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कोलकाता: हाईकोर्ट ने दबे ट्राम ट्रैक को बहाल करने के दिए निर्देश, कहा- सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं ट्राम्स

Tue, 14 Jan 2025 10:30 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 14 Jan 2025 10:30 PM IST
सार

Calcutta High Court: जनहित याचिका पर सुनवाई करते हए मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

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Calcutta High Court gave instructions to restore buried tram track, says Trams are part of cultural heritage
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि ट्राम्स कोलकाता की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं, शहर में अवैध रूप से दबा दिए गए ट्राम ट्रैक को बहाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि भारत के किसी अन्य शहर में ये इलेक्ट्रिक ट्राम्स नहीं चलतीं। एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए, जिसमें यह अनुरोध किया गया था कि कोलकाता में विशेष रूप से संचालित होने वाली ट्राम सेवाओं को जारी रखा जाए और जिन स्थानों पर यह सेवाएं बंद हो चुकी हैं, वहां उन्हें फिर से शुरू किया जाए। 

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जनहित याचिका पर सुनवाई करते हए मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति होनी चाहिए। पीठ ने निर्देश दिया कि ट्राम ट्रैक, जिन्हें अवैध रूप से दबा दिया गया है, उन्हें बहाल किया जाए। कोर्ट ने कोलकाता पुलिस को ट्राम ट्रैक को दबाने की शिकायतों की जांच करने और इसे करने वालों की पहचान करने का निर्देश दिया। 
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कोर्ट ने पहले यह निर्देश दिया था कि ट्राम ट्रैक को दबाया नहीं जाए, लेकिन दो शिकायतें कोलकाता पुलिस के पास आईं थीं, जिनमें यह आरोप था कि कुछ स्थानों पर यह काम किया गया है। पीठ ने कहा कि यह विश्वास करना कठिन है कि बिना संबंधित अधिकारियों की "आशीर्वाद" के इस तरह की कार्रवाई की गई होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि चार हफ्तों के भीतर इस मामले पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जिसमें आवश्यक फोटो भी शामिल हों, इसके बाद मामले की फिर से सुनवाई की जाएगी।
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पीठ ने कहा, ट्राम सेवाओं को बंद करना एक आसान कार्य है, लेकिन फिर भी राज्य को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह कोलकाता की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए भी जिम्मेदार है। पीठ ने यह भी कहा कि जब पश्चिम बंगाल सरकार ने महानगर में धरोहर भवनों को संरक्षित करने के लिए एक अलग विभाग बनाया है, तो वह यह समझ नहीं पा रही कि ट्राम्स के मामले में ऐसा विचार क्यों नहीं किया जा रहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि दुनिया के अन्य देशों में, जैसे स्विट्जरलैंड, जहां ट्राम्स चलती हैं, वहां भी इन ट्राम ट्रैकों का रास्ता सड़कों के बीच से गुजरता है, ठीक वैसे ही जैसे कोलकाता में होता है। पीठ ने यह टिप्पणी की कि कोलकाता पुलिस ने इसे एक कारण बताया था कि इससे दुर्घटनाएं हो रही हैं, और यह स्थिति राज्य के महाधिवक्ता द्वारा उनके तर्कों में भी दोहराई गई थी।


ट्राम को बचाने की दिशा में बड़ा कदमः देवाशीष
कोलकाता ट्राम यूजर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष देवाशीष भट्टाचार्य ने कोर्ट के निर्देश को ट्राम को बचाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा, मंगलवार कोर्ट के जब पूछा कि ट्राम लाइन को किसने दबाया, तब कोर्ट को बताया गया कि इसकी जानकारी न परिवहन  विभाग को है, न ट्रैफिक पुलिस को और न ही कोलकाता कॉरपोरेशन को है। किसी भी विभाग ने ट्राम्स लाइन को दबाने का कोई आदेश नहीं दिया है। निश्चित रूप से अगली सुनवाई में शायद पता चल जाएगा कि किसके आदेश पर यह काम किया गया। हालांकि, यह एक सुखद खबर है।

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