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Calcutta High Court: अदालत में TMC उम्मीदवार की याचिका खारिज, मतगणना केंद्र को बदलने के फैसले को दी थी चुनौती

Thu, 30 Apr 2026 11:08 PM IST
Rahul Kumar पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 30 Apr 2026 11:08 PM IST
सार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निर्वाचन आयोग (ईसी) द्वारा कस्बा विधानसभा क्षेत्र के लिए मतगणना केंद्र को बदलने के फैसले को चुनौती दी गई थी। इसके साथ ही मतगणना से केंद्रीय कर्मचारियों को हटाने के लिए दायर याचिका को भी उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। 

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Calcutta High Court dismisses TMC candidate's petition challenging shifting of vote counting centre by EC
कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जावेद अहमद खान की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निर्वाचन आयोग (ईसी) द्वारा कस्बा विधानसभा क्षेत्र के लिए मतगणना केंद्र को बदलने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले में कोई गैर-कानूनी बात नहीं है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के इस फैसले में कोई भी अवैधता नहीं पाई गई। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सामान्यतः मतगणना केंद्र जिला मुख्यालय में ही बनाए जाने चाहिए और केवल विशेष परिस्थितियों में, ठोस कारणों के आधार पर ही इन्हें उप-संभागीय मुख्यालय में स्थापित करने की अनुमति दी जा सकती है।
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मतगणना केंद्र को गीतांजलि स्टेडियम से विहारीलाल कॉलेज में स्थानांतरित किए जाने में कोई गैर-कानूनी बात नहीं होने का उल्लेख करते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने खान की याचिका खारिज कर दी। खान तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर लगातार चौथी बार इस क्षेत्र से किस्मत आजमा रहे हैं।
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 केंद्रीय कर्मचारियों को तैनात करने के चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ याचिका खारिज
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना के लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के कर्मचारियों को तैनात करने के चुनाव आयोग के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों 23 और 29 अप्रैल को हुआ था और वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

याचिकाकर्ता के वकील कल्याण बनर्जी ने जस्टिस कृष्ण राव की अदालत के समक्ष दलील दी थी कि चुनाव आयोग की अधिसूचना में कहा गया है कि वोटों की गिनती के दौरान अनियमितताओं की आशंकाओं को देखते हुए, इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मेज पर मौजूद गिनती पर्यवेक्षकों और गिनती सहायकों में से कम से कम एक व्यक्ति केंद्र सरकार या केंद्रीय पीएसयू का कर्मचारी होगा। बनर्जी ने दावा किया कि यह पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

बनर्जी तृणमूल कांग्रेस सांसद भी हैं। याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के वकील जिष्णु चौधरी ने अदालत के समक्ष कहा कि यह चुनाव आयोग की ओर से प्रयोग किए गए विवेकाधिकार की न्यायिक जांच का प्रश्न है। चुनाव आयोग ने अपने विवेक से इस काम के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों को चुना है और यह कोई ऐसा काम नहीं है जो कानून के विपरीत हो।

जस्टिस राव की अदालत में एक और याचिका दायर की गई थी। इसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग ने दक्षिण कोलकाता के कस्बा विधानसभा क्षेत्र में मतगणना केंद्र में आखिरी समय में बदलाव किया है। याचिकाकर्ता और तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जावेद अहमद खान ने दावा किया कि कस्बा सीट के लिए मतगणना केंद्र को निर्वाचन क्षेत्र के अंदर स्थित गीतांजलि स्टेडियम से हटाकर अलीपुर के बिहारीलाल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया था। चुनाव आयोग के वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि स्थान बदलने का कारण मतगणना केंद्रों को सुव्यवस्थित करना था।  


कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज की टीएमसी की याचिका
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनाव की मतगणना को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मांगों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मतगणना सुपरवाइजर और असिस्टेंट के तौर पर केंद्र सरकार और पीएसयू (PSU) कर्मचारियों की नियुक्ति के फैसले को वैध ठहराया है। इसी के साथ कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका को भी रद्द कर दिया।

इसी के साथ अदालत ने साफ किया-
  • मतगणना प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
  • ऐसी नियुक्तियां करना चुनाव आयोग का अधिकार है और यह अवैध नहीं है।
  • हैंडबुक के नियम चयन को केवल राज्य कर्मचारियों तक सीमित नहीं करते हैं।
  • माइक्रो ऑब्जर्वर, एजेंट और सीसीटीवी की मौजूदगी पारदर्शिता सुनिश्चित करती है, जिससे आरोप केवल अनुमान लगते हैं।
  • अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी (ACEO) के पास जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत वैध अधिकार हैं।
  • इसलिए, जारी किया गया आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है।
  • कोर्ट ने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार का स्टाफ राजनीतिक प्रभाव में काम करेगा क्योंकि:
  • मतगणना हॉल में कई पक्ष मौजूद रहते हैं।
  • सीसीटीवी और ऑब्जर्वर जैसी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है।
  • आरोप बिना किसी सबूत के केवल आशंकाएं थे।
  • चल रही चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप को हतोत्साहित किया जाता है।
  • किसी भी शिकायत को चुनाव याचिका (RP एक्ट, 1951 की धारा 100) के माध्यम से उठाया जा सकता है।
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