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WB: गैर-सियासी मामलों सरकारी वकीलों की अनुपस्थिति पर भड़का कलकत्ता HC, मुख्य न्यायाधीश ने स्थिति को बताया दुखद

Thu, 05 Sep 2024 04:37 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 05 Sep 2024 04:37 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल सरकार के वकीलों के गैर-राजनीतिक मामलों की सुनवाई के दौरान अनुपस्थिति पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई है। मुख्य न्यायाधीश ने मामले में पहले से जारी निर्देश के बावजूद ऐसी स्थिति पर चिंता जताते हुए ये टिप्पणी की है।

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Cal HC takes serious exception to state lawyers' absence in non-political cases
कलकत्ता हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अपने समक्ष आने वाले मामलों में पश्चिम बंगाल सरकार के वकीलों की अनुपस्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की, खासकर जब मामले राजनीतिक रूप से संवेदनशील न हों। बता दें कि सुंदरबन में बाघ हमले के पीड़ितों की दुर्दशा के बारे में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगनम ने पहले दिए निर्देशों के बावजूद राज्य के प्रतिनिधित्व के अभाव पर ये टिप्पणी की है।
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मुख्य न्यायाधीश ने स्थिति को बताया 'दुखद'
मुख्य न्यायाधीश शिवगनम ने राज्य सरकार की तरफ से वकीलों को मामले सौंपे जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्थिति को बहुत दुखद बताया। इस दौरान उन्होंने हर मामले में राज्य के प्रतिनिधित्व के बारे में पूछताछ करने की असुविधा पर ध्यान दिया। यह कहते हुए कि वकीलों को मामलों का आवंटन राज्य सरकार की तरफ से उचित तरीके से किया जाना चाहिए, पीठ ने कहा, यदि यह कोर्ट नंबर 1 (मुख्य न्यायाधीश की अदालत) में होता है, तो अन्य अदालतों की दुर्दशा की कल्पना करें।
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पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने मांगी माफी
वहीं न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य की भी खंडपीठ ने कहा कि यह खेद की बात है कि 9 मई को आदेश पारित करने के बावजूद राज्य की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ। जबकि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को तय की है। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार के वकील मोहम्मद गालिब, जो अदालत में मौजूद थे, लेकिन जनहित याचिका में शामिल नहीं थे, ने राज्य की ओर से बिना शर्त माफी मांगी।उनसे अनुरोध किया गया कि वे सरकारी वकील के कार्यालय को सूचित करें ताकि सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित किए जा सकें।
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पीठ ने कहा कि उसके समक्ष मौजूदा याचिका में न्यायालय ने 9 मई को याचिकाकर्ता को सरकारी वकील के कार्यालय में नोटिस देने का निर्देश दिया था, ताकि राज्य की ओर से एक वकील उपस्थित हो सके और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उसके समक्ष दलीलें रख सके। न्यायालय ने कहा कि अप्रैल में पहले भी राज्य का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकीलों ने किया था।

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