति के पक्ष में तलाक का फैसला न देने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया और इसे त्रुटिपूर्ण करार दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपीलकर्ता (पति) ने प्रतिवादी (पत्नी) के खिलाफ मानसिक क्रूरता का पर्याप्त मजबूत मामला दर्ज कराया है जिससे इन आधार पर तलाक देने को उचित ठहराया जा सकता है।

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खत्म हुआ विवाह
हाईकोर्ट के क्रूरता के आधार पर पति को राहत देने के साथ यह विवाह समाप्त हो गया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि पूर्वी मिदनापुर जिले के कोलाघाट में पति के सरकारी आवास में उसकी आपत्ति और असहजता के बावजूद पत्नी की महिला मित्र और उसके परिवार के अन्य सदस्य लगातार टिके रहते थे।
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पीठ ने कहा, प्रतिवादी की मित्र और परिवार को पति की इच्छा के विरुद्ध उसके क्वार्टर में लगातार लंबे समय तक रखना, कभी-कभी तो स्वयं प्रतिवादी यानी पत्नी के वहां न होने को भी निश्चित रूप से क्रूरता माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में पत्नी ने एकतरफा निर्णय लेकर काफी समय तक पति के साथ वैवाहिक जीवन जीने से इंकार किया तथा निस्संदेह लंबे समय तक अलगाव रहा, जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि वैवाहिक बंधन अब सुधार से परे हो चुका है।


 महिला मित्र के साथ समय बिताती थी पत्नी
पति ने दलील दी थी कि पत्नी अधिकतर समय अपनी महिला मित्र के साथ बिताती थी जो अपने आप में क्रूरता का कृत्य है। इनकी शादी 15 दिसंबर 2005 को हुई थी। पति ने 25 सितंबर 2008 को तलाक का मुकदमा दायर किया और उसी वर्ष 27 अक्तूबर को पत्नी ने पति और उसके परिवार के खिलाफ नवद्वीप थाने में पंजीकृत डाक से शिकायत भेजकर वैवाहिक क्रूरता का मामला दर्ज करा दिया था।
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